Pawan Jury BhilwaraRj

मेरी फेसबुक सूची में दर्ज सभी मित्रो से आग्रह है कि यदि आप में से कोई फासीवादी विचारधारा का समर्थक तथा लोकतंत्र का विरोधी है तो मुझे 'अन्फ्रेंड' कर दे।
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मैं सिर्फ लोकतंत्र में ही विश्वास करता हूँ, अन्य सभी प्रकार की व्यवस्थाएं मेरे लिए त्याज्य है। मैं राजनीति में सही/गलत पर विचार करने का भी हामी नहीं हूँ। मैं सिर्फ बहुमत में मानता हूँ और मेरे विचार में देश के सभी महत्त्वपूर्ण राजनैतिक फैसले बहुमत के आधार पर ही किये जाने चाहिए। हालांकि विभिन्न विषयो पर मेरे व्यक्तिगत विचार भिन्न हो सकते है।
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तो ऐसे सभी व्यक्ति, जो लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते है, मुझे अन्फ्रेंड कर दे।
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( जो व्यक्ति निजी तौर पर मुझसे परिचित है, वे इस स्तम्भ की उपेक्षा कर सकते है )
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क्या आप लोकतंत्र के समर्थक है ?
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मैं प्रधानमंत्री से मांग कर रहा हूँ कि ---- १) यदि देश का कोई भी मतदाता अपनी मांग/सुझाव/शिकायत/प्रस्ताव आदि प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर पारदर्शी और अधिकृत तरीके से रखना चाहता है तो उसे ऐसा करने दिया जाए। २) बिंदु एक (१) के तहत दर्ज की गयी किसी भी मांग/सुझाव/शिकायत/प्रस्ताव पर यदि कोई मतदाता अपनी हाँ/ना अधिकृत एवं पारदर्शी तरीके से दर्ज करना चाहता है तो उसे ऐसा करने दिया जाए। ३) यदि किसी मांग/सुझाव/शिकायत/प्रस्ताव आदि पर देश के कुल मतदाताओ के 51% यानि 43 करोड़ मतदाता 'हाँ' दर्ज कर देते है तो प्रधानमन्त्री उस पर कार्यवाही कर सकते है या नहीं भी कर सकते है। प्रधानमन्त्री का फैसला अंतिम होगा।
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यदि आप इस मांग का विरोध करते है तो आप लोकतंत्र के विरोधी और फासीवाद के समर्थक है, क्योंकि आप किसी प्रस्ताव पर करोडो नागरिको को अपना मत रखने की प्रक्रिया से वंचित करने के फैसले का समर्थन कर रहे है।
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यदि आप इन तीन धाराओ का विरोध कर रहे है तो कृपया तत्काल रूप से मुझे अन्फ्रेंड कर दे।
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जनता की आवाज को अधिकृत, पारदर्शी और सम्मिलित रूप से प्रधानमन्त्री के सम्मुख रखने की इस प्रक्रिया को 'पारदर्शी शिकायत प्रणाली' या टीसीपी कहते है। हमने इसकी विधिवत प्रक्रिया का कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है, जिसे इस लिंक पर देखा जा सकता है ---- www.facebook.com/pawan.jury/posts/809753852476186
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यदि आप इस क़ानून की प्रस्तावित प्रक्रिया से परिचित नहीं है तो कृपया उपरोक्त लिंक में दर्ज कानूनी ड्राफ्ट को पढ़े। यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो इसे अपने फेसबुक स्टेटस पर पोस्ट करे और अपने क्षेत्र के सांसद से इस क़ानून को गैजेट में प्रकाशित करने की मांग करे। यदि आप इस क़ानून का विरोध करते है तो मुझे अन्फ्रेंड कर दें।
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इस क़ानून के गैजेट में प्रकाशित होने से भारत की गंभीर समस्याओ जैसे गरीबी, बेरोजगारी, भ्रस्टाचार, विदेशी कम्पनियो का बढ़ता नियंत्रण , गौ-हत्या, बलात्कार आदि का हल सिर्फ 4 महीने में किया जा सकता है। इस क़ानून के लागू होने से आम नागरिक को अपनी बात प्रधानमंत्री के सम्मुख रखने का अधिकृत मंच मिल जाएगा। यदि आपके पास करोडो नागरिको की आवाज प्रधानमन्त्री तक पहुंचाने का और कोई बेहतर जरिया है तो कृपया साझा करे। यदि आपका प्रस्ताव इससे बेहतर है तो मैं आपके प्रस्ताव का समर्थन करूँगा।
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टीसीपी कैसे काम करता है, इसे एक उदाहरण से समझते है। मान लीजिये कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का कोई समूह देश में गौ-हत्या रोकने के लिए प्रभावी क़ानून की मांग कर रहा है। तब टीसीपी की धारा एक के तहत वह अपना प्रस्ताव कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर पूरे विवरण के साथ दर्ज करा सकेगा। इस शपथपत्र को कलेक्टर 20 रूपये प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर अमुक व्यक्ति के नाम और मतदाता संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर रखेगा। अब देश का जो भी नागरिक इस क़ानून का समर्थन करता है वह पटवारी कार्यालय में जाकर या अपने रजिस्टर्ड मोबाइल द्वारा एसएमएस करके अपनी हाँ/ना प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर अधिकृत रूप से दर्ज करा सकेगा। यदि किसी प्रस्ताव को करोडो नागरिको का समर्थन मिलता है तो प्रधानमन्त्री उस पर कार्यवाही कर सकते है।
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टीसीपी के बारे में विस्तृत विवरण के लिए कृपया यह स्तम्भ पढ़े ---- www.facebook.com/notes/pawan-kumar-jury/759964670788438
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