Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी सरकार डिजिटल इंडिया के नाम पर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा प्रहार करने जा रही है। मनमोहन इसे करने में असफल रहे थे।
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मोदी सरकार भारत की संवेदनशील इमारतों और खुले आसमान में आम आदमी की पल-पल की तस्वीर और एक-एक मिनट का रिकॉर्ड अमेरिका में सेव कराने जा रही है। इन इमारतों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, साउथ ब्लॉक, न्यूक्लियर प्लांट व तीनों सेनाओं के हेडक्वाटर्स शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी गूगल को गूगल अर्थ से भारत की 3डी तस्वीरें लेने को प्रारंभिक मंजूरी भी दे दी है, जबकि, अमेरिका, चीन सहित कई देशों में राष्ट्रपति निवास और परमाणु ठिकानों जैसी संवेदनशील इमारतों का 3डी व्यू दिखाना कानूनी तौर पर प्रतिबंधित है।
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http://articles.economictimes.indiatimes.com/2015-07-06/news/64143152_1_google-earth-3d-iphone-4s
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गूगल अर्थ एक प्रकार का ग्लोबल ड्रोन है। 3डी व्यू को मंजूरी मिलने से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी इमारतों की तस्वीरें कोई भी कहीं से भी देख सकेगा, क्योंकि ये तस्वीरें हर किसी के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगी। गौरतलब है कि मंुंबई हमले में पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब ने पुलिस के सामने गूगल अर्थ की मदद से मुंबई की रेकी कर हमलाें की साजिश रचने की बात स्वीकारी थी। बाद में हुई जांच से भी यह साबित हुआ कि इससे आतंकियों को सही जगह हमले करने में मदद मिली। खास बात यह है कि इन तस्वीरों और जानकारियों को गूगल से डिलीट कराने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। कम से कम ऐसी व्यवस्था तो सुनिश्चित की ही जानी चाहिए।
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3डी व्यू के तहत अगर संवेदनशील सूचना या फोटो को ब्लर करके भी दिखाया जाएगा तो भी मूल डाटा गूगल के पास ही रहेगा। देश की सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील जानकारी विदेशी कंपनी के पास होना जोखिमभरा है। इसे वह दूसरे लोगों या आतंकियों को व्यापारिक इस्तेमाल के लिए दे सकती है। इस खतरे से बचने के लिए सरकार ने गूगल के साथ कोई समझौता नहीं किया है। सवाल उठता है कि मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट के पहले चरण में गैर-कानूनी तरीके से विदेशी कंपनी को आम आदमी की ऐसी निगरानी का अधिकार क्यों दिया जा रहा है।
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http://www.bhaskar.com/news/ABH-bhaskar-editorial-by-virag-gupta-5053219-NOR.html
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हमारे यहां भी हाल में देश की एक जेल में राष्ट्रपति भवन का नक्शा मिलने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया था। यूपीए सरकार में भी गूगल ने 3डी व्यू दिखाने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा था, लेकिन सुरक्षा का हवाला देकर फैसला टाल दिया गया था। बगैर अनुमति के प्रतिबंधित स्थानों की मैपिंग पर पूर्व में गूगल के विरुद्ध शिकायत भी दर्ज हो चुकी है।जहां तक इस संबंध में भारतीय कानूनों का सवाल है गूगल का भारत में कोई प्रतिनिधि भी नहीं है, जो कानून के पालन की जिम्मेदारी ले। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है, जबकि वर्ष 2006 से मोरक्को और 2007 से ईरान व सूडान जैसे देशों में गूगल अर्थ पर रोक लगी हुई है।
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