Pawan Jury BhilwaraRj

मैंने आडवाणी जी को समझाया था कि बीजेपी के कूदने से राम मंदिर आंदोलन को धक्का पहुंचेगा। लेकिन वे नहीं माने। राजनैतिक मुद्दा बन जाने से हिन्दू राजनैतिक पार्टियों के अनुसार विभाजित हो गए और आंदोलन उखड गया --- अशोक सिंघल
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यदि किसी राष्ट्रीय मुद्दे को जिस पर देश का बहुसंख्य समुदाय सहमत हो, यदि किसी झुंड के हवाले कर दिया जाएगा तो सभी को उस मुद्दे की खातिर उस झुण्ड में शामिल होना पड़ता है, जो कि व्यवहारिक नहीं है। आस्था मुद्दो में रखनी चाहिए झुण्ड में नहीं। भ्रष्टाचार दूर करना है तो भ्रष्टाचार कम करने के लिए क़ानून की मांग करने की जगह इसे दूर करने का ठेका महात्मा अरविन्द केजरीवाल को दे देना कहाँ तक उचित है ? और यही बात आरएसएस-बीजेपी पर मंदिर के सन्दर्भ में लागू होती है।
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दुष्प्रभाव यह है कि 80 करोड़ नागरिको की सहमति के बावजूद राम मंदिर 300 सांसदों और अमुक झुण्ड के दर्जन भर नेताओ के भरोसे पड़ा हुआ है।
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यदि आप अयोध्या में राम, मथुरा में कृष्ण और काशी में विश्वनाथ मंदिर बनवाना चाहते है तो इस लिंक में दिए गए क़ानून का समर्थन करें। इस क़ानून को गैजेट में प्रकाशित करने से तीनो स्थानो पर भव्य मंदिरो का निर्माण कानूनी रूप से हो जाएगा ---

राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट' के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/834842886633949
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विशेष - इस क़ानून को लागू करने के लिए 370 सीटें या संविधान संशोधन आदि की आवश्यकता नहीं है। केबिनेट से पास करवाकर प्रधानमन्त्री इसे गैजेट में प्रकाशित कर सकते है। गैजेट में जो भी छपता है वो देश में लागू हो जाता है।
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