Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

Pawan Jury BhilwaraRj:

अरब-यूरोपीय, सिक्ख-मुग़ल, सिक्ख-अफगान और सिक्ख-ब्रिटिश संघर्ष के इतिहास के गहन पुनरावलोकन के बाद में इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि ---
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(अ) यूरोपीय अरबो के खिलाफ लगातार पिछड़ रहे थे, लेकिन 950 ईस्वी में ब्रिटेन में फिर से ज्यूरी सिस्टम लागू होने से ब्रिटेन में औद्योगिक उत्पादन के साथ ही आधुनिक हथियारों का निर्माण शुरू हो पाया और ब्रिटेन ने अरबो पर फिर से बढ़त बना ली। इसके अलावा यह ज्यूरी सिस्टम ही था जिसने ब्रिटिश को अफ्रीका के नए मार्गो का आविष्कार करने और अमेरिका जैसे नए महाद्वीपों को खोजने में सक्षम बनाया। यह तय था कि ज्यूरी सिस्टम के अभाव में ब्रिटेन कुछ ही शताब्दियों में अरबों द्वारा अधिगृहीत कर लिया जाता।
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(ब) ज्यूरी सिस्टम ने ही कार्यकर्ताओ और नागरिको को अमेरिका और यूरोप में चुनावी प्रक्रियाओं, मल्टी-इलेक्शन, राईट टू रिकॉल और जनमत संग्रह प्रक्रियाओं को लागू करवाने में सक्षम बनाया और ये देश दिन प्रतिदिन मजबूत होते चले गए।
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लेकिन विडम्बना यह है कि यूरोप में आज ज्यूरी सिस्टम कमजोर हो चुका है, और अमेरिका में भी यह लगातार टूटता जा रहा है। संघीय न्यायलयों में ज्यूरी सिस्टम बदतरीन हालात में है और राज्यों एवं जिला अदालतों में भी यह लगातार कमजोर हो रहा है। इस स्थिति में पूरी संभावना है कि अरब यूरोप और यहां तक कि अमेरिका में भी अपना प्रभाव बढ़ाकर कई ईसाइयों को इस्लाम में धर्मान्तरित करने में सफल रहेंगे !!! ज्यूरी सिस्टम के अभाव में इस्लाम अपनी विशिष्ट प्रक्रिया 'एकत्रीकरण' के कारण बढ़त बना लेगा। (एकत्रीकरण प्रक्रिया से आशय है कि 'समुदाय के सभी व्यक्ति सप्ताह में एक दिन किसी निश्चित दिवस पर अनिवार्य रूप से इकठ्ठे होंगे)। एकत्रीकरण की तुलना में ज्यूरी सिस्टम का परिमाणात्मक प्रभाव अधिक शक्तिशाली है। इसी वजह से यूरोपीय अरबो को विजित कर सके। लेकिन ज्यूरी सिस्टम के अभाव में यूरोपीय देश अधिक समय तक शक्तिशाली नहीं रह सकेंगे। समाधान ? मैं इस सम्बन्ध में खुद को सिर्फ भारत के संदर्भ तक ही सिमित रखूँगा। अलबत्ता भारत में न तो ज्यूरी सिस्टम मौजूद है न ही एकत्रीकरण !!!
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(स) सिक्ख मुग़लो और अफगानों को इसी लिए पराजित कर सके क्योंकि सिक्ख समुदाय के पास गुरुद्वारों के प्रमुख को चुनने की प्रक्रिया थी। इस प्रक्रिया को विधिवत रूप से एसजीपीसी एक्ट में दर्ज किया गया है। लेकिन अब यह प्रक्रिया लगातार कमजोर हो रही है !!! यह कमजोर हो रही है, क्योंकि पूर्वकाल में गाँव के सिक्ख धर्मावलम्बियों के पास भ्रष्ट गरुद्वारा प्रमुख को नौकरी से निकालने की अनौपचारिक प्रक्रिया थी। लेकिन अब एसजीपीसी एक्ट में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है। अत: एसजीपीसी एक्ट आम सिक्ख धर्मावलम्बियों को भ्रष्ट गुरुद्वारा प्रमुखों को रिकॉल करने या नौकरी से निकालने की कोई प्रक्रिया उपलब्ध नहीं कराता है। इससे गरुद्वारो के प्रमुख नियंत्रण से बाहर होते जा रहे है और यह सिक्खो को कमजोर बना रहा है। समाधान ? सिक्खो और सभी भारतीयों को एसजीपीसी एक्ट में रिकॉल प्रक्रिया जोड़ने के लिए प्रयास करने चाहिए। अधिक विवरण के लिए कृपया इस लिंक को देखें --- https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/832400963544808
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कुल मिलाकर अमेरिका के धनिक यूरोप और अमेरिका में ज्यूरी सिस्टम को लगातार कमजोर करने में सफल हो रहे है। और यदि यह प्रक्रिया जारी रही तो यूरोपीय और अमेरिकी नागरिक इस्लाम के और समीप आएंगे तथा पृथक्कीत अरबवासियों का चारा बन जाएंगे।
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भारत के संदर्भ में समाधान यह है कि ------- कार्यकर्ताओ को भारत में ज्यूरी सिस्टम, राईट टू रिकॉल, जनमत संग्रह (टीसीपी), और मल्टी-इलेक्शन प्रक्रियाओं को लागू करवाने के लिए प्रयास करने चाहिए। सोनिया-मोदी-केजरीवाल की या इनके जैसे अन्य नश्वर नेताओ की भक्ति करने और इनकी पूँछ पकड़ कर लटके रहने से देश मजबूत नहीं बनेगा। देश को मजबूत बनाने के लिए मजबूत कानूनो की जरुरत है।
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