Pawan Jury BhilwaraRj
कारगिल युद्ध के दौरान 29 से 30 जून के बीच विश्व बैंक तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अधिकारियों से मुलाक़ात कर मोदी साहेब ने 1 जुलाई 1999 को वाशिंगटन से उड़ान भरी और 2 जुलाई को क्लिंटन ने शरीफ को वाशिंगटन तलब कर लिया था। 4 जुलाई 1999 को युद्ध विराम घोषित किया गया।
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2002 में सीधे मुख्यमंत्री बनने को इत्तिफ़ाक़ भी मान लिया जाए तब भी ऐसा तो नही हुआ था कि मोदी साहेब ने क्लिंटन से कहा ---- 'यदि तुमने हमें सैन्य साजो सामान वगेरह तुरंत नही दिए तो भारत अमेरिका पर हमला कर देगा, अमेरिका के पॉवर प्लांट्स के लिए यूरेनियम की सप्लाई रोक देगा, दवाइयों, चिकित्सा उपकरण और कच्चे तेल की आपूर्ति बंद कर देगा, अमेरिका के संचार नेटवर्क को बंद करेगा, और अमेरिका पर तमाम तरीके के व्यापारिक प्रतिबन्ध लगा देगा' !!!
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असल में जो हुआ, वो कुछ यूँ था :
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जून, 1999. प्रधानमन्त्री निवास
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मोदी - मुझे ही क्यों भेज रहे है ?
अटल - सरकार के किसी अंग या मंत्री वगेरह को भेजने से बात फ़ैल जायेगी। तुम्हारे पास कोई बड़ा पद नहीं है इसलिए ऐसे समय में प्रतिनिधित्व के लिए तुम्हारे जैसे व्यक्ति का जाना ही उचित है। चुप से जाकर बातचीत तय कर आओ।
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मोदी - समझौते के लिए दिशा निर्देश ?
अटल - वो तो वे लोग ही तय करेंगे। जो भी कहें देख लेना। फौजे सिर पे खड़ी है। जिन पैरो के निचे गर्दन फंसी हो, उन्हें सहलाने में ही कुशल है।
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मोदी - कब निकलना है ?
अटल - तुरंत। वक्त नहीं है। गोले भी ख़त्म है। 4 दिनों से हम टीवी चेनल्स पर वही फूटेज घुमा घुमा कर दिखा रहे है, और जनता सोच रही है कि हमारी बोफोर्स की तोपे गोले दाग रही है। मामला लीक हो गया तो बवाल हो जाएगा।
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मोदी - त्रिशूल, नाग, आकाश सब क्या हुए ?
अटल - यहाँ बेकाम है। गोल पोस्ट पर निशााना लगाएंगे तो पूरे फूटबाल मैदान में कहीं पर भी धमाका हो सकता है। पॉइंटेड एक्यूरेसी नहीं हैं।
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जून, 1999. वाशिंगटन
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मोदी - कुछ लेज़र गाइडेड बम वगेरह चाहिए थे।
क्लिंटन के प्रतिनिधि - लेज़र गाइडेड बम से क्या होगा ? तुम्हारे पास परमाणु बम है उसे चलाइये। अभी तो परीक्षण किया है। साल नहीं गुजरा।
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मोदी - गलती हो गयी।
क्लिंटन के प्रतिनिधि - गलती कीमत मांगती है।
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मोदी - चुप्पी
क्लिंटन के प्रतिनिधि - कौनसी दुनिया में रहते हो ? तुम्हे पोलियो की खुराकें इसलिए पिला रहे है कि तुम हमारी आँखों में धूल झोंक कर परीक्षण करो ?
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मोदी - जैसे भी हो, अब मामला बिठाइये।
क्लिंटन के प्रतिनिधि - सीटीबीटी पर फैसला लीजिये।
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मोदी - इस ट्रीटी का जनता में ख़ासा प्रचार हो चुका है। आंदोलन हो सकता है। इससे आगे के लिए भी इसे साइन करना मुश्किल हो जाएगा। थोड़ा रूक के करने से ठीक होगा। धीरे से।
क्लिंटन के प्रतिनिधि - हम इसे एनपीटी के नाम से बना देते है।
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मोदी - तब भी थोड़ा रूकना उचित है। वैसे अटल जी ने 'भारत को आइन्दा परिक्षण की आवश्यकता नही है' का प्रस्ताव ले लिया है। गोविंदाचार्य आदि को भी निर्वासित कर देंगे।
क्लिंटन के प्रतिनिधि - आदमी समझदार मालूम होते हो। किस पद पर हो ?
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मोदी - अब तक मौका नही मिला साहेब। गुजरात में कार्यरत था। पर वाघेला से अनबन के कारण फिलहाल गुजरात से निर्वासित हूँ। वापसी की कोशिश में हूँ। मौका मिला तो निराश नही करूँगा।
क्लिंटन के प्रतिनिधि - देखते है।
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क्लिंटन के प्रतिनिधि - अपने प्रधानमन्त्री जी से कहिये कि सभी क्षेत्र एफडीआई के लिए खोल दे।
मोदी - सभी को एक साथ तो नही खोल सकेंगे, बवाल हो जाएगा। चारो तरफ स्वदेशी के ऐलान देकर ही हम सत्ता में पहुंचे है। अभी बीमा, मिडिया, बैंकिग आदि में खोल देते है, और बाकी में सीमा बढ़ायेंगे।
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क्लिंटन के प्रतिनिधि - ये क्या बात हुयी। भारत में जनता के पास प्रधानमन्त्री को रिकॉल करने का कोई क़ानून नहीं है। 2004 तक तो तुम्हारी सरकार जनता से सुरक्षित ही है। सभी सांसदों को पैसा फेंकियें। हम देंगे। जनता क्या करेगी ? चिल्ला चिल्ली करेगी, विरोध करेगी और 2-4 दिन में थक कर बैठ जायेगी।
मोदी - फिर भी विरोध तो होगा ही। इससे व्यर्थ माहौल बिगड़ेगा। हम थोड़ा रूक कर इसे विकास के मुद्दे से जोड़ कर पेश करेंगे तो विरोध नहीं बल्कि उल्टे स्वागत होगा आपका। 'निवेश के लिए बेहतर माहौल' जैसा कुछ। वाजपेयी मृदु है, दबंगई से उनका मेल नहीं। गुजरात के लिए मुझे आजमाइये। समझ लो झंडे गाड़ दूंगा।
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क्लिंटन के प्रतिनिधि - ठीक है, ठीक है, देखते है। जैसे भी हो आप एफडीआई बढाइये। पहले मिडिया में एफडीआई दीजिये। ताकि जनता को हम संभाल सके।
मोदी - हो जाएगा।
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क्लिंटन के प्रतिनिधि - ठीक है, आप निकलिए। हम देखते है।
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1 जुलाई को मोदी ने अमेरिका से भारत के लिए और 2 जुलाई को शरीफ ने अमेरिका के लिए उड़ान भरी।
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शरीफ - हुजूर
क्लिंटन - कारगिल से फौजे उतार लो, युद्ध ख़त्म है।
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शरीफ - बन्दापरवर, थोड़ा पहले बुला भेजा होता मुझे तो अच्छा होता। इधर से हमें चढ़वाकर उन्हें लेसर गाइडेड बम पकड़ा दिए।
क्लिंटन - ठीक है अब। जो भी हुआ। अब बंद करो।
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शरीफ - हुजूर।
क्लिंटन - निकलो अब।
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शरीफ - एक अर्ज़ है।
क्लिंटन - बोलो
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शरीफ - इज़्ज़त पूरा ख़त्म हो जाएगा हमारा। कुछ रियायत करिये हम पर। ताकि हिन्दोस्तान को भी सबक मिले।
क्लिंटन - क्या चाहते हो ?
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शरीफ - वो जो सबसे ऊँची चोटी है, .5353। वहाँ से लेह-लद्दाख राजमार्ग पर सीधा निशाना लगाया जा सकता है। वो हमें दिला दीजिये।
क्लिंटन - ठीक है। दिया।
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शरीफ - एक और गुज़ारिश है
क्लिंटन - कहो
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शरीफ - चोटी के निचे भारतीय सैनिक डेरा डाले हुए है। निचे उतरने से हमारे लोगो को मार देंगे।
क्लिंटन - ठीक है, मैं सेफ पैसेज दिलवा दे रहा हूँ।
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शरीफ - नवाज़िश, कल उतरवा लूँ हुजूर सैनिक ?
क्लिंटन - कल नही। 4 जुलाई को उतारना। हमारा स्वतंत्रता दिवस है। जश्न होगा।
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जुलाई 4, 1999
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क्लिंटन ने वाजपेयी को रात 2 बजे फोन किया।
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क्लिंटन - अमेरिका उम्मीद करता है कि, दक्षिण एशिया में शान्ति बनाये रखने को भारत गंभीरता से लेगा। हम आप से अपील करते है कि पाकिस्तान से चल रहे संघर्ष को आप विराम दें।
वाजपेयी - भारत एक 'सम्प्रभु राष्ट्र' है, और इस विषय में अपनी जिम्मेदारी समझता है। हम शीघ्र ही इस विषय में निर्णायक कदम उठाएंगे।
क्लिंटन - धन्यवाद।
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जुलाई 10, 1999. प्रधानमन्त्री निवास
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जार्ज - .5353 से उतरे नहीं है अब तक
अटल - वहाँ से नहीं उतरेंगे। इसे हमें हमारे लेवल पर ही डील करना पड़ेगा।
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जार्ज - अब ?
अटल - जनरल से कहो अपने स्तर पर फौजे भेज कर चोटी पर कब्ज़ा करे।
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जार्ज - मुश्किल है। इतना ऊपर कैसे चढ़ेंगे अपने लोग ?
अटल - कोशिश करने को कहो।
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2012, प्रधानमन्त्री निवास
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14 वर्षीय संघर्ष के बावजूद भारत .5353 पर पुन: कब्ज़ा करने में नाकाम रहा। 2012 में प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने 'मिशन-प्वॉइंट 5353' को अधिकृत रूप से रोकने के आदेश जारी किये।
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वाजपेयी ने बीमा और मिडिया समेत कई क्षेत्रो में विदेशी निवेश को अनुमति दी तथा गोविंदाचार्य निर्वासित किये गए।
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2002 में मोदी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और गुजरात में विकास के लिए विदेशी कम्पनियो को आमंत्रित किया।
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2008 में भारत के सांसदों ने मनमोहन के नेतृत्व में एनपीटी (1,2,3 ट्रीटी ) पर हस्ताक्षर किये। इस बिल का अनुमोदन करने के लिए सभी सांसदों को पैसा दिया गया। इस घटना को भारत के लोग 'केश फॉर वोट' स्कैंडल के नाम से जानते है। देश को यह कभी नहीं बताया गया कि यह कैश किसलिए दिया गया था। संसद में नोट लहराने वालो में महावीर प्रसाद भगौरा और सुधींद्र कुलकर्णी शामिल थे।
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ट्रीटी के अनुसार भारत भविष्य में कोई भी परमाणु परिक्षण और इस क्षेत्र में अनुसंधान अमेरिका की अनुमति के बिना नहीं करेगा, यह तय किया गया।
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वाजपेयी ने गोविंदाचार्य आदि के दबाव में जो परमाणु परिक्षण किये थे, उसमें किया गया 'थर्मो न्यूक्लियर डिवाइस टेस्ट' असफल रहा था, यह खुलासा परिक्षण दल के मुख्य वैज्ञानिक ने 2009 में रिटायर होने के बाद किया, जिसकी पुष्टि दल में शामिल अन्य वैज्ञानिक ने भी की। उल्लेखनीय है कि 'फिशन और 'लॉइल्ड डिवाइस' का परिक्षण 1974 में ही सफलता पूर्वक हो चुका था। सरकार ने खुलासे पर चुप्पी बनाये रखी।
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लेख में प्रस्तुत सभी घटनाएं एवं पात्र सच्चे है, तथा इन तथ्यों का कल्पना से कोई लेना देना नहीं है। वस्तुस्थिति को परिभाषित करने की सहूलियत के लिए काल्पनिक संवादों का सहारा लिया गया है। यद्यपि संवाद वास्तविक घटनाक्रम का सटीक निरूपण करते है।
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घटनाओ तथा तथ्यों की पुष्टि के लिए कृपया गूगल करें।
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समाधान : https://web.facebook.com/notes/pawan-kumar-jury/809761655808739