Pawan Jury BhilwaraRj

राजीव भाई दीक्षित के छद्म और असली समर्थको में भेद।
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महात्मा राजीव दीक्षित के अवसान के बाद राजीव भाई के लाखों स्वदेशी समर्थक उनके सपने को पूरा करने में योगदान दे सकते थे। लेकिन उनके ज्यादातर समर्थक आज बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के एजेंडे पर कार्य करके दिवंगत राजीव भाई की आत्मा को ठेस पहुंचा रहे है।
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भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का वर्चस्व लगातार बढ़ता जा रहा है, और यही हाल रहा तो जैसा कि राजीव भाई ने कहा था भारत फिर से गुलाम हो जाएगा। राजीव भाई ने लगभग दो दशकों तक भारत में विदेशी कंपनियों के निवेश को रोकने के लिए जनजागरण किया, लेकिन आज उनके छद्म समर्थक उनका नाम लेकर विदेशी कंपनियों को भारत में बढ़ावा दे रहे है।
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राजीव भाई का एजेंडा ----- यह था कि भारत के रेल, बीमा, ऊर्जा, रक्षा, शिक्षा, मिडिया, कृषि, उपभोक्ता सामग्री, संचार आदि समेत अन्य महत्त्वपूर्ण क्षेत्रो में विदेशी कम्पनियों को निवेश की अनुमति नही दी जाए, क्योंकि वे जानते थे कि इन कंपनियों को भारत में व्यापार की खुली छूट देने से ये कम्पनियाँ देश के स्वदेशी उद्योगो को नष्ट करके एकाधिकार स्थापित करेगी जिससे बेरोजगारी बढ़ेगी, भारत के धर्म और संस्कृति को दूषित करेगी जिससे बड़े पैमाने पर धर्मांतरण होंगे और इनके द्वारा कमाए हुए मुनाफे के बदले में जब भारत सरकार को डॉलर चुकाने होंगे तो भारत के सभी प्राकृतिक संसाधन और राष्ट्रीय संपत्तियां नीलाम हो जायेगी। उन्होंने काले धन की जननी मॉरीशस रुट को बंद करने के लिए भी लम्बी लड़ाई लड़ी और वे देश की स्वदेशी इकाइयों को बचाने और भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए राईट टू रिकॉल कानूनो को लागू करवाने के लिए प्रतिबद्ध थे।
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बहुराष्ट्रीय कंपनियों का एजेंडा ----- यह है कि सरकार उन्हें भारत के सभी क्षेत्रो में निवेश करने (जिसे राजीव भाई लूट की संज्ञा देते थे) की अनुमति देती रहे, ताकि वे चप्पा चप्पा देश के सभी क्षेत्रो का अधिग्रहण कर सके। अत: वे सिर्फ यह चाहते है कि मौजूदा सरकार उन्हें जारी कानूनो के अनुसार 'कर मुक्त' प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई की अनुमति जारी रखे और विभिन क्षेत्रो में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाती रहे। क्योंकि जब तक क़ानून उन्हें सरंक्षण दे रहा है उनके हितो पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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भारत में लगभग 84 करोड़ मतदाता है, लेकिन विदेशी कम्पनियों को भारत में 'कर मुक्त' निवेश करने के लिए सिर्फ 545 लोगो को राजी करना होता है। यदि विदेशी कम्पनियाँ इन 545 लोगो को गाँठ लेती है तो शेष भारतीयों के पास न तो ऐसी कोई प्रक्रिया है न ही ऐसी कोई शक्ति जिसकी सहायता से वे इन कम्पनियों के निवेश को रोक सके। क्योंकि किसी भी विदेशी कम्पनी को देश में किन शर्तो पर निवेश करने की अनुमति मिलेगी यह तय करने का अधिकार हमारे सांसदों के पास है। यदि भारत के कार्यकर्ता अपने सांसदों और सरकार से यह मांग करंगे कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियो को कर मुक्त निवेश करने की छूट समाप्त की जाए और भारत में उनके द्वारा रुपये में कमाए गए मुनाफे के बदले डॉलर भुगतान करने के वादे को रद्द किया जाए तो जन दबाव के कारण सरकार ऐसे फैसले लेने पर मजबूर होगी। लेकिन क्या स्वदेशी समर्थक सरकार से ऐसी मांग कर रहे है ?
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*हमने एक तीन लाइन की प्रक्रिया प्रस्तावित की है, जिसके गैजेट में प्रकाशित होने पर करोडो नागरिक किसी भी क़ानून पर एसएमएस द्वारा यह राय रख सकेंगे कि अमुक क़ानून को लागू किया जाना चाहिए या नहीं। प्रस्तावित प्रक्रिया यहां देखें -----www.facebook.com/pawan.jury/posts/809753852476186

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तो राजीव भाई चाहते थे कि विदेशी निवेश यानी एफडीआई के मौजूदा कानूनो में बदलाव हो और ऐसे क़ानून लागू किये जाएँ जिनसे संवेदनशील क्षेत्रो में विदेशी कम्पनियो का भारत में निवेश करना प्रतिबंधित हो जाए। वे यह भी चाहते थे कि विदेशी कम्पनियो को लूट का अवसर देने वाले और काले धन की जननी मॉरिशष रुट को बंद किया जाए। और भारत की स्वदेशी इकाइयों को बचाने और स्वदेशी तकनीक के विकास के लिय वे भारत में विभिन्न मुख्य पदो पर राईट टू रिकॉल कानून प्रक्रियाएं लाना चाहते थे।
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मैं राजीव भाई का समर्थक हूँ अत: मैं अपने स्तर पर सरकार से यह मांग करता रहा हूँ कि भारत में विदेशी कंपनियों को दी जा रही कर मुक्त निवेश की अनुमति रद्द की जाए, उनके द्वारा कमाएं गए मुनाफे के बदले डॉलर का भुगतान करने के समझौते को निरस्त किया जाए, मॉरिशष रुट को बंद किया जाए और प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री समेत देश में विभिन्न महत्त्वपूर्ण पदो पर राइट टू रिकॉल प्रक्रियाएं लागू की जाए, ताकि हम आम नागरिक ऐसे नीति नियंताओं को नौकरी से निकाल सके जो विदेशी कंपनियों से घूस खाकर उनके पक्ष में क़ानून बनाते है।
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इसके लिए जिन कानूनो की आवश्यकता है, मैं उन कानूनो को लागू करने के लिए आवश्यक आदेश अपने सांसद को भेजता हूँ तथा अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल पर भी कानूनो की सूची रखता हूँ ताकि ज्यादा से ज्यादा राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओ तक इन प्रक्रियाओ की जानकारी पहुंचे। भारत को विदेशी कम्पनियों के चंगुल से बचाने और स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए मेरे द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया इस लिंक पर देखी जा सकती है :

सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) के लिए कानूनी ड्राफ्ट ----
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809743912477180
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मैंने अपने प्रोफाइल पर राजीव भाई का चित्र चस्पां नही किया है जैसा कि उनके कई छद्म समर्थको ने किया हुआ है। लेकिन अपने तईं मेरा मानना है कि मैं राजीव भाई के एजेंडे पर ही कार्य कर रहा हूँ न कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एजेंडे पर।
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राजीव भाई के नकली समर्थक
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फेसबुक पर मेरा सामना राजीव भाई के ऐसे कई समर्थको से हुआ जिन्होंने अपने प्रोफ़ाइल पर राजीव भाई का प्रेरक चित्र लगा रखा है तथा कई ने राजीव भाई के नाम पर अपना प्रोफ़ाइल नाम रखा हुआ है। इससे प्रथम दृष्टया यह आभास होता है कि अमुक व्यक्ति राजीव भाई के सिद्धांतो में मानता है तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विरोधी और स्वदेशी का समर्थक है। उनकी वाल सर्च करने पर मालूम होता है कि उनकी वाल पर स्वदेशी बढ़ाने की प्रेरणा देने वाले पोस्ट टनो की संख्या में उपलब्ध है। जब उनसे यह पूछा जाता है कि क्या आप भारत में विदेशी निवेश का समर्थन करते है तो ज्यादातर का जवाब होता है कि --- नहीं, हम स्वदेशी समर्थक है।
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लेकिन जब उनसे पूछा जाता है कि क्या वे सरकार से ऐसे किसी क़ानून की मांग कर रहे है, जिससे भारत के विभिन्न क्षेत्रो में दी जा रही विदेशी निवेश की अनुमति को निरस्त किया जा सके ?
तो उनका जवाब होता है --- नहीं, नहीं नहीं। हम ऐसी कोई मांग नही कर रहे जिससे भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते प्रभाव को कम किया जा सके।
जब उनसे पूछा जाता है कि क्या वे ऐसे किसी क़ानून की मांग कर रहे है, जिससे मॉरीशस रुट को बंद किया जा सके ?
तो उनका जवाब होता है --- नहीं, नहीं नहीं। हम बिलकुल भी ऐसी कोई मांग नही कर रहे।
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यही बहुराष्ट्रीय कंपनियों का एजेंडा है --- कि स्वदेशी कार्यकर्ता स्वदेशी उपयोग की प्रेरणा करने वाली लम्बी लम्बी पोस्ट लिखे-पढ़ें, घंटो के घंटो राजीव भाई के व्याख्यान सुने, उनके फोटो और नाम अपनी प्रोफ़ाइल पर चिपकाएं, स्वदेशी बढ़ाओ स्वदेशी बढ़ाओ के नारे लगाएं लेकिन सरकार पर उन कानूनो को लागू करने के लिए दबाव न बनाएं जिनसे बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा जारी लूट पर लगाम लगाई जा सके। विदेशी कम्पनियाँ जानती है कि जब तक क़ानून उनके साथ है तब तक ऐसे करोडो करोड़ नारे, स्तम्भ और वक्तव्य उन्हें लेश मात्र भी हानि नहीं पहुंचा सकेंगे। और जहां तक स्वदेशी बढ़ाने की बात है --- जब तक सरोवर में शार्के मौजूद है छोटी मछलियाँ बड़ी होने से पहले ही बड़ी मछलियों का आहार बन जायेगीं। जैसा कि हम देख ही रहे है।
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इसलिए राजीव भाई के फर्जी समर्थक छोटी मछलियों को बचाने के लिए सरोवर से शार्क को निकाल बाहर करने की मांग नहीं करते, बल्कि वे रस्मी तौर पर यह शोर मचाते रहते है कि छोटी मछलियों को बचाओ छोटी मछलियों को बचाओ, शार्क इन्हे खाए जा रही है। और यही लोग उन लोगो का भी समर्थन करते है जो सरोवर में और भी शार्क ला लाकर छोड़े जा रहे है !!! कम से कम राजीव भाई ऐसा तो नहीं चाहते थे कि उनके नाम और चित्र का इस्तेमाल करके उनके अनुयायी देश को इतनी गंभीर क्षति पहुंचाए।
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राजीव भाई के असली समर्थको से मैं आग्रह करूँगा कि वे राजीव भाई के ऐसे छद्म समर्थको से पूछे कि वे क्यों उन कानूनो का विरोध कर रहे है जिनसे भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रभुत्व कम हो और स्वदेशी इकाइयों को बढ़ावा मिले। और यदि उन्हें ऐसी प्रक्रियाओं की जानकारी नही है तो उन्हें उन प्रस्तावित कानूनो की जानकारी उपलब्ध करवाएं।
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