Pawan Jury BhilwaraRj
'दलितों की सहमती से आरक्षण का कानूनी समाधान'
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ऊँचे वेतन भत्ते, न्यूनतम कार्यभार, सेवा सुरक्षा और असीमित भ्रष्टाचार के अवसरों के कारण राजकीय सेवा सोने का अंडा देने की मुर्गी बन गयी है । प्रजा अधीन राजा समूह द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकाल कानूनों के आने के बाद सरकारी नौकरियों का आकर्षण घटेगा तथा वेल्थ टेक्स, जूरी सिस्टम जैसे क़ानूनो से निजी क्षेत्र में रोजगार और तरक्की के नये अवसर खुल जायेंगे, जिससे आरक्षण की मांग उत्तरोतर रूप से कम होती जायेगी ।
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कांग्रेस, बीजेपी समेत सभी राजनेतिक दल तथा समूह आरक्षण पर वक्त के अनुसार अपना रूख बदलते रहते है, क्योंकि ऐसा करने से सभी वर्गो का समर्थन बना रहता है, इसीलिए इन दलों तथा अन्य समूहों ने कभी भी आरक्षण की समस्या के समाधान के लिए कभी कोई कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित नही किया ।
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हमारा मानना है कि इस समस्या का समाधान दलितों की सहमती से किया जाना चाहिए, ताकि सामाजिक समरसता बनी रहे ।
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कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे कोंग्रेस, आरएसएस, बीजेपी, आम पार्टी आदि समूहों के शीर्ष नेतृत्व से आरक्षण पर अपना रूख स्पष्ट करने के लिए कानूनी ड्राफ्ट देने का आग्रह करे ।
=========ड्राफ्ट का प्रारम्भ======
1. कोई भी दलित या पिछड़े वर्ग का सदस्य तहसीलदार के कार्यालय में जाकर 'आर्थिक विकल्प' के लिए आवेदन कर सकेगा।
(1.1) उसका दलित/ पिछड़े वर्ग का दर्जा बरकरार रहेगा ।
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(1.2) उसे समायोजित मुद्रा-स्फीति के अनुसार 600 रू हर वर्ष मिलेगा, जब तक कि वह अपने आर्थिक विकल्प को समाप्त नही कर देता ।
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(1.3) जब तक वह भुगतान प्राप्त करेगा, आरक्षण कोटे में आवेदन नही कर सकेगा ।
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(1.4) जिस दिन वह आर्थिक विकल्प रद्द करेगा, उसी दिन से वह फिर से आरक्षण का पात्र माना जाएगा ।
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(1.5) इसके लिए पैसा सिर्फ जमीनों की कर वसूली से आएगा, और कहीं से नही ।
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(1.6) जिन्होंने आर्थिक विकल्प लिया है, उनकी संख्या के आधार पर आरक्षित पदों की संख्या में कमी की जायेगी ।
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उदाहरण - मानिए की भारत की 100 करोड़ की आबादी में से 14 करोड़ ST सदस्य है, अत: 1000 सीट में से 140 सीट अमुक वर्ग के लिए आरक्षित रहेगी । मानिए इन 14 में से 6 करोड़ आर्थिक विकल्प चुनते है तो आरक्षण 14×6/14 = 6% कम कर दिया जाएगा । 14%-6% = 8% आरक्षण प्रभावी होगा ।
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(2) यदि कोई आर्थिक विकल्प धारी व्यक्ति फिर से सामाजिक विकल्प चुन लेता है, तो वह फिर से आरक्षण के लाभ का पात्र होगा। किन्तु यदि वह फिर से आर्थिक विकल्प की और लौटता है, तो उसे 6 माह बाद से 600 रू प्रति वर्ष मिलेंगे ।
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(3) यदि किसी व्यक्ति ने आरक्षण का लाभ लेकर सीट लिया है, तो वह आर्थिक विकल्प का पात्र नही होगा ।
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(4) यदि माता-पिता दोनों ने आर्थिक विकल्प लिया है, तो उनके 18 वर्ष के कम आयु के बच्चो को 300 रू प्रति वर्ष मिलेगा , जो अधिकतम दो संतानों पर लागू होगा ।
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(5) यदि किसी व्यक्ति ने आर्थिक विकल्प चुना है, तो वह फिर से आरक्षण का लाभ लेकर सीट ले सकता है । लेकिन वह तभी पात्र माना जाएगा जब वह आर्थिक विकल्प छोड़ देगा ।
========ड्राफ्ट की समाप्ति=======
दलित क्यों इस क़ानून का समर्थन करेंगे ?
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क्योंकि 80% से अधिक दलित गरीब है और 12 वी कक्षा पास भी नहीं है, अत: उनके लिए आरक्षण की कोई उपयोगिता नही है । एक 5 सदस्यीय परिवार यदि आर्थिक विकल्प चुनता है तो उसे बिना किसी हानि के 3000 रू का लाभ प्राप्त होगा। इस तरह ज्यादा से ज्यादा दलित आर्थिक विकल्प चुनेंगे, और उसी अनुपात में आरक्षित सीटों में कमी हो जायेगी । जब कोई दलित आरक्षण का लाभ लेना चाहेगा, तो आर्थिक विकल्प को त्याग कर फिर से आरक्षण के लिए आवेदन कर सकेगा । इस तरह व्यावहारिक रूप से आरक्षित कोटे में दलितों की सहमती से कमी आ जायेगी ।
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लागत
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भारत में SC/ST/OBC वर्ग के नागरिको की संख्या 80 करोड़ है । यदि इन वर्गो के सभी नागरिक आर्थिक विकल्प चुन लेते है, तब भी यह राशि 50 हजार करोड़ होती है, जो कि भारत की जीडीपी का सिर्फ 1% है । हमारा प्रस्ताव है कि यह राशि सिर्फ वेल्थ टेक्स से ही एकत्र की जानी चाहिए, अन्य किसी स्त्रोत से नही ।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है, तो अपने क्षेत्र के सांसद महोदय से इस ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित करने की मांग करे। ड्राफ्ट के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए प्रजा अधीन राजा के कार्यकर्ताओं से संपर्क करे ।
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