Pawan Jury BhilwaraRj
खनिज रॉयल्टी सीधे नागरिको के खाते में भेजे जाने के लिए प्रस्तावित कानून (DDMRCM) का ड्राफ्ट
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भारत के नागरिको,
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अगर आप चाहते है कि देश के खनिज संसाधनो से प्राप्त रॉयल्टी प्रत्येक नागरिक के खाते में भेजी जानी चाहिए, तो अपने सांसद को एस.एम.एस. द्वारा ये आदेश भेजे :
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माननीय सांसद, मैं आपको आदेश करता हूँ कि, इस क़ानून को गैजेट में प्रकाशित किया जाए। मतदाता संख्या : ######
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माननीय सांसद,
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अगर आपको एस.एम.एस. के द्वारा ये यू.आर.एल मिला है तो इसे वोटर का आदेश माना जाये जिसने यह मैसेज भेजा है, न कि जिसने ये लेख लिखा है।
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======ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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सैक्शन 1 : राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एन एल आर ओ) उम्मीदवार के लिए नागरिकों के अनुमोदन/स्वीकृति दर्ज करना
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1.1. नागरिक शब्द का अर्थ रजिस्टर्ड मतदाता है। यह सरकारी अधिसूचना तब प्रभावी माना जाएगी जब 37 करोड़ नागरिकों ने इस पर 'हाँ' दर्ज करवा दिया हो।
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1.2. [प्रधानमंत्री के लिए निर्देश]
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के किसी अधिकारी को नियुक्त करेंगे।
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1.3 [जिला कलेक्टर]
यदि कोई नागरिक राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी बनना चाहे तो वह जिला कलेक्टर के सामने एफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है | जिला कलेक्टर को आदेश दिया जाता है कि वह सांसदों के चुनाव में जमा होने वाली धनराशि के बराबर शुल्क लेकर राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के पद के लिए उसकी उम्मीदवारी स्वीकार करेगा तथा उसे एक सीरियल नम्बर जारी करेगा।
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1.4 [जिला कलेक्टर]
जिला कलेक्टर इस काम को करने के लिए किसी प्रथम श्रेणी के अधिकारी को नियुक्त कर सकता है।
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1.5 [तलाटी/पटवारी/लेखपाल या उसका क्लर्क]
कोई भी नागरिक मतदाता तलाटी के दफ्तर में स्वयं आकर 3 रूपए की फीस देकर ज्यादा से ज्यादा पांच उम्मीदवारो का अनुमोदन राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के पद के लिए कर सकता है। तलाटी उसके अनुमोदन को कम्प्युटर में दर्ज करेगा और उसे एक रसीद जारी करेगा। जिसमें मतदाता पहचान-पत्र संख्या, दिनांक/समय तथा जिन्हे नागरिक ने अनुमोदित किया है, उनके नामो का उल्लेख होगा।
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1.6 [तलाटी]
तलाटी नागरिक के अनुमोदन को नागरिक के वोटर मतदाता पहचान-पत्र संख्या और उसकी पसंद सहित मंत्रिमंडल सचिव द्वारा किए निर्देश के अनुसार सरकारी वेबसाईट पर डाल देगा।
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1.7 [तलाटी]
यदि कोई नागरिक अपनी पसंद रद्द करने के लिए आए तो तलाटी बिना कोई फीस लिए उसके एक या अधिक अनुमोदन को बदल देगा।
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1.8 [मंत्रिमंडल सचिव]
प्रत्येक सोमवार को मंत्रिमंडल सचिव नागरिकों के अनुमोदनो को प्रकाशित करेगा।
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सैक्शन 2: राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी को बदलना
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2.1 नागरिक शब्द का अर्थ रजिस्टर्ड मतदाता है।
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2.2. [प्रधानमंत्री]
यदि उम्मीदवार को सभी दर्ज मतदाताओं (सभी, न कि केवल उनका जिन्होंने अपना अनुमोदन फाइल किया है) के 35 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की स्वीकृति मिल जाती है और उस उम्मीदवार को वर्तमान राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी से एक करोड़ अधिक स्वीकृति मिलती है, तब प्रधानमंत्री वर्तमान राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी को निकाल कर नागरिकों के द्वारा पसंद किये गए नए राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी को नियुक्त कर सकते है।
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2.3 [प्रधानमंत्री]
यदि पदासीन राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी नागरिकों के अनुमोदन से नियुक्त हुआ है, और सबसे ज्यादा स्वीकृति प्राप्त व्यक्ति को मौजूदा पदधारी से 2 प्रतिशत अधिक अनुमोदन मिले हो, केवल तभी प्रधानमंत्री उस सर्वाधिक स्वीकृति वाले व्यक्ति को राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के पद पर नियुक्त कर सकते है।
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2.4 [प्रधानमंत्री]
यदि उम्मीदवार को मिले अनुमोदन 24 प्रतिशत से कम है तो प्रधानमंत्री उसे खुद के द्वारा नियुक्त किए गए व्यक्ति से बदल सकते हैं या प्रधानमंत्री को ऐसा करने की जरूरत नहीं है। लेकिन जब तक अनुमोदन 24 प्रतिशत से अधिक है तब तक प्रधानमंत्री को पदासीन राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी को अपने पसंदीदा व्यक्ति द्वारा प्रतिस्थापित करने की आवश्यकता नहीं है। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
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सैक्शन 3: भारत सरकार के अधीन भूखंडों का स्वामित्व
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3.1 [सुप्रीम-कोर्ट जज, हाई-कोर्ट जज, प्रधानमंत्री और नागरिक]
भारत के नागरिक गण अब यह निर्णय और घोषणा करते हैं कि 'आई आई एम अहमदाबाद' का भूखंड, सभी 'आई आई एम' के भूखंड, और 'जे एन यू' के भूखंड भारत के सभी नागरिकों की संयुक्त मालिकाना हक की संपत्ति होगी। ये प्लॉट राज्य अथवा भारत राज्य अथवा भारत संघ अथवा किसी भी निजी/सरकारी निकाय/व्यक्ति की संपत्ति नहीं होगी, बल्कि ये प्लॉट भारत के नागरिकों की संपत्ति होगी। साथ ही, किसी भी निजी कम्पनी अथवा ट्रस्ट के मालिकाना हक के अधीन न आने वाला सभी 'यू जी सी' वित्त पोषित विश्व विद्यालयों और महाविद्यालयों के सभी भूखंड भारत के नागरिकों की संपत्ति घोषित की जाती है। और केन्द्रीय सरकार और सरकारी निकायों के सभी भूखंड भी एतद्द्वारा भारत के नागरिकों की संपत्ति घोषित की जाती है।
प्रधानमंत्री और सभी उच्च न्यायालयों के न्यायधीश और उच्चतम न्यायालयों के न्यायधीशों सहित भारत के सभी न्यायधीश और अधिकारियों से अब यह अनुरोध किया जाता है कि वे ऐसी किसी दलील को स्वीकार न करें जो भारत के नागरिकों के इस निर्णय और फैसला का विरोध करती हो।
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3.2 [सुप्रीम-कोर्ट के सभी जज, हाई-कोर्ट के सभी जज, प्रधानमंत्री और सभी नागरिक]
निम्नलिखित मंत्रालयों/विभागों के सभी भूखंड राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के क्षेत्राधिकार में आएंगे :
पर्यटन मंत्रालय
एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के मालिकाना हक वाले हवाई अड्डे और सभी भवन
सभी आई आई एम, यू जी सी के पैसे से चलने वाले सभी कॉलेज और विश्वविद्यालय ( विज्ञान और इंजीनियरिंग पढ़ाने वाले विद्यालयों को छोड़कर)
उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
सूचना और प्रसारण मंत्रालय
सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय
ग्रामीण विकास मंत्रालय
लघु उद्योग और कृषि व ग्रामीण उद्योग मंत्रालय
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
कपड़ा/वस्त्र मंत्रालय
पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय
शहरी विकास और गरीबी उन्मूलन मंत्रालय
युवा मामले और खेल मंत्रालय
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
योजना आयोग
राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी का उन भू खण्डों पर कोई न्यायिक-अधिकार नहीं होगा जिसका मालिकाना हक निजी व्यक्तियों अथवा कम्पनियों अथवा ट्रस्टों के हाथ हो अथवा जिन भू भूखंडों का स्वामित्व राज्य सरकार अथवा नगरों अथवा जिलों के पास हो। इसका उन भूखंडों पर कोई मालिकाना हक नहीं होगा जिनका उपयोग सेना, न्यायलय, कैदी, रेलवे, बस अड्डों, XII कक्षा तक के सरकारी स्कूलों और कर-वसूली अधिकारियों द्वारा किया जा रहा हो।
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3.3 [प्रधानमंत्री और सारे अधिकारी]
सभी आई आई टी, एन आई टी और आई.आई.एस.सी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डी आर डी ओ) के अन्तर्गत आएंगे और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के निदेशक इन कॉलेजों के मुख्य अधिकारी होंगे। और वे इन कॉलेजों मे दैनिक कार्यकलाप सुचारू रूप से चलाने के लिए उप प्रमुखों की नियुक्ति करेंगे। विज्ञान और इंजिनियरिंग पढ़ाने वाले कॉलेज विज्ञान मंत्रालय के अधीन होंगे और ये राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के अधीन नहीं होंगे।
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सैक्शन 4: भारत सरकार के स्वामित्व वाले भूखंडों के किरायों की वसूली
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4.1 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
उपयोग में न आ रही जमीन के लिए राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी जमीन को उपयुक्त प्लॉटों के आकार में इस तरह बांटेगा जिस तरह वह इसे किराया प्राप्ति के लिए सबसे ज्यादा लाभप्रद समझता है। राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी हरेक प्लॉट के लिए बोली लगवाएगा। नीलामी के लिए शर्तें इस प्रकार होंगी:-
a) लीज/पट्टा राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी द्वारा किए गए निर्णय के अनुसार 5, 10, 15, 20, 25 वर्षों के लिए होगा। यह लीज/पट्टा कभी भी 25 वर्ष से अधिक के लिए नहीं होगा।
b) बोली लगाने वाले मासिक किराए के लिए बोली लगाएंगे और बोली लगाने की अवधि अधिकतम लीज अवधि से कम होगी। यह बोली मासिक किराए और लीज की अवधि के अनुपात में होगी।
c) एक व्यक्ति कई बोली लगा सकेगा। बोली का वजन/प्रभाव = मासिक किराया/अवधि ( जितने समय के लिए लीज पर लिया गया) होगा, अर्थात किराया जितना ज्यादा होगा वजन/प्रभाव उतना ज्यादा होगा और लीज जितना लम्बा होगा वजन/प्रभाव उतना कम होगा।
d) बोली/निविदा खुली होगी।
e) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी बोली के वजन के अनुसार प्लॉट देगा।
f) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी छह महीने का किराया जमा के रूप में लेगा।
g) किराएदार किसी भी दिन जमीन खाली करने और किराए का भुगतान रोक देने के लिए स्वतंत्र होगा।
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4.2 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
लीज की अवधि के दौरान राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी प्रत्येक तीन वर्ष में किराये में बदलाव करेगा। यह बदलाव भूखंडों के चारो ओर के एक वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र की जमीन के मूल्य में आने वाले प्रतिशत बदलाव के आधार पर और भूखंड देने के दिन से और किराया दर में संशोधन किए जाने वाले दिन से ब्याज दर में आने वाले प्रतिशत बदलाव के आधार पर होगा।
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4.3 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
लीज का समय बीत जाने के बाद राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी एक नई बोली लगवाएगा, जिसमें पहले से ही लीज ले चुके लोगों को वरीयता मिलेगी।
उनका वजन/प्रभाव 1.25 से 1.5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा, जो उन वर्षों पर निर्भर करेगा जिसके दौरान उन्होंने भुगतान किया है। नीलामी खत्म हो जाने के तीन महीने के भीतर वह अपनी बोली बढ़ा सकता है। मौजूदा लीज-धारकों को नए लीज-धारक द्वारा भुगतान किए जा रहे 6 महीने के अग्रिम किराए का 20 से 50 प्रतिशत मिलेगा जो उसके द्वारा भूमि अपने पास रखने के महीनों पर निर्भर करेगा।
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4.4 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
लेकिन यदि मौजूदा लीज –धारक बोली हार जाता है तो वह उस जमीन के सामान बेच या हटा सकता है। लेकिन उसे जमीन खाली करनी ही होगी।
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4.5 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
यदि भूखंड किसी ने लिया हुआ है और उसका उपयोग कर रहा है तो उसे 25 प्रतिशत (25 प्रतिशत * लीज, महीनों में /300), और अधिकतम 50 प्रतिशत बोली लगाने में बोनस मिलेगा अर्थात उसकी बोली 1.25 से 1.5 गुना बढ़ जाएगी, लेकिन इससे ज्यादा नहीं।
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4.6 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
यदि वर्तमान में भूखंड किसी ने लिया हुआ है और उसका उपयोग कर रहा है तो राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी उस भूखंड के चारों ओर एक वर्ग किलोमीटर के भूखंडों का पिछले 3 वर्षों की बिक्री का मध्य विचलन मान (बाजार मूल्य * मुख्य् ब्याज दर/3) का हिसाब लगाकर प्लॉट की कीमत तथा उसके अनुसार अगले 10 वर्षों के लिए वार्षिक किराया तय करेगा। किराए में हर तीन साल में बदलाव किया जाएगा। 10 वर्षों के बाद इस धारा के खंड 1 से लेकर आगे उल्लिखित नियम लागू होंगे।
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4.7 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी प्राप्त किराए का 34 प्रतिशत हिस्सा रक्षा मंत्रालय को देगा जो सेना को मजबूत बनाने, हथियार उपलब्ध कराने और सभी नागरिकों को हथियार चलाने की शिक्षा देन के काम के लिए प्रयोग होगा।
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4.8 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी पिछले वर्ष राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति दिए गए किराए के दुगने की अधिकतम सीमा की शर्त के साथ पिछले 10 वर्षों से उस राज्य में रह रहे नागरिकों को प्रत्येक महीने वसूले गए किराए का 33 प्रतिशत वितरित करेगा। राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी प्रति माह वसूला गया शेष किराया भारत के नागरिकों के खाते में भेजेगा।
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4.9 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
इस कानून के पास हो जाने के एक साल के बाद किसी व्यक्ति को किराया इस प्रकार मिलेगा -
यह किराया 33 प्रतिशत बढ़ जाएगा यदि उसका कोई बच्चा न हो।
यह किराया 33 प्रतिशत कम हो जाएगा यदि उसे दो बेटी, एक बेटा-एक बेटी, एक बेटा अथवा दो बेटा अथवा तीन बेटी से अधिक हो और इसमें से सबसे छोटा बच्चा कानून लागू होने के एक वर्ष के बाद पैदा हुआ हो।
किराया 66 प्रतिशत घट जाएगा यदि उसे तीन बेटी, एक बेटा अथवा दो बेटी, दो बेटा अथवा एक बेटी, दो बेटा अथवा तीन बेटा अथवा चार बेटी से अधिक हो और इसमें से सबसे छोटा बच्चा कानून लागू होने के एक वर्ष के बाद पैदा हुआ हो।
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4.10 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
60 वर्ष से ऊपर के पुरूषों और 55 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को 33 प्रतिशत ज्यादा किराया मिलेगा और यह 75 साल से ऊपर के पुरूष एवं 70 साल से ऊपर की महिलाओं के लिए 66 प्रतिशत ज्यादा मिलेगा।
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4.11 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
7 वर्ष से कम उम्र वालों के लिए कोई किराया नहीं दिया जाएगा, 7 से 14 वर्ष के बीच की उम्र वालों के लिए सामान्य का चौथाई और 14 से 18 वर्ष के बीच के उम्र वालों के लिए सामान्य रूप से भुगतान किए गए किराए का दो तिहाई होगा।
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सैक्शन 5: खनिज रॉयल्टी का कलेक्शन करना
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5.1 [सभी विभागों के सचिव]
विभागों के वे सभी सचिव जिनके पास खदानों अथवा कच्चें तेल के कुओं का प्रभार है या जो खदानों अथवा कच्चे तेल के कुओं से रॉयल्टी जमा कर रहे हैं, उन्हें एकत्र की गयी रॉयल्टी राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के पास भेजने का आदेश दिया जाता है।
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5.2 [राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी रॉयल्टी को सेना, राज्य में रहने वाले नागरिकों, भारत के नागरिकों के बीच उसी अनुपात में वितरित करेगा जिस अनुपात में जमीन के किराए के वितरण से संबंधित अध्यादेश/सरकारी आदेश में जमीन किराया बांटने के संबंध में उल्लेख है।
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सैक्शन 6: जनता की आवाज़
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6.1 [जिला कलेक्टर को निर्देश]
यदि कोई नागरिक इस कानून या इसकी किसी धारा में बदलाव चाहता है तो वह 20 रुपये प्रति पृष्ठ की दर से एफिडेविट जिला कलेक्टर के सामने प्रस्तुत कर सकेगा। क्लर्क उस एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके डाल देगा, ताकि सभी नागरिक बिना लॉग-इन के इसे देख सकें।
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6.2 [पटवारी को निर्देश]
यदि कोई नागरिक इस क़ानून पर या इस क़ानून की किसी धारा पर अपना विरोध दर्ज करवाना चाहता है, या उपरोक्त धारा के अनुसार दर्ज एफिडेविट की किसी धारा पर अपनी हाँ या ना दर्ज करवाना चाहता है, तो वह तलाटी के ऑफिस में वोटर आईडी के साथ आएगा, 3 रूपया फीस देगा और अपनी हां ना दर्ज करवा सकेगा। तलाटी उसे एक रसीद देगा और नागरिक की हाँ/ना को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर, नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ रखेगा।
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======== ड्राफ्ट का अंत ======
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