Pawan Jury BhilwaraRj

चिंटू : मास्टर जी मोदी साहेब के अजमेर शरीफ में चादर भेजने पर हंगामा क्यों मचा है ?

मास्टर जी : क्योंकि उन्होंने पहले टोपी नही पहन कर ख़ासा हंगामा मचवाया था ।
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चिंटू : पहले टोपी क्यों नही पहनी थी ?

मास्टर जी : क्योंकि तब उन्हें चुनाव जीतना था इसलिए मंदिर मंदिर थे ।
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चिंटू : और राहुल बाबा पैदल पैदल केदारनाथ क्यों जा रहे है ?

मास्टर जी : क्योंकि वो टोपी पहनकर चुनाव हार गए थे, इसलिए अब जीतने के लिए मंदिरों के चक्कर लगा रहे है । मोदी साहेब अभी मंदिर मस्जिद हो गए है, 2019 आते आते वे भी फिर से मंदिर मंदिर हो जायेंगे ।
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चिंटू : पर दरगाह में चादर भेजना या मंदिरों की परिक्रमा करने में गलत क्या है ?

मास्टर जी : गलत ऐसा करने में नहीं है । गलत, वोट खींचने के लिए चुनाव के पहले और बाद में रंग बदलना है । यह वही बीजेपी है जिसने 20 साल तक मंदिर बनाने के नाम पर नारे लगा लगा कर देशवासियों के कान में से खून निकाल दिए थे । लेकिन सत्ता हाथ में आते ही अयोध्या अजमेर हो गया । नेताओं को सभी धर्मो में समभाव बनाए रखना चाहिए लेकिन मौकापरस्ती कपट कर्म है ।
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चिंटू : मास्टर जी, हमारे नेता चुनावों के आधार पर इस तरह घर वापसीयाँ क्यों करते है ?

मास्टर जी : क्योंकि एक बार चुन लिए जाने के बाद अगले पांच साल तक भारत में नागरिको के पास इन्हें नौकरी से निकालने के लिए राईट टू रिकाल कानूनों जैसी कोई प्रक्रिया नही है ।
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चिंटू : राईट टू रिकाल क़ानून आने से क्या परिवर्तन आएगा ?

मास्टर जी : ये क़ानून आने के बाद यदि कोई नेता चुनाव जीत कर घर वापसी करता है तो, मतदाता भी अपना वोट वापसी कर सकेंगे । इससे नेताओं का चमड़ा चुनाव जीतने के बाद भी पतला बना रहेगा ।
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चिंटू : चमड़ा पतला होने के क्या मायने है ?

मास्टर जी : चिंटू, जैसे ही नेता सत्ता में आता है अगले मिनिट ही उसमें यह भाव आ जाता है कि अब अगले 5 वर्ष तक नागरिक मेरा कुछ भी उखाड़ नही सकते, अत: उसकी इंसानी चमड़ी तुरंत मोटे चमड़े में रूपांतरित हो जाती है । इस गैंडा चमड़े पर धरने, अनशन, विरोध प्रदर्शन आदि का कोई असर नही होता, लेकिन राईट टू रिकाल जैसे कानूनों के होने से कुर्सी खोने का भय उनके चमड़े को पतला बनाए रखता है । इन कानूनों के अभाव का ही दुष्परिणाम है कि किये गए 100 वादों में से 60 वादों पर केजरीवाल महीने भर में ही एलानिया U टर्न ले लेते है, क्योंकि उन्हें पता है कि जनता अपने दिए गए वोट से U टर्न नही ले सकती ।
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चिंटू : लेकिन मास्टर जी आरएसएस और विहिप क्यों इस विषय पर खामोश है ?

मास्टर जी : चिंटू, आरएसएस और विहिप के शीर्ष नेता इस परनाले के दलदल में गले गले तक मोदी साहेब के साथ धंसे हुए है, और जहाँ तक उनके स्वयंसेवको की बात है, 'वे कहीं के नही रहे, घाट ओ घर करीब है' । उनके पास कसमसा कर रह जाने के सिवा अन्य चारा नही है, क्योंकि आरएसएस ने उन्हें राईट टू रिकाल कानूनों के बारे में कभी कोई जानकारी नही दी, अत: वे आरएसएस के कुओं को ही हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद का समन्दर समझ बैठे है, जहाँ सारे देश की ज्ञान गंगा का विलय होता है ।
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चिंटू : अब हम क्या कर सकते है मास्टर जी, ताकि हमारे देश में राईट टू रिकाल क़ानून आ सके ।

मास्टर जी : महात्मा भगत सिंह, महात्मा चन्द्र शेखर आजाद और महात्मा राजिव दिक्षित राईट टू रिकाल कानूनों का प्रचार कर रहे थे, अत: हमें भी वही करना चाहिए, ताकि करोड़ो नागरिको तक ये जानकारी पहुंचे और भारत में ये क़ानून लागू हो सके ।
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राईट टू रिकाल ग्रुप@