Pawan Jury BhilwaraRj

वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है,
माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है,
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मस्लहत आमेज़ होते है सियासत के कदम,
तू न समझेगा सियासत तू अभी इंसान है,
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उस सरफिरे को यूँ नही बहला सकेंगे आप,
वो आदमी नया है मगर सावधान है,
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सामान कुछ नहीं है फटेहाल है मगर
झोले में उसके पास कोई संविधान है,
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कल नुमाइश में मिला था चीथड़े पहने हुए,
मैंने पूछा नाम, तो बोला कि हिन्दुस्तान है,
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इस कदर पाबंदी ए मजहब कि सदके आपके,
जब से आजादी मिली है मुल्क में रमजान है,
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