Pawan Jury BhilwaraRj
पिछले 18 माह में पड़ोसी देशो के साथ भारत के सम्बन्धो में निम्नलिखित 'वास्तविक' परिवर्तन आये।
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(१) बांग्लादेश
UN ट्रिब्यूनल ने 30 साल से चल रहे विवाद पर फैसला सुनाते हुए बंगाल की खाड़ी में 25000 वर्ग किमी समन्दर पर बांग्लादेश का दावा मंज़ूर कर लिया। इस इलाके में खनिज तेल तथा उर्जा के विपुल भण्डार है। जिस पर अब बांग्लादेश का अधिकार हो गया है ।मछली वगेरह भी अब उनके मछुआरे ही पकड़ेंगे वहां पर। जल्द ही चीन जो कि बांग्लादेश में अपना नौ-सैनिक अड्डा बना रहा है, इन इलाको के ऊर्जा भंडारों का दोहन कर सकेगा और इससे चीन की घुसपेठ भारत की समुद्री सीमा में और भी बढ़ जायेगी।
http://www.telegraphindia.com/1140709/jsp/frontpage/story_18596046.jsp#.VmawWbh97IU
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(२) चीन और पाकिस्तान
पाकिस्तान को चीन से सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए चीन ने अपनी महत्वकांक्षी योजना पर काम शुरू किया। 46 अरब डॉलर के निवेश से बनने वाले इस 3000 किमी लम्बे कोरिडोर में सड़कों, रेलमार्ग, तेल-गैस पाइपलाइन और औद्योगिक पार्क का नेटवर्क बनेगा ।चीनी शहर काश्गर को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने वाला यह विशाल कोरिडोर पाक अधिकृत कश्मीर तथा भारत पाकिस्तान की अन्तराष्ट्रीय सीमा के समान्तर होकर गुजरेगा।
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मतलब यह कि भारत और पाकिस्तान की सीमा के बीच अब चीन आ गया है। जहां से वह युद्ध के दौरान सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति त्वरित रूप से कर सकता है, और भारत पर निगरानी बनाये रख सकता है।
http://www.google.co.in/url?q=http%3A%2F%2Fwww.bbc.com%2Fnews%2Fworld-asia-32377088&sa=U&ei=fslBVa36BePUmAXgjIDAAg&ved=0CCAQFjAI&usg=AFQjCNGPoOeeQUi0rcbxz89My4H07_nyng
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(३) चीन
जब चीन के राष्ट्रपति हाई स्पीड ट्रेन और 'करमुक्त' औद्यौगिक पार्क लेने अहमदाबाद आये तो अपनी सेना भी साथ ले आये। चीनी सेना भारत की सीमाओं में 25 किलोमीटर तक अंदर घुस आयी और भारत निंदा तक नहीं कर सका। क्योंकि जिनपिंग ने साफ़ कर दिया था कि उनकी शर्तो को नहीं मानने तक चीनी सेनाएं वापिस नहीं लौटेगी। हमने शर्ते मानी।
http://www.wsj.com/articles/chinas-president-xi-jinping-arrives-in-delhi-as-troops-face-off-at-india-china-border-1410968062
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(४) नेपाल
नेपाल ने अपने नए संविधान में मधेशीयों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया, जिसके फलस्वरूप भारत और नेपाल के रिश्ते बिगड़े। मधेशी नेपाल और भारत के उत्तरी राज्यों की सीमा से लगे नेपाल के तराई क्षेत्र में रहते है, तथा भारत के प्रतीकात्मक प्रतिनिधी माने जाते है। विरोध प्रदर्शन हिंसा में 50 से ज्यादा मधेशी मारे जा चुके है और भारत से नेपाल को होने वाली तेल, दवाइयाँ, खाद्य सामग्री आदि की आपूर्ति बाधित बनी हुयी है।
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चीन और पाकिस्तान ने नए संविधान का स्वागत किया है, और चीन ने नेपाल को तेल-गैस आदि की आपूर्ति शुरू कर दी है। भारत की नाराजगी पर नेपाल के प्रधानमंत्री का कहना है कि भारत उनके निजी मामलो में टांग न अड़ाए तो बेहतर होगा।
http://indianexpress.com/article/world/neighbours/make-seven-changes-to-your-constitution-address-madhesi-concerns-india-to-nepal/
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(५) पाकिस्तान
पाकिस्तान ने छोटे परमाणु बमों (टैक्टिकल न्यूक्लियर बॉम्ब) का निर्माण शुरू कर दिया है, और अमेरिका के एतराज जताने पर कहा है कि यह बम भारत के लिए है तथा परमाणु अस्त्रों का निर्माण जारी रहेगा। पाकिस्तान ने 'नो फर्स्ट यूज' जैसे किसी भी समझौते पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया है, जबकि भारत पहले से ही 'भविष्य में किसी भी प्रकार का परमाणु शोध न करने, परमाणु हथियार न बनाने और बिना अमेरिका की अनुमति के परमाणु अस्त्रों के इस्तेमाल न करने का समझौता कर चुका है'
http://www.breitbart.com/national-security/2015/10/22/world-view-pakistan-will-use-tactical-nuclear-weapons-against-india/
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(६) तिब्बत
चीन ने तिब्बत में दुनिया का सबसे ऊँचे और बड़े बाँध पर विद्युत उत्पादन शुरू किया, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ गयी। ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस विशालकाय बाँध से चीन 2.5 बिलियन किलो वॉट बिजली का सालाना उत्पादन करेगा। थोड़ी बहुत बिजली तिब्बत को भी मिलेगी, बाकी चीन को जायेगी। भारत इस परियोजना पर शुरू से ही एतराज जताता आ रहा था, क्योंकि इससे पूर्वोत्तर भारत की पारिस्थितिकी चीन के नियंत्रण में आ जायेगी, और चीन किसी भी समय बाँध के गेट खोलकर पूर्वोत्तर के राज्यों को जल-मग्न कर सकता है। चीन ने भारत के एतराज को खारिज करते हुए बाँध शुरू कर दिया।
(७) श्रीलंका
श्रीलंका ने अपने तट का १०० हेक्टेयर का इलाका चीन को 99 साल लिज़ पर दे दिया है। चीन वहाँ पर 1.4 बिलियन डॉलर खर्च करके अपना पोर्ट बना रहा है, और चीन ने वहाँ अपना युद्धपोत और पनडुब्बी भी तैनात की। भारत ने श्रीलंका से इस प्रोजेक्ट को नामंजूर करने को कहा तथा इसे श्रीलंका ने रोक भी दिया था। लेकिन इस प्रोजेक्ट को फिर से मंजूरी मिल गयी और काम शुरू हो गया। मोदी साहेब और अजित डोभाल साहेब ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसे श्रीलंका सरकार ने खारिज कर दिया है।
http://amti.csis.org/indian-ocean/
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http://www.newindianexpress.com/world/India-Asked-Lanka-to-Stop-Colombo-Port-City-Project-Says-Gotabaya/2015/07/17/article2925995.ece
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(८) मालदीव
मालदीव ने चीन को मालदीव के टापू खरीदने और उनको विकसित करने के लिए क़ानून बनाकर अनुमति दी। चीन भारत और मालदीव के बीच बिखरे इन टापुओं का अधिग्रहण कर सकेगा और नए टापू भी बना सकेगा। इससे भारत और चीन के बीच मालदीव की उपस्थिति लुप्त हो जायेगी और चीन सीधे भारत तक बढ़ आएगा। भारत सरकार ने इस पर चिंता व्यक्त की है, किन्तु चीन और मालदीव ने भारत को 'चिंता न करने' को कहा है।
http://nationalinterest.org/blog/the-buzz/get-ready-china-could-build-new-artificial-islands-near-13446
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समस्या
समस्या यह है कि भारत की सेना और अर्थव्यवस्था दोनों कमजोर है, और विदेश नीति इन्ही दो पहलुओ पर चलती है, विदेशो में जाकर भाषण देने और चमकदार फोटो खिंचवाने से नहीं।
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1. भारतीय सेना आयातित हथियारों पर आश्रित है। अत: जब तक हम खुद के स्वदेशी आधुनिक हथियार बनाने की हैसियत नही बना लेते, तब तक हम पर पडोसी देशो का शिकंजा इसी तरह कसता चला जाएगा। लेकिन मोदी साहेब उलटी दिशा में दौड़ लगा रहे है। वे अमेरिकी कम्पनियो को भारत में आकर हथियारों का उत्पादन करने को कह रहे है, जिससे भारत की बची खुची हथियार निर्मात्री इकाइयों को भी अमेरिकी कंपनिया निगल जायेगी और हमारी सेना हमेशा के लिए परजीवी हो जायेगी। अमेरिकी हमें हथियार देंगे तो ही हम चीन या पाकिस्तान से युद्ध कर सकेंगे, अत: भारत अमेरिका का बिना शर्त गुलाम हो जाएगा।
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2. भारत के पास डॉलर भी नहीं है। हम 400 बिलियन डॉलर के कर्ज के निचे दबे हुए है। हथियार, तेल, दवाईंयां, संचार उपकरण, मोबाइल आदि तकनीक के क्षेत्र में सब कुछ आयात कर रहे है। इससे कर्ज लागतार बढ़ रहा है। यदि हमने स्वदेशी तकनीक का विकास करने के लिए स्वदेशी इकाइयों को सरंक्षण नही दिया तो 'मेक इन इण्डिया' के दरवाजे से सभी क्षेत्रो को विदेशी कंपनिया हथिया लेगी और हम हर क्षेत्र में विदेशी कम्पनियो पर निर्भर हो जाएंगे।
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समाधान
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हमें राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, टीसीपी और हथियार बंद नागरिक समाज जैसे दर्जनो कानूनो की जरुरत है, जिनकी सहायता से हम 5 साल के भीतर अपनी सेना को अमेरिका, चीन, ब्रिटेन आदि देशो के बराबर मजबूत बना सकते है, और भारत में स्वदेशी तकनीक का विकास करके आत्मनिर्भर हो सकते है।
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यदि आप भारत की सेना को मजबूत बनाने और स्वदेशी तकनीक के विकास का समर्थन करते है तो अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि, निम्नलिखित कानूनो को गैजेट में प्रकाशित किया जाए :
https://web.facebook.com/notes/809761655808739
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RRG
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