Pawan Jury BhilwaraRj
वरीय मतदान प्रणाली या इंस्टेंट रनऑफ वोटिंग सिस्टम किस तरह जातीय आधार पर मतदान में कमी लाता है ?
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भारत में लागू वर्तमान मतदान प्रणाली में कोई भी मतदाता किसी एक उम्मीदवार को ही वोट दे पाता है। लेकिन वरीय मतदान प्रणाली ( prefential voting system = instent runoff voting = IRV ) में मतदाता को अपनी पसंद के अनुसार एक से अधिक उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में वोट करने की आजादी होती है।
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उदाहरण के लिए यदि चार उम्मीदवार 'अ', 'ब', 'स' और 'द' मैदान में है, तो आप हर उम्मीदवार के सामने अपनी पसंद दर्शाने वाला अंक दर्ज कर सकते है। यदि आप 'अ' को चुनना चाहते है तो आप 'अ' उम्मीदवार के सामने 1 अंक दर्ज कर सकते है। किन्तु यदि आपको लगता है कि यदि 'अ' चुनाव हार जाता है तो 'ब' को विधायक बनना चाहिए, तो आप ब के सामने 2 अंक दर्ज कर सकते है। इसी तरह आप क्रमश: स और द को 3 और 4 अंक दे सकते है। यदि आपके वोट के बावजूद 'अ' चुनाव हार जाता है, और किसी भी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिलता तो क्योंकि आपने 'ब' को अपनी दूसरी पसंद बताया था अत: आपका वोट ब को चला जाएगा।
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तो किस तरह इंस्टेंट रनऑफ वोटिंग सिस्टम जातीय आधार पर मतदान में कमी लाता है ?
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मान लीजिए किसी चुनाव में चार उम्मीदवार मैदान में है, जिनमे से एक ठाकुर, एक देसाई एक गुर्जर और एक तटस्थ जाति से है। तथा 6 मतदाता है जिनमे दो ठाकुर, एक देसाई, एक मिश्रा जाति से और दो जातिय तौर पर तटस्थ है। मान लीजिये दोनों ठाकुर मतदाता ठाकुर उम्मीदवार को, देसाई मतदाता देसाई उम्मीदवार को तथा गुर्जर मतदाता गुर्जर उम्मीदवार को अपनी पहली पसंद के रूप में वोट देते है, तथा अन्य उम्मीदवारों को अपनी दूसरी, तीसरी तथा चौथी पसंद के रूप में वोट करते है। जबकि तटस्थ मतदाताओ के पास जातिय आधार न होने के कारण वे स्वतंत्र रूप से वोट करते है। तब IRV प्रणाली के अनुसार कौन उम्मीदवार विजयी होगा ? इस तालिका को देखें :
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मतदाता --------- ठाकुर ; ठाकुर ; देसाई ; गुर्जर ; तटस्थ ; तटस्थ
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1. चेतन ठाकुर - 1, 1, 3, 3, 4, 3 = 2 वोट
2. केतन देसाई - 3, 4, 1, 4, 3, 4 = 1 वोट
3. हनुमान गुर्जर - 2, 3, 2, 1, 2, 1 = 2 वोट
4. बजरंग नाथ - 4, 2, 4, 2, 1, 2 = 1 वोट
[किसी को बहुमत नहीं ]
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प्राथमिक चरण की गणना में उम्मीदवारों के खाते में मतदाताओं के सिर्फ उन मतों को गिना जाता है, जो मत उम्मीदवार को पहली पसंद के रूप में मिले है। इस प्रकार ठाकुर उम्मीदवार को 2, देसाई उम्मीदवार को 1, गुर्जर उम्मीदवार को 2 और तटस्थ उम्मीदवार को 1 वोट मिला। इस तरह पहले चरण की गणना में किसी भी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिला।
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अब दूसरे चरण में ऐसे मतदाताओ के वोट को उस उम्मीदवार के खाते में डाल दिया जाएगा जिसे अमुक मतदाता ने अपनी दूसरी (प्राथमिकता नंबर - 2) पसंद बताया है, और उसकी पहली पसंद का उम्मीदवार पहले चरण की गणना में पिछड़ चुका है। चूंकि बजरंग नाथ और केतन देसाई प्राथमिक चरण की गणना में पिछड़ चुके है अत: जिन मतदाताओ ने इन्हे पहली पसंद बताया था उन मतदाताओ के वोट हनुमान गुर्जर के खाते में डाल दिए जाएंगे। (ऊपर दी गयी तालिका देखें)
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इस प्रकार देसाई मतदाता और एक तटस्थ मतदाता के वोट हनुमान गुर्जर के खाते में जाएंगे, क्योंकि इन दोनों मतदाताओ ने हनुमान गु र्जर को अपनी दूसरी पसंद के रूप में चुना था।
दूसरे चरण की गणना -- हनुमान गुर्जर = 2 वोट + 1 वोट (देसाई मतदाता) + 1 वोट (तटस्थ मतदाता) = 4 वोट , बहुमत से विजयी।
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देखा जा सकता है कि जबकि सभी उम्मीदवारों ने अपनी जाति के उम्मीदवार को ही पहली पसंद के रूप में चुना था, किन्तु IRV प्रणाली के अनुसार हनुमान गुर्जर विजयी हुए। जबकि हनुमान गुर्जर की जाति अल्पमत में थी और ठाकुर जाति के मतदाता अधिक मत में।
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ऐसा क्यों हुआ ?
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क्योंकि मतदाताओ के पास वरीयता क्रम के अनुसार एक से अधिक उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार वरीयता क्रम देने की सुविधा थी। अत: उन्होंने पहली पसंद के रूप में अपनी जातिय भावना से प्रेरित होकर अपनी जाति के उम्मीदवार को ही चुना, किन्तु जब अपनी दूसरी पसंद को चुनने की बारी आई तो निश्चय ही उनके पास जातिय आधार पर उमीदवार चुनने का अवसर नहीं था, अत: उन्होंने दूसरी पसंद के उम्मीदवार को चुनते समय योग्यता के मापदंड पर वोट किया।
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इस प्रकार, यह प्रणाली जाति वाद से ग्रसित मतदाताओं को भी योग्यता के आधार पर भी वोट करने का अवसर उपलब्ध कराती है।
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अमूमन किसी भी संसदीय या विधानसभा क्षेत्र में किसी जाति विशेष के मतदाताओ की संख्या 15-18% से अधिक नहीं होती। और यदि एक ही जाति के अधिक उम्मीदवार मैदान में होंगे तब भी जाति विशेष के मतदाताओं के वोट कट जाएंगे और मतदाताओ के वोट दूसरे या तीसरे चरण की गणना में योग्य उम्मीदवारों के खाते में चले जाएंगे।
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