Pawan Jury BhilwaraRj
विडम्बना !!!
विहिप और आरएसएस कार्यकर्ता सुबह उन बीजेपी नेताओं की जय जयकार करते है, जो कि हिन्दू धर्म को कमजोर करके मिशनरीज को धर्मान्तर में सहयोग करते है, और जब मिशनरीज़ हिन्दुओ का धर्मान्तर करती है, तो शाम को विहिप और आरएसएस के कार्यकर्ता मिशनरीज़ के खिलाफ नारे लगाते है, उपद्रव मचाते है और हंगामा खड़ा करते है । किन्तु विहिप और आरएसएस द्वारा सुबह किया गया सहयोग मिशनरीज को धर्मान्तर में ज्यादा सहायता देता है, जबकि शाम को किया गया तमाशा निष्फल हो जाता है !!
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कुछ उदाहरणों से इसे समझते है ।
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सुबह विहिप आरएसएस कार्यकर्ता बीजेपी, कोंग्रेस, आम पार्टी के इस फैसले का समर्थन करते है कि खनन और प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त रोयल्टी को सीधे नागरिको के खाते में जमा नही किया जाना चाहिए ।
नतीजा : गरीबी और भुखमरी बनी रहती है ।
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दिन में मिशनरीज़ गरीब व्यक्ति को लालच देकर धर्मान्तर करती है, और शाम को विहिप आरएसएस कार्यकर्ता चिल्लाते है, कि देखो मिशनरीज हिन्दुओ का धर्मान्तर कर रही है ।
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सुबह विहिप आरएसएस कार्यकर्ता बीजेपी कोंग्रेस और आम पार्टी के इस फैसले का समर्थन करती है कि खनन से प्राप्त रोयल्टी नागरिको के खाते में जमा नही की जानी चाहिए ।
नतीजा : सीनियर सिटिज़न को पेंशन नही मिल पाती और उन्हें आश्रित जीवन जीना पड़ता है, जबकि मिशनरीज़ वृद्धाश्रम आदि अच्छे से संचालित करती है, जिसे वृद्ध व्यक्तियों को सेवा सुसुश्रा के लिए पुत्र की आवश्यकता महसूस नही होती । इससे ईसाईयों में लिंगानुपात सम बना रहता है, जबकि हिन्दुओ में पुरषो के मुकाबले स्त्री अनुपात गिरता है ।
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दोपहर को ईसाई लड़की से शादी करने के लिए हिन्दू युवक पादरी के सहयोग से धर्मान्तर करता है, और शाम को विहिप आरएसएस कार्यकर्ता नारे लगाते है, कि मिशनरीज़ धर्मान्तर कर रहे है ।
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सुबह विहिप आरएसएस कार्यकर्ता बीजेपी, कोंग्रेस और आम पार्टी के साथ खड़े होकर राईट टू रिकाल एजुकेशन ऑफिसर के क़ानून का विरोध करते है, जिससे सरकारी स्कूल बदहाल बने रहते है, और गरीब तबके को शिक्षा नही मिल पाती ।
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नतीजा : मिशनरीज अपने विपुल कोष से स्कूल्स चलाते है, और उन लोगो को शिक्षा मुहैया कराते है जिनकी हैसियत निजी स्कूलों की भारी भरकम फ़ीस अदा करने की नही है ।
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दिन में मिशनरीज़ मुफ्त शिक्षा देकर धर्मान्तर करती है, और शाम को विहिप आरएसएस कार्यकर्ता हल्ला गुल्ला मचाते है कि, मिशनरीज़ धर्मान्तर कर रही है ।
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सुबह विहिप आरएसएस कार्यकर्ता बीजेपी, कोंग्रेस और आम पार्टी के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण में बनाए रखने के फैसले का समर्थन करते है, जिससे मंदिरों की संपत्ति पर सरकार कब्ज़ा लेती है और मंदिर स्कूल, अस्पताल, वृद्धाश्रम आदि का सञ्चालन नही कर पाते।
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नतीजा : बेहद गरीब तबका मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित बना रहता है ।
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अपने सुप्रबंधित स्कूल्स और अस्पताल के बूते मिशनरीज़ दिन में धर्मान्तर करते है, और विहिप आरएसएस कार्यकर्ता शाम को गुल गपाड़ा मचाते है, कि मिशनरीज धर्मान्तर कर रही है ।
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सुबह विहिप आरएसएस कार्यकर्ता बीजेपी, कोंग्रेस और आम पार्टी की FDI नीति का समर्थन करते है, जिससे MNCs के CSR में वृद्धि होती है और रोजगार के अवसर पैदा होते है ।
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नतीजा : CSR से मिशनरीज को स्कूल, अस्पताल और वृद्ध्आश्रम चलाने के लिए दान मिलता है, और कम्पनियों में नौकरियों के अवसर बढ़ते है ।
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दिन में मिशनरीज़ नौकरी और सुविधाओं का लालच देकर हिन्दुओ का धर्मान्तर करती है, और शाम को विहिप आरएसएस कार्यकर्ता मिशनरीज के खिलाफ ऐलान चलाते है, कि मिशनरीज धर्मान्तर कर रही है ।
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विडम्बना यह है कि, अगली सुबह विहिप आरएसएस कार्यकर्ता फिर से उन्ही बीजेपी नेताओं की पूजा करते है, जो लगातार ऐसी नीतिया बना रहे है, जिससे सरकारी स्कूल तबाह हो जाए, सरकारी अस्पताल बदहाल बने रहे, मंदिर सरकारों के कब्जे में बने रहे और सारा विकास FDI से ही हो ।
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इस सर्कस को आप कितनी गंभीरता से लेते है, यह आप पर निर्भर है ।
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