Pawan Jury BhilwaraRj
ये निम्न और निम्नवर्गीय परिवारो के करीब दो दर्जन लोग थे, जो राजनीति पर तब्सरा कर रहे थे। पूछने पर कि चाहते क्या है ? जवाब था --- शिक्षा, चिकित्सा, खाद्य वस्तुएं और आवास की वाजिब कीमतों की सुविधा।
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सरकार से खुश है तो ?
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वे - हमारे लिए सब कुछ वैसा ही है। एफडीआई, डिजिटल इण्डिया, विदेश नीति आदि ऊँची बातें है, हम ज्यादा समझते नही इनमे। अखबार और टीवी में हेडलाइन पढ़ देख लेते है। सब तरफ से सब कोई कह रहे है कि देश का विकास हो रहा है। पर हमारा विकास तो स्कूल, अस्पताल, राशन की दूकान और अपनी छत तक ही है। दसियों प्रधानमन्त्री देख चुके। एक का भाई दूसरा और दूसरे का तीसरा निकलता है।
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मोदी साहेब से क्या चाहते हो ?
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वे - अपने बड़े विकास को करते करते थोड़ा हमारी तकलीफों के लिए भी समय निकाले तो अच्छा है। सरकारी स्कूल सुधार दे तो हमें बच्चो को प्रायवेट स्कूलों में भेजने से निजात मिल जायेगी। पैसा बचेगा। सरकारी अस्पताल में डॉक्टर और दवा अच्छे से मिलने लगे तो बहुत खर्च बचेगा हमारा। दाल, चावल, सब्जी-भाजी के दाम गिरते देखे नहीं कभी। ये खर्चे तोड़े डालते है। पूरी उम्र गला कर भी जमीन का टुकड़ा खरीद कर अपना घर खड़ा करने की उम्मीद नजर नहीं आती। जितनी ही जमीने सोना हो रही है, हम मिट्टी हुए जा रहे है। पढ़ाई-लिखाई, दवा-दारु, दाल रोटी और छत, बस इतना ही है हमारा विकास। देश का विकास करिये पर हम भी देश में ही है। हमारी खातिर से इन चार चीजो को सुधार दिया तो हमारी तरफ से मोदी सरकार जीत गयी। इतने बड़े आदमी है, इतना सा कर दिया तो हम उन्हें ता जिंदगी वोट करने को तैयार है। कम नहीं है, 70 करोड़ से ज्यादा है हम लोग जो इस दुष्चक्र में फसें पड़े है। हमे उबारने वाला अब तक कोई गद्दी पर नहीं आया।
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कुछ तो फ़र्क़ आया ही है।
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अलबत्ता जब तक अखबार-टीवी के सामने होते है तो लगता है कि फ़रख तो है। पर अस्पताल, स्कूल और राशन की दूकान पर तो हमारा आना जाना होता रहता है इसलिए इनके हालात से हम वाकिफ है। जो दाम मनमोहन राज के दौरान चुका रहे थे वही दाम मोदी राज में चुका रहे है। सब एक ही है। साल पार हो गया अब तो उम्मीद करेंगे ही।
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2019 तक भी कुछ न हुआ तो किसे वोट करेंगे ?
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उन्होंने सब तरफ नजरे घुमायी लेकिन जवाब किसी भी दिशा में लिखा नजर नहीं आया। लगा चेहरे बुझ से गए है। वे शायद कहना यही चाह रहे थे कि वोट तो तब भी इन्हे ही करेंगे। पहले वालो से तो पहले ही अघाये हुए है, नया कोई नजर नहीं आता। किन्तु अपनी असहायता को उभाड़कर नंगा नहीं करना चाहते थे।
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भारत में फैली हुयी गरीबी का इन चार मुद्दो से गहरा सम्बन्ध है।
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मैंने उन्हें समझाने का प्रयत्न किया कि सिर्फ आधा दर्जन कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करके इन मुद्दो को साल भर से कम समय में पूरी तरह से हल किया जा सकता है। इसके लिए न उन्हें 2019 तक इंतज़ार करने की जरुरत है न ही नए नए नेताओ और पार्टियो को आजमाने की।
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सरकारी स्कूल और अस्पताल इसलिए उजड़ते जा रहे है क्योंकि भारत के नागरिको को जिला शिक्षा अधिकारी, शिक्षा मंत्री, जिला स्वास्थ्य अधिकारी और चिकित्सा मंत्री को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है। यदि 543 संसदीय क्षेत्रो के इन 543 * 2 = 1086 अधिकारियों और इन दो विभागों के मंत्रियो में अपनी नौकरी जाने के भय का संचार किया जा सके तो एक वर्ष के भीतर सरकारी स्कूल और अस्पताल उतने ही बेहतर हो जाएंगे जितने की निजी स्कूल्स और अस्पताल है। यदि इन्हे नौकरी से निकालने जनता के पास रहेगा तो ये जनता के हित में कार्य करेंगे वरना वैसे ही काम करेंगे जैसे अब तक करते आये है।
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इसी तर्ज़ पर जिला रसद अधिकारी और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री को नौकरी से निकालने का अधिकार जनता को देकर खाद्य जिंसों की कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है। मौजूदा हालात में सभी राशन की दुकानो के उपभोक्ताओं को नियत कर दिया गया है, जिससे राशन की दुकानो को उपभोक्ताओं पर एकाधिकार हासिल है। यदि उपभोक्ता को राशन की दुकानो को बदलने की छूट दे दी जाए तो दूकान मालिक स्वत: ही अपनी सेवा-आपूर्ति सुधारेंगे वरना ग्राहक गवांयेंगे।
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वेल्थ टैक्स के क़ानून को गैजेट में प्रकाशित से धनिकों, नेताओ, अफसरों द्वारा बनाये गए सभी भूमि बैंक बाहर आ जाएंगे और आपूर्ति बढ़ने से जमीनो की कीमतों में 10 गुना तक की कमी आएगी। पूरे देश की जमीन/प्लाट आदि के आंकड़े सार्वजनिक करने से 'बड़े' लोगो द्वारा कमाए गए काले धन का निवेश जमीनो में करना मुश्किल हो जायेगा और जमीन की कीमते जमीन पर लौटती नजर आएगी। इससे आम नागरिक के लिए जमीन खरीदकर मकान बनाना और रोजगार करना सुलभ हो जाएगा।
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खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी को खनिज मालिको यानी नागरिको के खाते में सीधे जमा करने से भी गरीबी कम होगी।
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यदि करोड़ो नागरिक अपने सांसदों को एसएमएस द्वारा इन कानूनी ड्राफ्ट्स को गैजेट में प्रकाशित करने का आदेश भेजे तो बहुमत का सम्मान करते हुए प्रधानमन्त्री इन्हे गैजेट में प्रकाशित कर देंगे। प्रस्तावित कानूनो के ड्राफ्ट्स के लिए निचे दिया गया लिंक देखे।
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महत्त्वपूर्ण आदेशो की सूची जो मैंने अपने सांसद को भेजे है :
www.facebook.com/notes/809761655808739
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