Pawan Jury BhilwaraRj
अरुण जेटली का कहना है कि जिन्होंने आपातकाल लगाकर संविधान का गला घोंट दिया वे हमें संविधान का पाठ पढ़ा रहे है।
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लेकिन आपातकाल तो पूरी तरह संवैधानिक था। फिर लोकतंत्र का गला कैसे घुट गया ?
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इंदिरा जी के पास बहुमत था और उन्होंने आपातकाल के प्रस्ताव को दोनों सदनों से पास किया था। संविधान में सदन के बहुमत से आपातकाल लगाने का प्रावधान है और इंदिरा जी ने उन्ही प्रावधानों का उपयोग करके आपातकाल लगाया था। ये तकनिकी पहलू है।
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लोकतांत्रिक और व्यवहारिक पहलू यह है कि जिन करोड़ो नागरिको ने आपातकाल झेला उन्होंने 1979 के आम चुनावो में इंदिरा जी को फिर से प्रचंड बहुमत देकर उन्हें आपातकाल के लिए माफ़ कर दिया था। अत: वो बात उसी समय ख़त्म हो गयी।
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मैं आपातकाल का समर्थन नहीं करता, लेकिन उस घटना का हिसाब किताब 1979 में ही साफ़ हो चुका है, वरना इंदिरा जी सत्ता में वापसी नहीं कर पाती थी। क्या आप मनमोहन को माफ़ करके फिर से प्रधानमंत्री बनाएंगे ?
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असल में देश के उस समय जो हालात थे उस परिस्थिति में इंदिरा जी के सामने देश को बचाये रखने के लिए दो ही रास्ते बचे थे : १) वे राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम कानूनो को लागू करती या २) आपातकाल लगाती। दुर्भाग्य से उन्होंने त्वरित और विनाशक तरीका चुना।
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और जहां तक लोकतंत्र का गला घोटने की बात है मोदी साहेब किस आधार पर भूमि अधिग्रहण को लगातार अध्यादेश पर अध्यादेश निकाल कर लागू किये बैठे है।
ये अादमी जो चोर दरवाजे से सरकार में घुस के बैठा है और लगभग पूरी सरकार चला रहा है अब उन लोगो को लोकतंत्र का मतलब समझा रहा है जिन्होंने इसे वोट न देकर घर बिठा दिया था।
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