Pawan Jury BhilwaraRj
'पुत्रजीवक बूटी' विवाद ने पतंजलि संस्थान की इस बूटी की बिक्री में पर्याप्त इजाफा कर दिया है, क्योंकि कई दंपत्ति जो पुत्र रत्न की इच्छा रखते है, इस बूटी को ढूंढ रहे है !!!
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फार्मा के खुदरा व्यवसाय से जुड़े कुछ मित्रो द्वारा दी गयी अनाधिकृत जानकारी के अनुसार विवाद के बाद पुत्र जीवक बूटी की मांग कई गुना बढ़ गयी है ।
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विवाद के कारण करोड़ो लोगो को इस बारे जानकारी मिली कि इस तरह का कोई प्रोडक्ट भी बाजार में उपलब्ध है, जिसके बारे में उन्हें विवाद से पहले कोई जानकारी नही थी । स्पष्ट है कि पेड मिडिया और नेताओं ने इस मुद्दे को जानबूझकर इसीलिए हवा दी, ताकि करोड़ो लोगो तक यह जानकारी पहुँच जाए । जैसा कि प्रचलित 'या तो ठगाए रोगी या ठगाए भोगी' कहावत के अनुसार अपेक्षित था अब पुत्र प्राप्ति के लिए ज्यादा दंपत्ति इस नुस्खें को आजमा रहे है, और यह संख्या बढती जायेगी ।
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तात्कालीन 'मेगी विवाद' का ड्रामा तो समझ आता है किन्तु ये बात मेरी समझ से बाहर है कि फार्मा कंपनियों ने अपनी प्रतिद्वंदी कंपनी 'पतंजलि फार्मा' का विरोध (नकारात्मक प्रचार जो कि बिक्री बढाने का आजमाया हुआ पैंतरा है) करने के लिए पेड मिडिया को भुगतान क्यों किया । क्योंकि ये कम्पनियां जानती थी कि इससे इस बूटी की बिक्री बढ़ जायेगी और पतंजली को वित्तीय लाभ होगा ।
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इसके अलावा पुत्र जीवक बूटी एक आयुर्वेदिक औषधि है, और कई फार्मा कम्पनियाँ इस औषधि को बना कर बेच रही है ।
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खैर, इसका समाधान यह है कि भारत सरकार (पढ़े 'मोदी' सरकार) को सभी फार्मा कम्पनियों के लिए यह आदेश जारी करना चाहिए कि इस औषधि पर पुत्र जीवक की जगह 'संतान जीवक' का लेबल लगाया जाए, तथा यह टिपण्णी लिखी जाए कि 'यह औषधि प्रसव धारण करने की संभावनाएं बढाने में लाभकारी है' ।
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