Pawan Jury BhilwaraRj
चिंटू : मास्टर जी पाकिस्तान से फिर बातचीत शुरू हो गयी और फिर से उसने सीमा पर गोलीबारी भी कर दी, फिर से भारत ने निंदा कर दी और पाकिस्तान को धोखेबाज कह के कश्मीर को भारत का 'अभिन्न अंग बता दिया। ये सब क्या तमाशा है ?
मास्टर जी : यह तमाशा नही है चिंटू महाभारत है जिसमें पाकिस्तान के नेता, सेना, आतंकवादी, चीन आदि योद्धाओ के चक्रव्यूह में भारत शस्त्र विहीन अभिमन्यु बनकर घिरा हुआ है।
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चिंटू : जब पाक बार बार गोलीबारी करता है तो भारत उनकी सरकार से बात ही क्यों करता है ? ये तो भारत के साथ धोखेबाजी है।
मास्टर जी : कोई धोखेबाजी नही है। भारत उनकी सरकार से बात करता है, जबकि गोलीबारी सेना करती है।
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चिंटू : तो ये तो एक ही बात हुयी। पाक की सरकार और पाक की सेना अलग अलग थोड़ी है।
मास्टर जी : बिलकुल अलग अलग है। पाकिस्तान एक सेना है जिसके पास एक देश है, न कि पाकिस्तान एक देश है जिसके पास एक सेना है।
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चिंटू : मतलब
मास्टर जी : मतलब वहां की सरकार के पास आंतरिक प्रशासन से सम्बंधित अधिकार उसी सीमा तक है, जिस सीमा तक वहां की सेना अनुमति देती है। लेकिन रक्षा तथा सीमा सम्बन्धी मामलो पर पूरा नियंत्रण सेना का ही है। और ये बात मनमोहन से लेकर मोदी तक सभी जानते है।
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चिंटू : जब भारत पर हमले या आतंकवादी घुसपेठ का निर्णय वहां की सेना ही करती है तो मोदी साहेब पाकिस्तान के जनरल से ही वार्ता क्यों नही करते ?
मास्टर जी : सेनाएं बातें नहीं करती, सेनाएं जंग करने के लिए खड़ी की जाती है। वार्ताए करना दरबारों का काम है। यदि सेना से बात करनी है तो जंग के मैदान में जाना पड़ता है।
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चिंटू : तो छेड़ दो जंग, दिक्कत क्या है ? 56 इंच का क्या अचार बनाना है हमने ?
मास्टर जी : 56 इंच तो है पर हथियार नही है।
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चिंटू : इत्ते सारे हथियार तो है, और कित्ते चाहिए ?
मास्टर जी : ये सब हथियार अमेरिका, ब्रिटेन फ्रांस रूस आदि देशो से आयातित है, इसलिए काम नही आते। जंग से पहले इन देशो से अनुमति लेनी पड़ती है लेकिन वो मना कर देते है।
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चिंटू : मैंने सुना है कि यदि भारत के लोग पाकिस्तान की सीमा पर जाकर पेशाब भी कर देंगे तो पाकिस्तान में बाढ़ आ जायेगी।
मास्टर जी : शायद उनके मुहं फुलाकर एक साथ फूंकने से पाकिस्तान में तूफ़ान भी आ जाए, लेकिन कारगिल युद्ध में उनमे से कोई भी मूतने गया नही गया फलस्वरूप हमारे 600 से ज्यादा सैनिक शहीद हो गए। अंत में जब अमेरिका की शर्ते मानने पर हमें फ्रांस ने 15 लेसर गाइडेड बम दिए तब हमने आधी अधूरी जंग जीती।
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चिंटू : तो हम खुद हथियार क्यों नही बना रहे ?
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हलवा बनाना हो तो घी, तेल, शक्कर और आटा जुटा कर चटपट बनाया जा सकता है, लेकिन हथियार हलवा नही है। बनाने के लिए हमें जूरी सिस्टम और राईट टू रिकाल कानूनों की जरुरत है।
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चिंटू : तो इन कानूनों की मांग क्यों नही हो रही है ?
मास्टर जी : क्योंकि नेताओ के अंधभक्तो को सीमा पर जाकर मूतने और फूंकने से फुर्सत नही है। जब उन्हें फुर्सत होगी तब जाकर वे उन कानूनों की मांग करेंगे जिनसे भारत में आधुनिक स्वदेशी हथियारों के उत्पादन को बढ़ावा मिले।
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चिंटू : ये लोग पागल है या देश के दुश्मन ? इतने बड़े खतरे को नजरअंदाज करके बैठे है। अगर जंग हो गयी और हमे हथियार नही मिले तो, हम तो तबाह हो जायेंगे।
मास्टर : अंधभक्ति और पागलपन में विशेष अंतर नही है। नागरिको को चाहिए कि वे नेताभक्ति की जगह अपने सांसद को SMS भेज कर उन कानूनों की मांग करे जिससे हमारी सेना मजबूत हो।
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चिंटू : मैं क्या करूं ?
मास्टर जी : तू चुपचाप पढ़ और ये भार उन नागरिको पर छोड़ दे जिनको भारत की सेना को मजबूत करने की पड़ी है।
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