Pawan Jury BhilwaraRj

1 डॉलर का मूल्य 200 रूपये क्यों नहीं होना चाहिए ? यदि हम हर महीने 5 रूपये की वृद्धि करें तो अगले 28 दिनों में हम 1 डॉलर = 200 रूपये का लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे।
.
इस समय हमारे ऊपर 400 बिलियन डॉलर का कर्जा है, और 800 बिलियन डॉलर का पुनर्भरण (रिपेट्रिएशन) हमें एफडीआई के बदले करना है। लेकिन हमारे विदेशी मुद्रा कोष में सिर्फ 350 बिलियन है। मतलब हम 850 बिलियन डॉलर के शुद्ध ऋण में डूबे हुए है। मोदी साहेब ने विदेशी निवेश को देश में लाने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है, मतलब वक़्त के साथ ये कर्ज और भी तेजी से बढ़ता जाएगा। हमें अपने व्यापार घाटे को अगले पांच वर्ष में शून्य करना है, तथा यह भी तय करना है कि न तो हम अब और कर्ज लेंगे और न ही विदेशी कम्पनियो को रिपेट्रिएशन का वादा करेंगे।
.
यदि हम डॉलर का मूल्य 200 रूपये कर दे तो इस कर्जे से मुक्त हो सकते है।
.
सवाल यह नहीं है कि डॉलर का मूल्य 10 पैसे होना चाहिए या 200 रूपये।
.
मेरा कहना है कि ---- हमें तत्काल प्रभाव से नए कर्ज लेना बंद कर देना चाहिए, रिपेट्रिएशन वादे पर रोक लगानी चाहिए और यह भी तय करना चाहिए कि आयातक को निर्यात के अनुपात में ही आयात करने की छूट हो। किन्तु यह फैसले एक ही दिन में लिए गए तो निश्चित रूप से आर्थिक भूकम्प आ जाएगा, लेकिन एक सधी प्रक्रिया के तहत यह सब 1 से 5 वर्ष की अवधि में किया जा सकता है।
.
हम इस समय दिवालिये होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे है, और हमें वे सभी उपाय करने चाहिए जिससे हम डिफाल्टर होने से बच सके। हमें अपने क़र्ज़ चुकाना शुरू करना चाहिए और नए कर्जो से परहेज बरतना चाहिए। हमें रिपेट्रिएशन वादे के अनुसार भी डॉलर चुकाना शुरू कर देना चाहिए। यदि हम हर वर्ष 15% की दर से विदेशी कम्पनियो द्वारा कमाए गए मुनाफे के बदले डॉलर चुकाने लगते है तो अगले 7 वर्षो में हम रिपेट्रिएशन संकट से निजात पा जाएंगे। और सबसे जरुरी यह है कि हम रिपेट्रिएशन का वादा करना तत्काल बंद करे। आज ही।
.
इन फैसलों से विदेशी निवेश में कमी आ सकती है। इससे डॉलर की आवक गिरेगी और डॉलर की कीमत आसमान छू लेगी --- सम्भव है कि 1 डॉलर की कीमत 200 रूपये हो जाए।
.
जो भी हो, हमें इसका सामना वक्त रहते कर लेना चाहिए। वरना बढ़ता रिपेट्रिएशन का भार और कर्ज हमें उस हालत में पहुंचा देगा जहां से वापसी सम्भव नही।
.