Pawan Jury BhilwaraRj
कश्मीरी पंडितो के पुनर्वास के लिए आर्थिक पैकेज नाकाफी है। यदि कश्मीर पर भारत अपनी पकड़ बनाने में सफल नहीं हुआ तो अव्वल तो वे बसेंगे नहीं, और बस भी गए तो उन्हें फिर से उजड़ते देर नहीं लगेगी। कश्मीर पर पकड़ बनाने के लिए जरुरी है कि भारत अपनी सेना को मजबूत करे। पुनर्वास के लिए आर्थिक पैकेज, नौकरियां, मकान आदि की घोषणाओं का सिर्फ प्रतीकात्मक महत्त्व है।
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मोदी साहेब ने कश्मीरी पंडितो को फिर से बसाने के लिए 2000 करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है, लेकिन ज्यादातर कश्मीरी पंडितो में सुरक्षा कारणों के चलते वापसी का भरोसा नहीं बन पा रहा है, और जब तक वहाँ पर आतंकवाद खत्म नही हो जाता यह भरोसा बनेगा भी नही।
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जनवरी 19, 1990 में जारी फतवे के कारण जब कश्मीरी पंडितो को कश्मीर छोड़कर जाना पड़ा था तब से अब तक कश्मीर के हालात में कोई उल्लेखनीय बदलाव नही आया है। 2004 में कश्मीरी पंडितो को बसाने के लिए यूपीए सरकार ने 1700 करोड़ का आर्थिक पैकेज दिया था। लेकिन इस पैकेज के बावजूद घाटी में अब तक सिर्फ एक परिवार का पुनर्वास किया जा सका है !!!
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ज्ञातव्य है कि जनवरी 4,1990 के दिन हिज्बुल मुजाहिदीन ने 'आफताब' समाचार पत्र में कश्मीरी पंडितो के लिए चेतावनी जारी करके उन्हें तीन विकल्प दिए गए थे, जिसे 14 जनवरी को 'अल सफा' उर्दू दैनिक में फिर से दोहराया गया ; १) इस्लाम ग्रहण करो २) या कश्मीर छोड़ दो ३) या मरने के लिए तैयार रहो। 19 जनवरी को हथियारबंद समूहों ने कश्मीरी पंडितो पर धावा बोल दिया और ३ लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितो को अपना माल, असबाब संपत्ति आदि छोड़कर घाटी से भागना पड़ा। कश्मीरी पंडितो को अपनी स्त्रियों और लड़कियों को छोड़कर जाने के लिए कहा गया, उनकी सम्पत्ति लूट ली गयी, मंदिरो और घरो को लूट कर जला दिया गया, कितनी हत्याएं हुयी कितने बलात्कार हुए उनका कोई हिसाब नही है। खदेड़ने वाले बहुसंख्य थे, ऐसा नही है। लेकिन वे हथियारबंद थे, और कश्मीरी पंडित निहत्थे।
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इतने भीषण नरसंहार के दोषियों पर कोई कार्यवाही आज तक नहीं हुयी, न ही सजा हुयी है। मुकदमे तक दर्ज नहीं किये गए। जाहिर है तब भी कश्मीर में आतंकवादी बेलगाम थे और आज भी बेलगाम है।
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अब कश्मीरी पंडित मांग कर रहे है कि हमारे लिए कश्मीर में अलग से बस्तियां बसाई जाए, जिनमे हम संगठित रूप से रह सके। उल्लेखनीय है कि पूर्व में कश्मीरी पंडित पूरी घाटी में छितरे हुए थे सभी क्षेत्रो में सामान्य रूप से निवास करते थे। क्या अलग से बस्तियां बसाने से कश्मीरी पंडित घाटी में सुरक्षित रह सकेंगे ? मेरे विचार में और भी असुरक्षित हो जाएंगे।
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पहली बात तो यह कि अलग से बस्तियों का बसाना घाटी में अलगाव को जन्म देगा और ऐसा करने से आम कश्मीरी जो कि इस सम्बन्ध में निस्पृह है कश्मीरी पंडितो के खिलाफ संगठित हो जाएंगे। दूसरे, इकट्ठे रहने के कारण हथियार बंद दस्तो के लिए उन्हें निशाना बनाना और भी आसान हो जाएगा। और नेशनल कांफ्रेंस और हुर्रियत पहले से ही अलग से बस्तियों के निर्माण का विरोध कर रहे है।
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दरअसल कश्मीरी पंडितो के पुनर्वास को लेकर समस्या यह है कि भारत की सेना कमजोर है, अत: सेना को मजबूत बनाये बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
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पाकिस्तान भारत अधिकृत कश्मीर को हड़पना चाहता है, अत: अलगाववादियों और आतंकियों को हथियार और पैसे की मदद देता है।
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दक्षिण एशिया में कश्मीर का सैन्य दृष्टी से रणनीतिक महत्त्व है, अत: अमेरिका कश्मीर को स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित करना चाहता है। यदि एक बार कश्मीर स्वतंत्र देश घोषित हो जाता है तो अमेरिका आसानी से उसे अधिग्रहित करके वहाँ अपनी सैन्य छावनी बना लेगा।
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कुल मिलाकर कश्मीर में अशांति और आतंकवाद कायम रहे, इससे पाकिस्तान और अमेरिका दोनों को ही लाभ है, जबकि भारत कश्मीर में शान्ति चाहता है। लेकिन जब तक भारत का कश्मीर पर पूर्ण नियंत्रण न हो जाए, किसी भी प्रकार की शान्ति स्थापना संभव नहीं है। स्पष्ट है कि, कश्मीर पर नियंत्रण उसी देश का रहेगा जिसकी सेना मजबूत हो।
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किन कानूनो की सहायता से हम भारत की सेना को इतना ताकतवर बना सकते है कि भारत कश्मीर पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर ले ?
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१) पारदर्शी शिकायत प्रणाली --- www.facebook.com/pawan.jury/posts/809753852476186
यह क़ानून भारत के करोड़ो नागरिको को वह प्रक्रिया उपलब्ध करवाएगा जिससे नागरिक अपनी आवाज संगठित, अधिकृत और पारदर्शी तरीके से प्रधानमन्त्री के सम्मुख रख सके।
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२) ज्यूरी सिस्टम ----- www.facebook.com/pawan.jury/posts/809746209143617
यह क़ानून हमारी स्वदेशी हथियार निर्माण इकाइयों को सरंक्षण देगा ताकि भारत अपने बूते पर 'मेड इन इण्डिया मेड बाय इंडियन' आधुनिक हथियारों का विकास कर सके।
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३) राईट टू रिकॉल पीएम --- https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/837611029690468
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यदि प्रधानमन्त्री भारत की सेना को परजीवी बनाये रखने के लिए विदेशी कम्पनियों को भारत में बुलाकर हथियार बनाने की नीति को जारी रखते है तो राईट टू रिकॉल प्रधानमन्त्री प्रक्रिया का प्रयोग करके नागरिक बहुमत द्वारा पीएम को नौकरी से निकाल सकेंगे।
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४) हथियार बंद नागरिक समाज --- www.facebook.com/pawan.jury/posts/809737552477816
प्रत्येक नागरिक के हाथ में बन्दुक देना, ताकि चीन, अमेरिका, ब्रिटेन आदि देश भारत पर हमला करने का साहस न करें।
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इन कानूनो के गैजेट में प्रकाशित होने हम कश्मीर के विधायको को पैसा देकर या धमका कर या समझा बुझा कर उन्हें मजबूर कर सकते है कि वे विधान सभा में धारा 370 को ख़त्म करने का प्रस्ताव पास करे। इसके बाद हम टीसीपी के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर का जनमत संग्रह करवाकर कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को मिलाकर एक राज्य बना सकते है।
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यदि अमेरिका इसमें हस्तक्षेप करता है तो हम अमेरिका को धमका सकते है कि यदि उसने कश्मीर में हस्तक्षेप किया तो भारत दक्षिण अमेरिकी देशो मेक्सिको, क्यूबा आदि को जैविक, रासायनिक और परमाणु हथियार दे देगा। इससे अमेरिका चुपचाप किनारे हो जाएगा और कश्मीर में हस्तक्षेप नही करेगा।
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यदि अमेरिका पीछे हट जाता है तो पाकिस्तान अकेला पड़ जाएगा। तब भी यदि पाकिस्तान कश्मीर में हस्तक्षेप करता है तो भारत पाकिस्तान पर हमला करके पाक अधिकृत कश्मीर को भी भारत अपने हिस्से में मिलाने की धमकी दे सकता है। यदि हम अमेरिका और चीन को धमकाकर उनके द्वारा दी जा रही हथियारों की मदद रुकवा देते है तो पाकिस्तान सरेंडर हो जाएगा और पाकिस्तान के लिए कश्मीर को भुला देने के अलावा अन्य कोई विकल्प शेष नहीं रहेगा।
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यह सब करने के भारत की सेना को मजबूत करना आवश्यक है। आज हम आयातित हथियारों पर सेना चला रहे है, अत: विदेशी हथियारों से कश्मीर के लिए जंग लड़ना खामख्याली है। यदि आप कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाना चाहते है तो अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि उपरोक्त कानूनो को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
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सिर्फ तब ही कश्मीरी पंडितो को घाटी में फिर से बसाया जा सकेगा।
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