Pawan Jury BhilwaraRj

वसुंधरा राजे ने पार्षद की उम्मीदवारी के लिए 10 वीं कक्षा तक की अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता होने सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
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भारत में डिग्री व्यवस्था है, न कि शिक्षा व्यवस्था।
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शैक्षिक मापदंड के आधार पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध अनुचित है। इससे योग्यता के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत का खंडन होता है। अकादमिक शिक्षा पूरी तरह बकवास है और अक्षर ज्ञान के अतिरिक्त उसका कोई महत्त्व नही है।
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मनमोहन, सिब्बल, चिदंबरम, नेहरु आदि सभी अच्छे खासे पढ़े लिखे नेता है। जिन्होंने देश का बंटाधार किया, और अब अरुण जेटली और मोदी साहेब कर रहे है।
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उम्मीदवारी के लिए अक्षर ज्ञान को ही मापदंड रखा जाना चाहिए और उन कानूनों गेजेट में प्रकाशित किया जाना चाहिए जिससे शिक्षा और राजनैतिक व्यवस्था में सुधार हो।
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शिक्षा व्यवस्था को राईट टू रिकाल शिक्षा अधिकारी और राजनैतिक व्यवस्था को विभिन्न पदों पर राईट टू रिकाल कानूनों की सहायता से दुरुस्त किया जा सकता है।
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