Pawan Jury BhilwaraRj
Vipul Prakash Rrg:
सरकार ने सूप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दर्ज करके कहा है कि इंडिया का नाम भारत रखने की कोई ज़रूरत नहीं।
http://m.newshunt.com/india/hindi-newspapers/amar-ujala/national/indiya-ka-nam-bharat-rakhane-ki-jarurat-nahi-sarakar_46301776/c-in-l-hindi-n-amar-ncat-National
कुल मिलाकर देखा जाए तो जिन जिन मुद्दों को लेकर बीजेपी २ सीटों से पूर्ण बहुमत तक पहुची थी उन सबको एक के बाद एक कूडेदान में डाल चुकी है। संध परिवार के १ करोड कार्यकरता अगर चाहें तो देश मे भूचाल ला सकते हैं.सारी व्यवस्था को बदल सकते हैं। मगर वो तभी कुछ करते हैं जब उनका ऊपर का नेतृत्व उन्हे अनुमति/आदेश देता है। और ऊपर का नेतृत्व उन्हे बस निम्नलिखित बातों की अनुमति/आदेश देता है
१। जब बीजेपी सत्ता मे न हो तो बीजेपी का जम के प्रचार करो और इन सब मुद्द्ओ पर सत्ता पक्ष की जम कर आलोचना करो.
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२। जब बीजेपी सत्ता में आकर पुन: उन्ही नीतियों पर चले जिसपर कांग्रेस चल रही थी तो बिल्कुल चुप्पी साधे रहो अन्यथा ' एकता' खतरे मे पड जाएगी। ( जिस तरह से मुल्ले मौलवी हमेशा अपने अनुयाइयो को बोलते रह्ते हैं कि इस्लाम खतरे में है उसी तरह इन संगठनो के नेता कार्यकर्ताओ को यह बोलकर डराते हैं कि एकता खतरे मे है)
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३। और यदी कोई व्यक्ति इन बातों को लेकर बीजेपी पे सवाल उठाए तो एकमात्र रटा रटाया उत्तर दो " ६० साल से 'तुम्हारी (???) ' कांग्रेस ने देश को लूटा तब कहां थे " या फ़िर बोल दो कि आप पाकिस्तान के एजेंट हैं।
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यही एक करोड कार्यकरता अगर व्यवस्था सुधार और कानून के ड्राफ़्ट ( Plz See the proposed drafts at>>>>www.righttorecall.info/001.h.pdf )को ध्येय बना के चलते तो पाखंडी समाजवादी नेता लोग पिछडी जातियों के मसीहा बन बन के उन्हे हिंदुओ की जगह मुसलमानो के साथ एक कर करके 'माय' जैसा समीकरण बनाने मे कामयाब नहीं होते. और एकता और सशक्तिकरण के साथ साथ सामाजिक न्याय भी होता।