Pawan Jury BhilwaraRj

चिंटू - मास्टर जी अंधभक्ति किसे कहते है ?

मास्टर जी : जब किसी व्यक्ति की रुचि 'क्या कहा/किया जा रहा है' के स्थान पर 'किसके द्वारा कहा/किया जा रहा है' में हो जाती है, तो ऐसी अवस्था को अंधभक्ति कहते है। ऐसा व्यक्ति अपने इष्ट द्वारा किये गए सभी कार्यो का आँख मूँद कर समर्थन करता है ।
.
चिंटू : लेकिन भक्ति तो अच्छी वस्तु है। हनुमान भी राम भक्त ही थे । फिर मोदी, सोनिया और केजरीवाल के भक्तो पर उनकी भक्ति के लिए लानत क्यों भेजी जाती है ?

मास्टर जी : चिंटू, अध्यात्म के क्षेत्र में भक्ति एक वरदान है, किन्तु राजनीति के विषय में यह देश के लिए अभिशाप बन जाता है ।
.
चिंटू : ये विरोधाभास क्यों ?

मास्टर जी : क्योंकि अध्यात्म और आस्था व्यक्तिगत विषय है, जबकि राजनीति सार्वजनिक नीतियों का विषय है। नेता द्वारा बनायी गयी नीतियाँ देश का भाग्य निर्धारित करती है । इसलिए यहाँ आँख मूंदकर अनुसरण को अनुचित माना जाता है । यह बात खुद भक्त भी मानते है । तुम किसी भी व्यक्ति को नेता भक्त कहोगे तो वह चिड़ जाएगा और भक्त होने से इनकार कर देगा ।
.
चिंटू : फिर ये लोग क्यों किसी के भक्त बन जाते है ?

मास्टर : असल में इन पर भक्ति थोप दी जाती है । वे चाहते है कि लोगो के पास एक हीरो हो ताकि आम लोगो को जीरो बनाए रखा जा सके, लोग व्यक्ति पूजा करे, ताकि गलत नीतियों का ठीकरा अमुक नेता सिर फोड़ कर नये व्यक्ति को उभारा जा सके और नीतियाँ वही जारी रहे ।
.
चिंटू : नेता भक्त की पहचान क्या है, मास्टर जी ?

बहुत आसान है ।आप इनसे कहिये कि आपके नेता ने अमुक क़ानून गलत बनाया है, तो ये तुरंत बात को घसीट कर विरोधी नेता पर ले जायेंगे और कहेंगे कि अमुक नेता ने इससे भी बुरा क़ानून बनाया था । कुल मिलाकर ये कभी किसी क़ानून या निति की तुलना या चर्चा करने में रुचि नही दिखाते बल्कि हर समय व्यक्तियों की पूँछ पकड़ कर लटके रहते है ।
.
चिंटू : नेता भक्ति से देश को क्या नुकसान होना संभावित है ?

मास्टर जी : भक्तो को अपने नेता की वाहवाही और विरोधी नेता की निंदा करने का चस्का लग जाता है, अत: वे इस रस के रसास्वादन में डूबे रहते है। इससे राजनीति नीतियों की जगह व्यक्ति आधारित हो जाती है, एक दूसरे के भक्तो द्वारा उनके नेताओं की प्रशंषा, निंदा आदि में देश का समय और शक्ति खर्च हो जाती है तथा जनता को यह जानकारी ही नही हो पाती कि अमुक नेता अच्छे क़ानून बना रहा है या बुरे । अच्छे नेता द्वारा बनाए गए बुरे कानूनों से लोग अनभिग्य बने रहते है, और बुरे क़ानून देश को लगातार खोखला करते जाते है ।
.
चिंटू : जब इनके नेता का अवसान हो जाता है, तो इनका क्या हश्र होता है ?

मास्टर जी : जब दीर्घकालीन भक्ति के बावजूद इनका नेता कोई बदलाव नही लाता है या उसका अवसान हो जाता है तो ये 5-10 साल के कोमा के बाद नये नेता की पूँछ पकड़ लेते है । ऐसे दो चार रोटेशन के बाद इनका राजनीति और राष्ट्रीय विमर्श से मोहभंग हो जाता है, तब ये लोग 'इस देश का कुछ नही हो सकता' टाइप के आलाप करते हुए शेष जीवन जीते है । तब तक नये भक्तो का प्रादुर्भाव हो चुका होता है, अत: वे इनकी जगह ले लेते है । यही चक्र लगातार चलता रहता है ।
.
चिंटू : ये तो बहुत विकट स्थिति है । कैसे इस अंधभक्ति को रोका जा सकता है ?

मास्टर जी : कार्यकर्ताओं को इनकी तन्द्रा तोड़ने के लिए भक्तो के कान के पास ऊँची आवाज में अच्छे कानूनों के नगाड़े और शंख बजाने चाहिए ।
.
__________________