Pawan Jury BhilwaraRj

मास्टर जी - अरे चिंटू बेटा, आज तुमने तिलक क्यों नहीं लगाया ?
.
चिंटू - नहीं मास्टर जी। आज मंदिर नहीं गया था, इसलिए तिलक भी नहीं लगा। सूर्य को अर्घ्य भी नहीं दिया।
.
मास्टर जी - मंदिर क्यों नहीं गए ? तुम तो नित्य शिवलिंग पर जल चढाने जाते हो।
.
चिंटू - वो तो है मास्टर जी। लेकिन मैंने अब समस्त अवैज्ञानिक क्रियाओ का त्याग करने का मन बना लिया है। आप स्वयं बताइये कि करोड़ो मील दूर स्थित आग के एक गोले को देखते हुए एक लौटा जल चढाने की क्या उपयोगिता है। इसी तरह शिवलिंग तो पत्थर से बना है। उस पर बार बार जल चढाकर शीतल करने का उपक्रम करने से बेहतर है कि शिवलिंग बनाकर अपने घर के फ्रिज या फ्रीजर में रख दिया जाए। ज्यादा ठंडा रहेगा।
.
मास्टर जी - क्या उल जलूल बक रहा है। धर्म आस्था का विषय है, इसे वैज्ञानिक प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।
.
चिंटू - मास्टर जी, नाहक मुझे बहकाइये मत। हिन्दू धर्म में जो भी अवैज्ञानिक है, उसका त्याग किया जाना चाहिए। ये दोनों क्रियाए मुझे अवैज्ञानिक लगी इसलिए मैंने इन्हे त्याग दिया। पहले मैं भी भ्रम में पड़ा हुआ था। लेकिन परम पूज्य भागवत जी के बयान ने मेरी चेतना को जागृत कर दिया है। आप मामूली शिक्षक है, और अपनी मान्यताएं मुझ पर थोप रहे है। भागवत बड़े आदमी है, रोज टीवी पर आते है, अखबार में उनकी फोटो आती है, केसरिया कपडे पहनते है, हिन्दू धर्म के सबसे बड़े नेता है वे। संघ चलाते है। वो बोलते है तो करोडो हिन्दू उन्हें सुनते है। आपके कहने से होता नहीं कुछ।
.
मास्टर जी - क्या उन्होंने कहा कि, 'सूर्य को अर्घ्य नहीं देना चाहिए, शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए' ???
.
चिंटू - मास्टर जी, आप तो आज घास खा गए लगते है। बड़े आदमी सोच की किसी नयी दिशा की और सिर्फ इशारा भर करते है। उस मार्ग पर चलने न चलने का निश्चय व्यक्ति को अपने विवेक से करना होता है। उन्होंने कहा 'जो भी अवैज्ञानिक है, उसे छोड़ दो', अत: मेरे विवेक ने इन दोनों क्रियाओ में विज्ञान ढूँढा, पर मुझे नहीं मिला। तब मैंने शाखा में जाकर उनके अनुयायियों से कहा कि 'क्या वैज्ञानिक है, क्या अवैज्ञानिक इसकी सूची हो तो दे दो'। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई सूचि अब तक हमें नहीं मिली है। अपने विवेक से फैसला कर लो। अत: मैंने अपने विवेक से इस अवैज्ञानिक प्रथा का त्याग कर दिया। शाखा के मुख्य शिक्षक ने कहा कि, संघ के प्रति तुम्हारा समर्पण देखकर हम खुश हुए। रोज शाखा आया करो।
.
मास्टर जी : चिंटू, सभी धर्मो में काफी कुछ वैज्ञानिक और अवैज्ञानिक है। लेकिन धर्म को विज्ञान की तुला पर नहीं तौला जाता।
.
चिंटू : भागवत जी ने सिर्फ हिन्दू धर्म के मूल्यों को ही अवैज्ञानिक बताया है। उन्होंने ऐसा नहीं कहा कि 'सभी धर्मो को अपने अवैज्ञानिक मूल्यों का त्याग कर देना चाहिए'। उन्होंने ख़ास तौर पर हिन्दू धर्म के लिए कहा है। यदि इस्लाम और इससे धर्मो में कोई अवैज्ञानिकता है तो उसका फैसला उनके इमाम, पादरी और उनके धर्मावलम्बी करे। शेष धर्मो से मुझे भी कोई लेना देना नही। अब मैं मोदी साहेब द्वारा दिए गए बयान 'देवालय से पहले शौचालय' की उपयोगिता भी समझ गया हूँ। आखिर कितने लोग रोज मंदिर जाते है ? लेकिन शौचालय तो सभी लोगो को नियमित तौर पर जाना ही होता है। हिन्दू ह्रदय सम्राट मोदी साहेब भी यही कह रहे थे कि पाखाने मंदिरो से ज्यादा उपयोगी है। हर्षवर्धन ने भी पिछले साल दिवाली पर आतिशबाजी करने से मना किया था, ताकि शोर और धुँआ न फैले। ये सभी लोग हिन्दू धर्म को उपयोगी और वैज्ञानिक बनाना चाहते है। अत: मैं इनका समर्थन करता हूँ।
.
मास्टर जी : चुप कर। बात को समझ। किसी भी धर्म में फैली हुयी कुरीतियों और अंधविश्वासों को ख़त्म किया जाना जरुरी है, लेकिन विज्ञान .......
.
चिंटू : मास्टर जी, मुझे आपने होनोलूलू समझा है क्या ? कहाँ की बात कहाँ लगा कर बात को बदल दे रहे हो। विषय वैज्ञानिक और अवैज्ञानिकता का है। कुरीतिया और अन्धविशवास का नहीं। नरबलि देना, अंगार खाना, सती प्रथा, बाल-विवाह आदि श्रेणी की परमपराएं कुरीतिया है। लेकिन यहां बात विज्ञान की हो रही है। भागवत जी ने भी आदेश अवैज्ञानिक मूल्यों को लेकर दिया है, कुरीतियों को लेकर नहीं। इसलिए बात को घुमाइए मत।
.
मास्टर जी : चिंटू, जहां भी बहुराष्ट्रीय कंपनिया अपने पाँव जमा लेती है, वहाँ मिशनरीज भी मजबूत होती जाती है। तब ये दोनों समूह स्थानीय धर्म को तोड़ने की गतिविधियाँ करते है। इसके लिए पहले अमुक धर्मावलम्बियों को उनके धर्म से विमुख किया जाता है। इससे वैक्यूम पैदा होता है, और उन्हें धर्मान्तर करने में आसानी होती है। पेड मिडिया द्वारा साधु-संतो को चोर उच्चको की छवि में ढाला जाता है। उन्हें व्याभिचारी की तरह प्रस्तुत किया जाता है। मंदिरो को दिया गया दान व्यर्थ जा रहा है, ऐसा माहौल pk और OMG जैसी फिल्मो द्वारा खड़ा किया जाता है। पेड मिडिया पर निर्भर नेताओ द्वारा उनके धर्म की अवहेलना करने के लिए दबाव बनाया जाता है। अत: नेता इस आशय के बयान देते है, जिसमे धार्मिक मान्यताओ आदि की परोक्ष रूप से खिल्ली उड़ाई जाती है।
.
चिंटू : मास्टर जी, वो सब मुझे मालूम है। दीगर बाते करने से बेहतर है कि आप विज्ञान के विषय पर अपना मंतव्य रखे। हिन्दू धर्म के मूल्यों को वैज्ञानिक आधार पर परिभाषित करने में आपको दिक्कत क्या है ?
.
मास्टर जी : अरे दिक्कत कैसे नहीं है। मिशनरीज इसी क्रम में मानव-धर्म, मानव-सेवा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का आश्रय धर्म को तोड़ने के लिए करती है। यदि धर्म की मीमांसा विज्ञान के आधार पर की जायेगी तो धर्म की जड़ ही उखड़ जायेगी। कुछ भी शेष नहीं रहेगा।
.
चिंटू : कैसे ?
.
मास्टर जी : ब्रह्मा-विष्णु-महेश देवत्रय का वैज्ञानिक प्रमाण बता

चिंटू : हमारे वेदो और शास्त्रो में .…
.
मास्टर जी : वेदोक्त और शास्त्रोक्त नहीं, वैज्ञानिक प्रमाण दे। किताब में लिखने से नहीं होता कुछ। जब तक की किताब में लिखा हुआ साबित न हो। तर्कों से नहीं तथ्यों से साबित होना चाहिए। वैज्ञानिक आधार, मतलब भौतिक आधार। तात्विक अवशेष। दे वैज्ञानिक प्रमाण। नहीं है, तो संघ के स्वंय सेवको से पूछ कि इनके वैज्ञानिक प्रमाण देवे। क्योंकि भागवत जी तो किसी को प्रश्न पूछने की सहूलियत देते नहीं है। अत: उन्होने ऐसी किसी प्रक्रिया की रचना नहीं की है, जिससे कोई स्वयंसेवक उनसे पारदर्शी तरीके से सवाल पूछ सके। जो उनके मन में आया कहा, और चल दिए। और उन्होंने यह मिशनरीज और बहुराष्ट्रीय कम्पनियो को खुश करने के लिए कहा है। ताकि तेरे जैसे आस्तिकों के दिमाग में विज्ञान की कील ठोकी जा सके।
.
चिंटू : मतलंब हिन्दू धर्म पूरा ही अवैज्ञानिक है ?
.
मास्टर जी : हिन्दू ही नहीं सभी धर्म अवैज्ञानिक है, लेकिन भागवत ने मिशनरीज को फायदा देने के लिए हिन्दू धर्म पर ही निशाना लगाया। स्वर्ग-नरक आदि आस्थागत विषय है, इन्हे किसी वैज्ञानिक प्रमाण से साबित नहीं किया जा सकता। धर्म को पोंगापंथी और अवैज्ञानिक कहना वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों का पेशा है इसलिए उनकी बात में कोई प्रभाव नहीं बनता। इसीलिए अमुक धर्म के नेता द्वारा ही स्वधर्म की खिल्ली उड़वायी जाती है। जैसे, यदि कोई अन्य धर्म का नेता यह बात कहेगा की हिन्दू मंदिर 'गंदे' है या 'लोगो को मंदिरो को दान नहीं देना चाहिए' तो बवाल हो जाएगा। इसीलिए मिशनरीज ने ऐसा बयान आनंदी बेन से दिलवाया। जो धर्म के अनुयायी जिन गुरुओ/नेताओ की भक्ति करते है, उन्ही के द्वारा ऐसा बयान दिलवाया जाता है। ताकि उनके अंधभक्त उनका विरोध नहीं करे। और जन साधारण ऐसे उपदेश को बिना किसी संशय के ग्रहण कर ले।
.
चिंटू : मैं समझ गया मास्टर जी
.
मास्टर जी : क्या समझा ?
.
चिंटू : किसी आदमी की का अनुसरण सिर्फ इसलिए नहीं करना चाहिए कि वह ऊँचा आदमी है। घटिया आदमी सभी सीगो में होते है। पर मास्टर जी इनका ईलाज क्या है ?
.
मास्टर जी : जब तक देश में FDI आती रहेगी देश में हिन्दू धर्म को तोड़ने के ये प्रयास जारी रहेंगे। मिशनरीज और बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के पैर उखाड़ने के लिए यह आवश्यक है कि हम भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश में राईट टू रिकॉल/ज्यूरी सिस्टम क़ानून प्रक्रियाओ की मांग करे।
.
चिंटू : वो तो मैं भी कर ही रहा हूँ।
.
मास्टर जी : अच्छी बात है।
.
__________________________