Pawan Jury BhilwaraRj

क्यों सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्त और संघ/भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल कानूनो के कट्टर विरोधी होने के बावजूद यह कहते नजर आते है कि, वे राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओ के समर्थक है ? क्योंकि अपने प्रस्तावित ड्राफ्ट्स की वजह से राईट टू रिकॉल लगातार लोकप्रिय हो रहा है और वे इसे रोकना चाहते है, लेकिन चूंकि वे इसके निरंतर बढ़ रहे फैलाव को रोकने में असफल हो रहे है, इसलिए वे राईट टू रिकॉल कानूनो के लागू होने पर इसका श्रेय लूटने का मौका गंवाना नहीं चाहते !!! समाधान ? "उनके बयान सुनने की जगह उनकी फेसबुक वॉल पर जाओ"।
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल और संघ का शीर्ष नेतृत्व लगातार उनके कार्यकर्ताओ के दिमाग में यह भूस भरता आ रहा है कि -- 'राईट टू रिकॉल अस्थिरता लाएगा इसलिए राईट टू रिकॉल बेकार ही नहीं हानिकर भी है'। संघ का शीर्ष नेतृत्व 1925 से ही राईट टू रिकॉल को कोसता आ रहा है।
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मैं आपको सबूत देता हूँ कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्त और संघ/भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल कानूनो के कट्टर विरोधी है -------- कृपया किसी भी संघ के अंधसेवक या स्वयंसेवक की फेसबुक वॉल पर जाएँ। आप वहाँ मोदी साहेब की प्रशस्ति और सोनिया-केजरीवाल को कोसने से सम्बंधित सैकड़ों पोस्ट पाएंगे। लेकिन राईट टू रिकॉल के 'ड्राफ्ट्स' से सम्बंधित एक भी पोस्ट आपको ढूंढें भी नहीं मिलेगा। जबकि एक सच्चे राईट टू रिकॉल के समर्थक की वॉल पर आप स्थिति बिलकुल उलट पाएंगे !!!
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्त और संघ/भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल कानून ड्राफ्ट्स के बारे में कभी किसी नागरिक को जानकारी नहीं देते। यदि कोई ऐसा कार्यकर्ता उनके संपर्क में आता है जिसे राईट टू रिकॉल के बारे में सतही जानकारी है, तो ये उसके दिमाग में वही भूस भरने की कोशिश करते है, जो कि इनके नेताओ ने इनके दिमाग में भर के रखी है। ये उसे यही पट्टी पढ़ाते है कि, 'अरे राईट टू रिकॉल तो अस्थिरता ले आएगा, इसलिए राईट टू रिकॉल हानिकारक है'। किन्तु यदि इनकी मुठभेड़ ऐसे व्यक्ति से हो जाती है जो कि राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं और इनके लाभों से पर्याप्त परिचित है, तो ये लोग तपाक से पहलू बदल लेते है। अत: उनके सामने अपनी कलई खुलने के भय से राईट टू रिकॉल के ये फर्जी समर्थक उनके सामने राईट टू रिकॉल कानूनो के समर्थक होने का स्वांग करते है !!!
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दरअसल सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्त और संघ/भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल के बारे में यह सुनिश्चित करना चाहते है कि, 'यदि देश में राईट टू रिकॉल क़ानून लागू हो जाते है तो इसका पूरा पूरा श्रेय सोनिया-मोदी-केजरीवाल और मोहन भागवत को जाना चाहिए, न कि राईट टू रिकॉल ग्रुप को। राईट टू रिकॉल की स्वीकार्यता बढ़ती जा रही है, क्योंकि जब कोई कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल के प्रस्तावित 'ड्राफ्ट्स' पढता है तो उसे यह बात समझ आ जाती है कि राईट टू रिकॉल के कोई दुष्परिणाम नहीं है बल्कि इससे व्यवस्था ज्यादा सुचारू हो जायेगी, और सोनिया-मोदी-केजरीवाल-भागवत कपटी लोग है, जो जानबूझकर दशको से नागरिको को भ्रमित कर रहे है कि राईट टू रिकॉल कानूनो से अस्थिरता आएगी। इस प्रकार राईट टू रिकॉल सोनिया-मोदी-केजरीवाल-भागवत और पेड मिडिया के विरोध के बावजूद फल फूल रहा है।
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तो ये लोग चाहते है कि यदि राईट टू रिकॉल क़ानून लागू होते है तो ये उसका श्रेय हड़प ले। इसीलिए राईट टू रिकॉल समर्थको के सामने ये लोग राईट टू रिकॉल समर्थक होने का ढोंग करते है, तथा हमेशा कहते है कि 'हम राईट टू रिकॉल के समर्थक है'। किन्तु यदि आप इनकी फेसबुक वॉल देखेंगे तो आपको इनकी असलियत दिखाई देगी। वहां आपको राईट टू रिकॉल के बारे में कुछ नहीं मिलेगा। जो भी मिलेगा, वह सोनिया-मोदी-केजरीवाल और भागवत की भक्ति से सम्बंधित ही मिलेगा।
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समाधान ?
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उपाय यह है कि हमें सभी कार्यकर्ताओ को यह बात समझानी चाहिए कि ---- 'किसी कार्यकर्ता की असलियत जानने के लिए उसकी फेसबुक वॉल पर रखे गए पोस्ट्स पर धयान देना चाहिए, न कि उसके जबानी बयानों पर'। जिस प्रकार हमें किसी नेता की नीयत का फैसला उसके बयानों को सुनकर नहीं बल्कि उन कानूनो को पढ़कर करना चाहिए जो उसने प्रस्तावित किये है उसी तरह कार्यकर्ताओ की सच्चाई जानने के लिए भी हमें उसके मौखिक बयान सुनने की जगह उसकी फेसबुक वॉल देखनी चाहिए। उदाहरण के लिए सोनिया-मोदी-केजरीवाल दिन में 36 बार कान फाड़ू ध्वनि में 'मेक इन इण्डिया' के प्रलाप करते है, लेकिन जब क़ानून लिखने की बात आती है तो उनके कलम की नोक सिर्फ एक ही शब्द उगलती है ---- एफडीआई, एफडीआई … एफडीआई, और सिर्फ एफडीआई। मोहन भागवत भी 24 में से 36 घंटे "स्वदेशी स्वदेशी स्वदेशी' के एलान चलाते है, लेकिन समर्थन सिर्फ उन कानूनो का करते है जिन पर एफडीआई लिखा हो !!! सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंधभक्त और संघ/भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल के समर्थक होने का दावा करते है, लेकिन उनकी फेसबुक वॉल पर राईट टू रिकॉल कानूनो के 'ड्राफ्ट्स' रखने से मना कर देते है और अपनी वॉल पर अपने नेताओ के प्रशस्ति गान ही साझा करते है !!!
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इसलिए कृपया नेताओ और कारकर्ताओ के मौखिक बयानों की उपेक्षा करें, और सिर्फ यह देखे कि वे कौनसे क़ानून प्रस्तावित कर रहे है और अपनी फेसबुक वॉल पर किस तरह की जानकारी साझा कर रहे है।
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