Pawan Jury BhilwaraRj

चिंटू : मास्टर जी, भारत में किसी भी मुकदमे का फैसला आने में कितने दिन लग जाते है ?

मास्टर जी : ऐसा तो कुछ तय नही है, लेकिन अमूमन कई साल लगते है।
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चिंटू : कितने साल

मास्टर जी : कुछ पक्का नही, पर 10-15 साल तो लग ही जाते है।
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चिंटू : तो क्यों न हम सभी कानूनों में यह वाक्य जोड़ दें कि, 'यदि अमुक अपराध किया तो जो भी सजा होने वाली है वो 10-15 साल बाद दी जायेगी।

मास्टर जी : ऐसा कैसे लिख सकते है ? ऐसा लिख दिया तो 15 साल बाद फैसला सुनाना ही पड़ेगा। लेकिन कभी कभी 25-30 साल या उससे ज्यादा समय भी लग जाता है।
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चिंटू : ये तो मेरे साथ बेईमानी है ?

मास्टर जी : तुम्हारे साथ क्या बेईमानी है ?
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चिंटू : मैं आज पाठ याद करके नहीं आया तो मुझे तुरंत मुर्गा बना कर 10 छड़ी जमा देते हो, जबकि गंभीर अपराध करने वालों को 20 साल बाद। मुझे भी सजा 15-20 साल बाद दो।

मास्टर जी : ऐसा किया तो, तू रोज पाठ याद करके नही आएगा, क्योंकि देरी से सजा मिलने से नियम और क़ानून का डर समाप्त हो जाता है।
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चिंटू : तो क़ानून की किताबों में भी लिखवाओ कि, अपराध किया तो तुरंत सजा दे देगें, ताकि अपराधी हतोत्साहित हो।

मास्टर जी : ऐसा कैसे लिख सकते है, न्याय में जल्दबाजी अन्याय की दिशा में जा सकती है। इस समस्या का समाधान ज्यूरी सिस्टम है। ज्यूरी सिस्टम आने से मुकदमो का फैसला त्वरित गति से आता है, और अन्याय भी नही होता।
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चिंटू : ज्यूरी सिस्टम क्या है ?

मास्टर जी : इस प्रणाली में हर मुकदमे की सुनवाई अलग ज्यूरी करती है। 12-15 सदस्यीय ज्यूरी के लिए नागरिको का चयन जिले की मतदाता सूची में से अक्रमत: ढंग से किया जाता है।
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चिंटू : इससे क्या लाभ होता है ?

मास्टर जी : हर मुकदमे के लिए अलग ज्यूरी होने से फैसला 8-10 दिन में आ जाता है, जिससे त्वरित न्याय मिलता है। हर बार नई ज्यूरी होने से जज-वकील-नेता गठजोड़ टूट जाता है और निष्पक्ष न्याय मिलता है। अमेरिका और ब्रिटेन में यही प्रणाली होने से उन देशो में क़ानून व्यवस्था ने अच्छे से कार्य किया और इन देशो ने उन्नति की।
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चिंटू : भारत में यह प्रणाली कब लागू होगी ?

मास्टर : जब करोड़ो नागरिक अपने सांसदों से इस क़ानून की मांग करेंगे ।
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चिंटू : तो मांग क्यों नही कर रहे लोग इस क़ानून की ?

मास्टर : क्योंकि नागरिको को इस बारे में जानकारी ही नही है कि इस प्रकार की न्यायव्यवस्था भी होती है। जैसे जैसे उन्हें जानकारी मिलेगी वे ज्यूरी प्रथा की मांग करेंगे ।
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चिंटू : तो कार्यकर्ताओं को यह जानकारी जल्दी से जल्दी नागरिको तक पहुंचानी चाहिए। इत्ते सारे कार्यकर्ता है। कर क्या रहे है ये सब।

मास्टर जी : इनमे से ज़्यादातर हमारे नेताओं के अंध-भगत है, और मानते है कि क़ानून टानून कुछ नहीं होता, सब कुछ नेता से होता है। इसलिए ये लोग अच्छे क़ानूनो की मांग नही करते। जैसे जैसे नागरिको तक जानकारी पहुंचेगी और इनकी भक्ति का नशा हिरण होगा ये लोग भी अच्छे कानूनों की मांग करने लगेंगे।
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चिंटू : मांग कैसे करने की विधि क्या है ?

मास्टर जी : सिम्पल है। tinyurl. com/JuryNichliCourtपर इस क़ानून का ड्राफ्ट दर्ज है। अपने सांसद को इस लिंक का sms भेज कर कोई भी मतदाता इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करने की मांग कर सकता है।
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