Pawan Jury BhilwaraRj
बिगड़ते धार्मिक असंतुलन और अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए कानूनो की मांग करने की जगह संघ का शीर्ष नेतृत्व कार्यकर्ताओ को बहस के अंधे कुँए में छलांग लगाने को प्रेरित कर रहा है !!!
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आरएसएस ने जनसंख्या वृद्धि में असंतुलन के चलते देश में आजादी के बाद कुल जनसंख्या में मुस्लिमों के अनुपात में साढ़े चार फीसदी की वृद्धि और उत्तरपूर्वी राज्यों में घुसपैठ करने वालों की संख्या में तेजी से हुई वृद्धि पर गहरी चिंता जतायी है और इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस कर इसका समाधान करने का आह्वान किया।
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http://khabar.ndtv.com/news/india/rss-talks-about-demographic-imbalance-wants-review-of-population-policy-1238615
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इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर पूरी तरह रोक लगाए जाने, देश के नागरिकों के लिए राष्ट्रीय पंजिका बनाने और देश के बाहर से घुसपैठ करने वालों को भारत की नागरिकता लेने से रोकने के पुख्ता इंतजाम करने और उनके यहां जमीन जायदाद खरीदने पर पूरी तरह रोक लगाने की पुख्ता व्यवस्था करने का भी अनुरोध किया।
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उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों जारी जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, मुस्लिम समुदाय की आबादी 2001 से 2011 के बीच 10 साल में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि और हिन्दुओं की जनसंख्या में इस अवधि में 0.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी है। लेकिन पिछले 25 साल से संघ को जनसँख्या के बिगड़ते धार्मिक संतुलन को ठीक करने के लिए क़ानून लिखने की फुर्सत नहीं मिली। बांग्लादेशी घुसपैठिये 25 साल से आ रहे है, और संघ पिछले 25 साल से इस पर लगातार चिंता व्यक्त करता रहा है। लेकिन इसके लिए भी क़ानून लिखने का समय संघ के पास नहीं है। नेशनल आई डी सिस्टम का तो संघ ने कभी नाम भी नहीं लिया।
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संघ के हिसाब से किसी भी राष्ट्रीय समस्या का समाधान है --- अमुक विषय पर लोगो को इकट्ठे करके चिंता व्यक्त करो। फिर इस पर चिंतन शिविर आयोजित करवाकर विचार करो। और कार्यकर्ताओ को इस पर बहस करने के लिए प्रेरित करो। इससे समस्या घबराकर स्वत: गायब हो जाती है। क़ानून किस चिड़िया का नाम है !!!
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संघ का शीर्ष नेतृत्व यह बात अच्छे से जानता है कि देश में वही लागू होता है, जो कानून बना कर लागू किया जाता है। इसलिए संघ समस्याओं के समाधान के लिए कार्यकर्ताओ के सामने क़ानून रखने की जगह उन्हें विचार, मंथन, चिंता , चिंतन, बहस आदि फिजूल गतिविधियों में उलझा कर उनकी ऊर्जा और समय नष्ट कर देता है। किसी भी विषय पर संघ के नेतृत्व की विचार प्रक्रिया आज तक समाप्त नहीं हुयी है। संघ किसी भी समस्या के समाधान के लिए उस पर विचार करना प्रारम्भ करता है और यह विचार कभी ख़त्म नहीं होता। विचार करो, बहस करो, चिंतन करो !!! फिर भी समस्या हल नहीं हो तो फिर से गंभीर विचार करो। फिर इस समस्या को छोड़ दो और नयी समस्या को पकड़ कर उस पर विचार करना शुरू कर दो।
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समाधान
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पहली बात तो यह है कि देश में किसी भी समस्या का समाधान कानूनो द्वारा ही आता है। अत: किसी भी समस्या के समाधान के लिए हमें विचार इस बिंदु से प्रारम्भ करना चाहिए कि हमें गैजेट में क्या प्रकाशित करवाना है। याद रखिये, जो कुछ भी गैजेट में छपेगा वह देश में तत्काल रूप से लागू होगा। इसलिए किसी समस्या पर बहस और विचार का अंतिम परिणाम इस नतीजे पर ख़त्म होना चाहिए कि 'अमुक समस्या के समाधान के लिए हमें यह पंक्तियाँ गैजेट में छपवानी चाहिए'।
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हमने देश की समस्याओ के समाधान के लिए कई क़ानून प्रस्तावित किये है, जिन्हे इस लिंक से फ्री डाउनलोड किया जा सकता है -- https://www.facebook.com/groups/righttorecallparty/10152114637883103
( अवैध बांग्लादेशियों को खदेड़ने, नेशनल आई डी सिस्टम बनाने और जनसँख्या नियंत्रण के लिए अध्याय 31 , 33 , और 5 देखें )