Pawan Jury BhilwaraRj
कैसे राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी का यह प्रस्तावित क़ानून देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार ले आएगा ?
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==========राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का प्रारम्भ=======
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सैक्शन 1 : राइट-टू-रिकॉल-शिक्षा अधिकारी
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1.1. माता/पिता` शब्द का अर्थ होगा – 0 से 18 आयुवर्ग के बच्चे के लिए (उसका) पिता अथवा (उसकी) माता, जो उस जिले का दर्ज मतदाता भी हो । जब तक माता-पिता की सूची नहीं बनती, हर पंजीकृत मतदाता जो 23 और 45 वर्ष के बीच में है, उसे इस राजपत्र के लिए माता-पिता माना जायेगा।
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जिला कलेक्टर शब्द का अर्थ होगा – इस सरकारी आदेश का पालन करने के लिए जिला कलेक्टर अथवा उसके द्वारा `रखा गया/`नियुक्त कोई अधिकारी।
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जिला शिक्षा अधिकारी` का मतलब उस पूरे जिला की शिक्षा सम्बन्धी निर्णय करने वाला और शिक्षा सम्बन्धी अच्छी व्यवस्था बनवाये रखने वाला |
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1.2. [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]
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यदि भारत का कोई नागरिक जिला शिक्षा अधिकारी बनना चाहता है और वह जिला कलेक्टर के पास स्वयं उपस्थित होकर या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट/शपथपत्र/हलफनामा प्रस्तुत करता है तो जिला कलक्टर, सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर दाखिल शुल्क लेकर 'जिला शिक्षा अधिकारी' के पद के लिए उसका आवेदन-पत्र स्वीकार कर लेगा ।
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1.3. [पटवारी/तलाटी/लेखपाल, के लिए निर्देश]
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यदि कोई व्यक्ति ,पटवारी के कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर, 3 रूपए का शुल्क जमा करवा कर अधिक से अधिक 5 व्यक्तियों को जिला शिक्षा अधिकारी के पद के लिए पसंद/अनुमोदित करता है तो तलाटी उसके अनुमोदनों को कम्प्यूटर में दर्ज कर लेगा और उसे एक रसीद देगा, जिसमें उसकी मतदान पहचान-पत्र संख्या, तारीख/दिन और उसके द्वारा अनुमोदित किए गए व्यक्तियों के नाम होंगे ।
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1.4. [पटवारी के लिए निर्देश]
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पटवारी माता/पिता के अनुमोदन को, पसंद/अनुमोदित व्यक्ति के मतदाता पहचान-पत्र और नाम के साथ जिले की वेबसाईट पर डालेगा ।
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1.5. [पटवारी के लिए निर्देश]
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यदि कोई मतदाता नागरिक अपना अनुमोदन/पसंद रद्द करवाने के लिए आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई शुल्क लिए रद्द कर देगा ।
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1.6. [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]
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प्रत्येक महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त किया गया अधिकारी पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्रत्येक उम्मीदवार को प्राप्त अनुमोदनों की गिनती प्रकाशित करेगा ।
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1.7. [मुख्यमंत्री के लिए निर्देश]
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यदि कोई उम्मीदवार किसी जिले में सभी माता-पिता (सभी, न कि केवल उनका जिन्होंने अपना अनुमोदन दर्ज करवाया है) के 35 प्रतिशत से अधिक माता-पिता का अनुमोदन प्राप्त कर लेता है और वो प्राप्त अनुमोदन वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी के अनुमोदनों से 5% अधिक है, तो मुख्यमंत्री उसे 'जिला शिक्षा अधिकारी' की नौकरी दे सकता है ।
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1.8. [मुख्यमंत्री, जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश]
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कोई भी व्यक्ति माता-पिता का अनुमोदन प्राप्त करके जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है, वह एक से अधिक जिले का भी जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्य में अधिक से अधिक 5 जिलों का और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन काल में किसी जिले का जिला शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिले का जिला शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता (महंगाई के लिए ज्यादा पैसा), बोनस आदि मिलेगा ।
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1.9. [मुख्यमंत्री के लिए निर्देश]
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जब तक किसी जिला शिक्षा अधिकारी को 34 प्रतिशत से अधिक माता-पिता का अनुमोदन प्राप्त है तब तक मुख्यमंत्री को उसे बदलने की जरूरत नहीं है। लेकिन यदि किसी जिला शिक्षा अधिकारी का अनुमोदन 34 प्रतिशत से नीचे चला जाता है तो मुख्यमंत्री उसे हटाकर/बदलकर अपनी पसंद के किसी अधिकारी को जिला शिक्षा अधिकारी बना सकते हैं ।
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सैक्शन 2 : जिला शिक्षा अधिकारी के कार्य
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2.1. [जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश]
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जिला शिक्षा अधिकारी वर्तमान और बाद के संशोधित कानूनों के अनुसार कक्षा 1 से कक्षा 12 वीं वाले विद्यालयों और जिले के परीक्षा केन्द्रों का प्रशासन संभालेगा । जिला शिक्षा अधिकारी, नागरिकों और सांसदों, विधायकों और जिला पंचायत सदस्यों द्वारा बनाए गए कानूनों के अनुसार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिला पंचायत प्रमुख से पैसा प्राप्त करेगा ।
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2.2 [जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश]
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जिला शिक्षा अधिकारी निम्नलिखित विषयों की शिक्षा का प्रशासन कार्य देखेगा :- गणित, विज्ञान, भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, अंग्रेजी, हिन्दी, स्थानीय भाषा, सेना का इतिहास, कानून और प्रशासनिक ढ़ांचा, कानून का इतिहास और प्रशासनिक ढ़ांचा, सैन्य प्रशिक्षण/ट्रेनिंग और हथियार के प्रयोग/चलाने की शिक्षा । वह सांसदों, विधायकों आदि द्वारा बनाए गए कानूनों के अनुसार शिक्षा देगा ।
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2.3. [जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश]
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जिला शिक्षा अधिकारी संस्कृत और सामाजिक विज्ञान की शिक्षा जारी रखेगा। लेकिन यदि 51 प्रतिशत से अधिक जनता इस कोर्स को जारी न रखने की मांग करती है तो जिला शिक्षा अधिकारी उसे अनिवार्य पाठ्यक्रम से हटा सकता है ।
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2.4. [जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश]
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जिला शिक्षा अधिकारी किसी भी नागरिक को 100 रूपए का शुल्क/फीस लेकर “रजिस्टर्ड निजी शिक्षक/प्राइवेट मास्टर” बनने की अनुमति दे सकता है ।
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2.5. [जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश]
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जिला शिक्षा अधिकारी किसी भी माता-पिता को पटवारी/तलाटी के कार्यालय में जाकर नए शिक्षक का नाम दर्ज करने पर उन्हें अपने बच्चे के शिक्षक को बदलने की अनुमति दे सकता है ।
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2.6. [जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश]
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जिला शिक्षा अधिकारी कक्षा 1 से कक्षा 12 के छात्रों के लिए प्रत्येक माह गणित में 1-4 परीक्षा करवा सकता है। इसके अलावा, वह विज्ञान, कानून और अन्य विषयों में परीक्षाएं करवाएगा। ये परीक्षाएं कम्प्यूटरीकृत परीक्षाएं हो सकती हैं। प्रत्येक वर्ष/ प्रत्येक तिमाही के लिए उन प्रश्नों की सूची, जो परीक्षा में आ सकते है , में 10,000 से लेकर 100,000 प्रश्न होंगे और इन्हें प्रकाशित किया जाएगा। परीक्षाओं में इस सूची में से 30-100 प्रश्न हो सकते हैं ।
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2.7. [जिला शिक्षा अधिकारी के लिए निर्देश]
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जिला शिक्षा अधिकारी उपलब्ध धनराशि/निधि में से छात्र और उसके शिक्षक द्वारा परीक्षा में किए गए प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कार दे सकते हैं। शिक्षक को इन भुगतानों के अलावा सरकार से कोई और वेतन नहीं मिलेगा ।
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सैक्शन 3 : जनता की आवाज
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3.1. [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]
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यदि कोई भी नागरिक इस कानून में परिवर्तन चाहता है तो वह जिला कलेक्टर कार्यालय में जाकर एक ऐफिडेविट/शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है और जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस ऐफिडेविट को 20 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा, ताकि कोई भी उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन देख सके ।
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3.2. [तलाटी/पटवारी/लेखपाल के लिए निर्देश]
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यदि कोई गरीब, दलित, महिला, वरिष्ठ नागरिक या कोई भी नागरिक मतदाता इस कानून अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा उपर के क्लॉज/खण्ड में प्रस्तुत किसी भी ऐफिडेविट/शपथपत्र पर हां/नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र/वोटर आई डी लेकर तलाटी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए का शुल्क/फीस जमा कराएगा। तलाटी हां/नहीं दर्ज कर लेगा और उसे इसकी पावती/रसीद देगा। इस हां/नहीं को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल दिया जाएगा ।
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3.3. [सभी के लिए के लिए निर्देश]
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ये कोई रेफेरेनडम (जनमत-संग्रह) नहीं है | नागरिको द्वारा दर्ज की गयी हाँ या ना अधिकारी, मंत्री, जज, सांसद, विधायक, आदि पर अनिवार्य रूप से बाध्य नहीं है। लेकिन यदि भारत के 40 करोड़ नागरिक मतदाता, किसी अर्जी, फरियाद पर हाँ दर्ज करें, तो प्रधानमंत्री उस फरियाद, अर्जी पर ध्यान दे भी सकते हैं या ऐसा करना उनके लिए जरूरी नहीं है, या प्रधानमंत्री इस्तीफा दे सकते हैं । उनका निर्णय अंतिम होगा ।
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============ड्राफ्ट की समाप्ति===============
प्रजा अधीन–जिला शिक्षा अधिकारी कानून से शिक्षा में सुधार कैसे आएगा ?
भारत में लगभग 700 जिला शिक्षा अधिकारी हैं । सभी बुद्धिमान, काबिल तथा कार्यकुशल है। और उनमें से, मान लीजिए, 10-15 ऐसे होंगे जो भ्रष्टाचार में रूचि नहीं रखते। इस राइट टू रिकॉल -जिला शिक्षा अधिकारी प्रक्रिया में एक खण्ड कहता है कि यदि कोई अधिकारी मुख्यमंत्री द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी रखा जाता है तो वह केवल एक ही जिले का जिला शिक्षा अधिकारी हो सकता है। लेकिन यदि नागरिकों ने उसे जिला शिक्षा अधिकारी बनाया है तो वह राज्य में 5 जिलों और पूरे भारत में 10 जिलों का भी जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है और वह इन सभी जिलों का वेतन प्राप्त करेगा। अर्थात यदि कोई व्यक्ति 4 जिलों का जिला शिक्षा अधिकारी है और उसे नागरिकों ने नियुक्त किया है तो उसका वेतन 4 गुना होगा। यह ज्यादा सस्ता है क्योंकि वेतन ही चार गुना बढ़ेगा, चिकित्सा लाभ और कई आजीवन मिलने वाले लाभ 4 गुना नहीं बढ़ेंगे।
इसलिए वर्तमान 700 जिला शिक्षा अधिकारियों में से, मान लीजिए, 5-15 भ्रष्ट नहीं है । यदि एक बार रॉइट टू रिकॉल लागू हो जाता है तो उन्हें सीधी तरक्की और पदोन्नति का अवसर मिल जायेगा। वे अपने जिले के स्कूलों में अच्छे बदलाव लेकर आएँगे। वे बीच के अधिकारियों को घूस लेने से रोकेंगे । इस बात का ध्यान रखेंगे कि ठेकेदार सही वस्तुएँ जैसे ब्लैकबोर्ड , कुर्सियां आदि स्कूलों को देते हैं। वे ध्यान रखेंगे कि शिक्षक स्कूल में हाजिर रहें, आदि। अब मान लीजिए, इन सभी मामलों में मुख्यमंत्री इन अधिकारियों का तबादला कर देते है । तब लगभग 7-15 ऐसे मामलों में से, कम से कम 2-3 मामलों में तो माता-पिता अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कानून का उपयोग करके उस तबादला किए गए अधिकारी को वापस ले आएंगे।
इस तरह, भारत के 700 जिलों में से 2-5 जिलों में शिक्षा की स्थिति में सुधार आएगा। तो शेष जिलों का क्या होगा ? मान लीजिए आप 'A' जिले में रहते है, तथा 'A' जिले का जिला शिक्षा अधिकारी भ्रष्ट और नाकाबिल है। मान लीजिए, पास में ही पांच अन्य जिले B, C, D, D और E है। मान लीजिए, केवल E जिले में ही अच्छा जिला शिक्षा अधिकारी है। तो जिला A के नागरिकों के पास विकल्प होगा कि वे अपने जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को हटा सकते है और E जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को डबल पोस्ट/दोहरा कार्यभार दे सकते है । इसी विकल्प और अधिकार के कारण कि “अब नागरिक राईट टू रिकॉल - जिला शिक्षा अधिकारी का उपयोग करके मुझे हटा सकते हैं और मेरे पद पर E जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को ला सकते हैं”, अन्य जिलो के जिला शिक्षा अधिकारीयों के मन में एक भय पैदा होगा। इसलिए या तो वे 2-3 महीनों में ही सुधर जाएंगे या तो नागरिक उन्हें राइट टू रिकॉल-जिला शिक्षा अधिकारी का प्रयोग करके हटा देंगे। इस तरह इस कानून के गैजेट में प्रकाशित होने के 8-10 महीनों में ही सभी 700 जिला शिक्षा अधिकारी या तो सुधर जाएंगे या बदल/निकाल दिए जाएंगे।
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10-20 महीनों के अंदर ही ,“जल्दी अमीर बनने” और “भाड़ में जाए जनता” की मानसिकता वाले अधिकारी प्रशासन से हटना शुरू होंगे और दुबारा इन प्रशासनिक पदों पर नहीं आ पाएंगे। इससे वास्तव में सेवा करने की इच्छा वाले लोगों को आने का ज्यादा मौका मिलेगा और भ्रष्टाचारी लोग ईमानदार लोगो के काम में कम बाधा डाल सकेंगे | वर्तमान सरकारी सिस्टम में एक कमी यह है कि यदि कोई ईमानदार व्यक्ति दो लोगों का काम करता है तो भी उसे दो व्यक्ति के बराबर वेतन नहीं मिलता, जबकि व्यापार में ऐसा होना आम बात है । ये बातें ईमानदार लोगों को सरकारी नौकरी में आने से हतोत्साहित करती हैं। पर इस प्रस्तावित राइट टू रिकॉल प्रक्रिया में, अधिकारीयों को एक से अधिक पद मिल सकता है तथा उसके अनुसार वे अधिक वेतन पा सकते है। इससे शासन में ईमानदार और समर्पित व्यक्तियों को आने का ज्यादा मौका मिलेगा।
शिक्षको की नियुक्ति, स्थानांतरण एवं बर्खास्तगी के लिए प्रक्रिया :
1. जिला शिक्षा अधिकारी शुरू में नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में प्रधानाचार्यों की नियुक्त करेंगे | शिक्षकों का चयन 3 वर्ष के लिए कांट्रेक्ट पर, 'खुला मुकाबले वाली परीक्षाओं' के माध्यम से होगा। तबादला प्रत्येक वर्ष होगा। तबादला क्रम रहित-मिलान विधि से किया जाएगा।
2. किसी शिक्षक के पक्ष/विपक्ष में जूरी प्रक्रिया : यदि किसी स्कूल शिक्षक के विरूद्ध कोई शिकायत आती है और पहली नजर में संदेह पक्का हो जाता है तो 10 नागरिकों की एक जूरी बुलाई जाएगी। यदि 7 से ज्यादा जूरी-सदस्य यह निर्णय करते है कि अमुक शिक्षक छात्रों को सेवाएं देने के असमर्थ है तो उस शिक्षक का तबादला किसी अन्य स्कूल में कर दिया जाएगा। ऐसे तीन तबादलो के बाद उसे हटा दिया जाएगा।
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