Pawan Jury BhilwaraRj
यदि भारत के नागरिको के यह मालूम हो जाता है कि छोटा राजन कौन कौन नेताओ और राजनैतिक पार्टियो को चंदे देता था, मुम्बई फिल्म उद्योग की किन किन फिल्मो में उसने पैसा लगाया, कौन अभिनेताओं और निर्देशकों से उसकी घनिष्ठता थी, कौन कौन से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उससे कीमती उपहार स्वीकार किये, महाराष्ट्र और देश भर में कितने भूखंडों में उसने निवेश कर के रखा है, किन पेड पत्रकारों और पेड संपादको से उसकी घनिष्ठता है … तो इसमें मोदी साहेब को तकलीफ क्या है ?
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और अगर इससे मोदी साहेब को कोई तकलीफ नहीं है तो फिर मोदी साहेब ने छोटा राजन का 'सार्वजनिक नार्को टेस्ट'* लेने से इंकार क्यों कर दिया है ?
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और क्यों इस मुद्दे पर सोनिया और केजरीवाल भी मोदी साहेब के फैसले का समर्थन कर रहे है ???
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और सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्तो में से कौनसा अंधभक्त यह बताएगा कि, क्यों वे भी सभी छोटा राजन के 'सार्वजनिक नार्को टेस्ट' का विरोध कर रहे है ?
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यही गति मोहन भागवत और उनके अंधसेवको की भी है। वे भी छोटा राजन के साथ है !!!
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'सार्वजनिक नार्को टेस्ट'* --- नार्को टेस्ट की प्रक्रिया में आरोपी को सोडियम पेंटानॉल नामक रसायन का इंजेक्शन दिया जाता है। इस अर्धनिश्चेतक के प्रभाव से व्यक्ति झूठे जवाबो देने के लिए आवश्यक काल्पनिक योजना के जाल बुनने की दिमागी क्षमता खो देता है और नीम बेहोशी की हालत में पूछे गए सवालो के सच्चे और सही जवाब देने लगता है। जब नार्को टेस्ट की ऐसी प्रक्रिया को निर्बाध रूप से रिकॉर्ड किया जाता है और इसे नागरिको के लिए उपलब्ध करवाया जाता है तो इसे सार्वजनिक नार्को टेस्ट कहा जाता है।
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ऐसा नार्को टेस्ट यदि जांच एजेंसियों द्वारा बंद कमरे में किया जाता है तो इस टेस्ट के कोई मायने नहीं होंगे। इसलिए यह आवश्यक है कि छोटा राजन का नार्को टेस्ट सार्वजनिक रूप से किया जाए। हालांकि नार्को टेस्ट में आरोपी द्वारा दिए गए बयानों को अदालती कार्यवाही में बतौर सबूत स्वीकार नहीं किया जाता, किन्तु उसके खुलासो के आधार पर जांच एजेंसिया कार्यवाही करके भौतिक सबूत जुटा सकती है, जिन्हे अदालत में पेश किया जा सकता है। लेकिन सोनिया-मोदी-केजरीवाल और उनके अंधभक्त ऐसा बिलकुल भी नहीं चाहते कि छोटा राजन खुद के और दाऊद इब्राहिम के बारे में सारे सबूत खुद ही उगल दे। वे इस बात पर जोर दे रहे है कि छोटा राजन खुद के और दाऊद के बारे में सिर्फ वही राज़ साझा करे जो कि वह साझा करना चाहता है !!!
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इस बात को बच्चा भी मानेगा कि पूछताछ में छोटा राजन द्वारा किये गए खुलासो में से जांच एजेंसियां उन तथ्यों को दर्ज नहीं करेगी जो उनके मौजूदा आकाओ यानी कि बीजेपी और इनके नेताओ के खिलाफ जाती हो।
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इसलिए राईट टू रिकॉल ग्रुप छोटा राजन का सार्वजनिक नार्को टेस्ट नागरिको की ज्यूरी द्वारा किये जाने का प्रस्ताव कर रहा है। इस प्रक्रिया में मुंबई/महाराष्ट्र की मतदाता सूचि में से रेंडमली नागरिको का चयन किया जाना चाहिए, तथा इस ज्यूरी द्वारा ही इस मुकदमे की सुनवाई और नार्को टेस्ट की प्रक्रिया का फैसला किया जाना चाहिए। लेकिन सोनिया-मोदी-केजरीवाल-भागवत और उनके अंधभक्त छोटा राजन का ज्यूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिए जाने का विरोध कर रहे है।
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तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल-भागवत और उनके अंधभगत छोटा राजन के नार्को टेस्ट का विरोध कर रहे है, वे छोटा राजन के सार्वजनिक नार्को टेस्ट का भी विरोध कर रहे है, और ज्यूरी द्वारा नार्को टेस्ट लिए जाने का तो खैर विरोध कर ही रहे है !!!
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पब्लिक में नार्को टेस्ट के लिए नारको टेस्ट का कानूनी ड्राफ्ट --- https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/835414443243460
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