Pawan Jury BhilwaraRj

पब्लिक में नार्को टेस्ट - बलात्कार , हत्या , भ्रष्टाचार , गौ हत्या आदि के लिए नारको टेस्ट का कानूनी ड्राफ्ट |
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प्रिय नागरिक ,
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नारको टेस्ट पूछताछ की एक सुरक्षित प्रक्रिया है जिसमें डॉक्टर की देख-रेख में थोड़ी सोडियम पेंटा थेनोल नामक दवा दी जाती है। इस दवा के प्रभाव से व्यक्ति के दिमाग की योजना बनाने की क्षमता कुछ समय के लिए समाप्त हो जाती है। इससे व्यक्ति योजना बनाकर पूछे गए प्रश्नों के झूठे जवाब नहीं दे पाता और सच बोलने लगता है। नारको टेस्ट के दौरान की गयी पूछताछ में आरोपी अपने खिलाफ महत्वपूर्ण सुराग उगल देता है। जिनका पीछा करके सबूत जुटाये जा सकते है।
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अगर आप संगीन अपराध जैसे कि बलात्कार, भ्रष्टाचार, हत्या, गौ हत्या आदि के लिए सार्वजनिक रूप से नार्को टेस्ट किये जाने का समर्थन करते है तो अपने सांसद को एस.एम.एस. द्वारा ये आदेश दें :
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माननीय सांसद,
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अगर आपको एस.एम.एस. के द्वारा ये यू.आर.एल मिला है तो इसे उस वोटर का आदेश माना जाये जिसने यह मैसेज भेजा है, न कि जिसने ये लेख लिखा है।
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=====ड्राफ्ट का प्रारम्भ=====
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(A ) सैक्शन - ज्यूरी के बहुमत द्वारा नार्को टेस्ट
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1. नागरिक का अर्थ भारत में पंजीकृत नागरिक मतदाता है, जिनकी आयु 25 साल से अधिक और 65 साल से कम है। जिला जूरी प्रशासक का अर्थ ऐसे जिला जूरी प्रशासक से है जो मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त हो या जिला जूरी प्रशासक के द्वारा इन कार्यों के लिए नियुक्त किया गया हो। जिला जूरी प्रशासक नागरिकों के द्वारा बदला जा सकेगा । ( जिला जूरी प्रशासक को बदलने की प्रक्रिया को अगले खण्ड में दी गयी है )
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2. यह कानून जूरी सदस्यों को सक्षम करेगा की वो अकेले में या सार्वजनिक रूप से आरोपी का नार्कोटेस्ट या ब्रेन मैपिंग टेस्ट लेने के विशेषज्ञों को आदेश दे सके। जूरी सिस्टम कानून राजपत्र में छापने के बाद यह कानून लागू होगा।
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3. [ जूरी सदस्यों को निर्देश ]
जूरी सदस्य बहुमत से तय करेंगे कि किसी आरोपी का पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग और नार्कोटेस्ट लिया जाये या नहीं। पॉलीग्राफ टेस्ट ब्रेन मैपिंग से पहले करना आवश्यक नहीं है और ब्रेन मेपिंग नार्को टेस्ट से पहले करना आवश्यक नहीं है।
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4. [ जूरी सदस्यों को निर्देश ]

नागरिकों की जूरी बहुमत से यह तय करेगी की टेस्ट अकेले में लिए जाये या सार्वजनिक। अगर आरोपी महिला है तो टेस्ट्स अकेले में ही किये जाएंगे। जूरी सार्वजनिक टेस्ट नहीं ले सकेगी।
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5. [ जिला जूरी प्रशासक के लिए निर्देश ]

जिला जूरी प्रशासक 35 और 55 वर्ष के बीच की आयु वर्ग के 24 नागरिकों को क्रमरहित तरीके से चुन कर बुलाएगा और उन्हें 12 जूरी सदस्यों के दो समूह में बांटेगा। जिला जूरी प्रशासक एक श्रेणी-2 या उससे ऊपर के अफसर को नारको टेस्ट करने के लिए नियुक्त करेगा।
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6. [ जूरी प्रशासक के लिए निर्देश ]

यदि जूरी सदस्यों की संख्या 24 से कम है तो ज्यूरी प्रशासक मतदाता सूचियों में से अक्रमत चयन पद्धति से जूरी सदस्यों का चयन करेगा ताकि जूरी सदस्य 24 या इससे अधिक हो जाए। सदस्यों का चयन ज्यूरी प्रथा के ड्राफ्ट अनुसार किया जाएगा।
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7. [ जूरी सदस्यों को निर्देश ]

अगर ज्यूरी मंडल में नए जूरी सदस्य जुड़ रहे है तो प्रत्येक वकील 30 मिनट तक नए जूरी सदस्य को मामले के बारे में सूचित करेंगे। अगर नए जूरी सदस्य बहुमत से मांग करते है तो यह समय सीमा 4 घंटे तक बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा नए सदस्य पुराने सदस्यों के साथ 1 घंटे से 12 घंटे तक अकेले में मामले के बारे में जानकारी सकेंगे।
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8. [ नार्को टेस्ट के प्रभारी के लिए निर्देश ]

जब नार्को की दवाई का इंजेक्शन लग जाये तो समूह-क के लोग प्रश्न बनायेंगे और यदि समूह-ख में 7 से अधिक लोग स्वीकृति दे देते है, तो नार्को प्रभारी वो प्रश्न पूछेगा। समूह-क के प्रत्येक व्यक्ति को प्रश्न पूछने के लिए केवल 5 मिनट मिलेंगे।
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9. [ जूरी सदस्यों को निर्देश ]

आरोपी द्वारा पॉलीग्राफ और ब्रेन मैपिंग टेस्ट के दौरान दिए गए उत्तर के आधार पर ग्रुप A के सदस्य और विशेषज्ञ नए सवाल तैयार कर सकते है। नए प्रश्न ग्रुप B के बहुमत के आधार पर ही पूछे जाएंगे।
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10. [ जूरी सदस्यों के लिए निर्देश ]

यदि समूह-क में कोई व्यक्ति अपना स्थान समूह-ख में किसी व्यक्ति से बदलना चाहता है तो वो ऐसा कर सकता है। जूरी सदस्यों का बहुमत जिला जूरी प्रशासक द्वारा बनाये गए विशेषज्ञ दल में से किसी विशेषज्ञ को नार्को टेस्ट के लिए प्रश्न बनाने की स्वीकृति दे सकता है। प्रश्नों के बनाने का कार्य केवल दोनों समूहों में जूरी सदस्यों द्वारा किया जायेगा और गुप्त रूप से किया जायेगा। प्रश्न के बनाने के समय जज, वकील, आदि उपस्थित नहीं हो रहेंगे। प्रश्न बनाने का सत्र तब समाप्त होगा जब जूरी सदस्यो का बहुमत सहमत हो कि प्रश्न बनाने का कार्य अब समाप्त किया जाना चाहिए।
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11. [ जूरी सदस्यों के लिए निर्देश ]

जूरी सदस्यों का बहुमत ये निर्णय करेगा कि कौन से विशेषज्ञ पोलीग्राफ, ब्रेन-मैपिंग और नार्को-टेस्ट का कार्य करवाएंगे। वे इन विशेषज्ञों को जिला जूरी प्रशासक द्वारा चुने गए विशेषज्ञ दल में से चुनेंगे।
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12. [ जूरी सदस्यों के लिए निर्देश ]

पोलीग्राफ या ब्रेन-मैपिंग या नार्को-टेस्ट में प्रश्नों से प्राप्त उत्तर के आधार पर समूह-क में कोई जूरी सदस्य या जूरी द्वारा निश्चित विशेषज्ञ नया प्रश्न भी बना सकता है, और यदि समूह-ख उस प्रश्न को स्वीकृत करता है तो जांच प्रभारी उस प्रश्न को पूछेगा। कोई भी प्रश्न समूह-ख के जूरी सदस्यों के बहुमत की स्वीकृति के बिना नहीं पूछा जायेगा।
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13. [ जूरी सदस्यों के लिए निर्देश ]

पोलीग्राफ, नार्को टेस्ट और ब्रेन-मैपिंग - तीनों तरह की जांच में प्राप्त उत्तर को सबूत के रूप में नहीं लिया जायेगा।
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14. [ पुलिस जांच अधिकारी के लिए निर्देश ]

मामले की जांच-पड़ताल करने वाला पुलिस अफसर इस टेस्ट में प्राप्त उत्तर के आधार पर आगे जांच करके और सबूत प्राप्त कर सकता है।
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15. [ नार्को टेस्ट प्रभारी के लिए निर्देश ]

जूरी की स्वीकृति से नार्को टेस्ट प्रभारी मुकदमा शुरू होने से पहले भी पोलीग्राफ, ब्रेन-मैपिंग या नार्को टेस्ट करवा सकता है। इस जांच की प्रक्रिया भी पिछले धाराओं में बताई गयी प्रक्रिया के समान ही होगी।
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16. [ नार्को टेस्ट प्रभारी के लिए निर्देश ]

यदि जूरी ये निर्णय करती है कि नार्को-जांच सार्वजानिक होगा तो मीडिया को लाइव प्रसारण के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इस नार्को टेस्ट को रिकॉर्ड किया जाएगा तथा लाइव प्रसारण और रिकोर्डिंग सरकारी वेबसाईट पर दिखाई जायेगी।
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(B) सैक्शन - राइट-टू-रिकॉल जिला जूरी प्रशासक
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1. नागरिक शब्द का अर्थ रजिस्टर्ड मतदाता है।
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2. [ जिला कलेक्टर ]

यदि भारत का कोई भी नागरिक जिला जूरी प्रशासक बनना चाहता हो और जो 30 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला कलेक्टर के समक्ष स्वयं अथवा किसी वकील के जरिए एफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव के लिए जमा की जाने वाली वाली धनराशि के बराबर शुल्क लेकर जिला जूरी प्रशासक पद के लिए उसकी दावेदारी स्वीकार कर लेगा और उसका नाम मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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3. [ तलाटी/लेखपाल/पटवारी ]

यदि उस जिले का कोई नागरिक पटवारी के कार्यालय में स्वयं जाकर 3 रूपए का भुगतान करके अधिक से अधिक 5 व्यक्तियों को जिला जूरी प्रशासक के पद के लिए अनुमोदित करता है तो तलाटी उसके अनुमोदन को कम्प्युटर में डाल देगा और उसे उसके मतदाता पहचान-पत्र संख्या, दिनांक-समय और जिन व्यक्तियों के नाम उसने अनुमोदित किए है उनके नाम दर्ज करके रसीद देगा।
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4. [ तलाटी ]
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तलाटी नागरिकों के अनुमोदनों को जिले की वेबसाइट पर उनके वोटर आईडी नंबर और उसकी प्राथमिकताओं के साथ डाल देगा।
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5. [ तलाटी ]

यदि कोई नागरिक अपने अनुमोदन रद्द करने के लिए आता है तो तलाटी उसके एक या अधिक अनुमोदनों को बिना कोई शुल्क लिए बदल देगा।
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6. [ मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त अधिकारी ]

प्रत्येक महीने की पांचवी तारीख को मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त अफसर प्रत्येक उम्मीदवार की अनुमोदन की गिनती पिछले महीने की अंतिम तिथि की स्थिति के अनुसार प्रकाशित करेगा।
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7. [ मुख्यमंत्री ]

यदि किसी उम्मीदवार को जिले के सभी दर्ज मतदाताओं के 35 प्रतिशत से ज्यादा नागरिक-मतदाताओं (केवल वे मतदाता ही नहीं जिन्होंने अपना अनुमोदन फाइल किया है बल्कि सभी दर्ज मतदाता) का अनुमोदन मिल जाता है और यह संख्या यदि वर्तमान जिला जूरी प्रशासक के अनुमोदन से 5% से अधिक है तो मुख्यमंत्री वर्तमान जिला जूरी प्रशासक को हटा सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है, और उस सर्वाधिक अनुमोदन प्राप्त उम्मीदवार को जिला जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्त कर सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। इस बारे में मुख्यमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
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(C) सेक्शन - जनता की आवाज
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1. [ जिला कलेक्टर ]
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यदि कोई नागरिक इस कानून में परिवर्तन चाहता हो तो वह जिला कलेक्टर के कार्यालय में जाकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है और जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस ऐफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से फ़ीस लेकर प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा ताकि कोई भी व्यक्ति उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन देख सके।
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2. [ तलाटी/पटवारी/लेखपाल ]
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यदि कोई नागरिक इस कानून अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर के खण्ड में प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर हां/नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र के साथ तलाटी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए का शुल्क जमा कराएगा। तलाटी नागरिक की हां/नहीं दर्ज कर लेगा और उसे इसकी रसीद देगा। इस हां/नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाल दिया जाएगा।
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======ड्राफ्ट का अंत =====
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नोट -- ड्राफ्ट के अंत में सेक्शन जनता की आवाज की धाराओं को देखें। इन धाराओं को प्रयोग करके कार्यकर्ता नार्को टेस्ट कानून में आवश्यक बदलाव ला सकते है। इसके अलावा जिला जूरी प्रशासक अपने विवेक-अधिकार उपयोग कर सकते है। अगर वह अपनी विवेक-अधिकार का दुरूपयोग करे तो नागरिक राइट टू रिकॉल-जिला जूरी प्रशासक की प्रक्रिया का प्रयोग करके जिला जूरी प्रशासक को बदल सकते है। इस प्रकार नार्को टेस्ट अधिकारीयों और जिला जूरी प्रशासक को मनमानी करने से रोक सकेंगे।
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