Pawan Jury BhilwaraRj
न्याय की देवी के सिर्फ आँखों पर ही पट्टी बची है, शेष सभी अंग निर्वस्त्र है ।
________________
वाजपेयी ने 2002 में दूरदर्शन को आदेश दिया था कि सलमान द्वारा कुचले गए व्यक्तियों के परिवार के बारे में प्रसारण न किया जाए, क्योंकि इससे सलमान के प्रति लोगो की सहानूभूति ख़त्म हो सकती है ।
.
अब मोदी ने भी दूरदर्शन अध्यक्ष को ऐसे ही आदेश दिए है, ताकि उसके पियक्कड़, उद्दंड, भगौड़े और संवेदनहीन दोस्त के पक्ष में सहानूभूति की हवा बनायी जा सके ।
.
मोदी के अंधभक्त शोसल मिडिया पर पोपाट मचा रहे है कि बिकाऊ मिडिया यह नही दिखा रहा वह नही दिखा रहा, लेकिन इस बात पर खामोश है कि दूरदर्शन जनता को इस मामले की सच्चाई क्यों नही बता रहा !!
.
मोदी ने चुनाव पूर्व मुस्लिम तबके में अपनी स्वीकार्यता बढाने के लिए सलमान से भाईचारा बढ़ाया था और टीवी केमरो के सामने पतंगे उड़ा कर यह सन्देश दिया था कि हिरण और वोटरों के शिकार में 'हम साथ साथ है' ।
.
अब मोदी ने दूरदर्शन को आदेश दिया है कि :
1. टीवी पर यह नही दिखाया जाए कि सलमान नशे में धुत्त होकर खुद गाड़ी चला रहा था ।
2. कि लोगो को कुचलने के बाद सलमान घटना स्थल से भाग गया था, और उसकी रक्त जांच घटना के 12 घंटे बाद की गयी । ( उसके रक्त में फिर भी शराब की मात्रा पायी गयी थी )
3. कि सलमान तंग गलियों के बावजूद 100 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से गाड़ी दौड़ा रहा था ।
4. कि उसके बॉडी गार्ड विनोद पाटिल ने अपने बयान में कहा था कि सलमान नशे में था और मैंने कई दफा सलमान को गाड़ी न चलाने के लिए कहा लेकिन वह नही माना ।
( सलमान के खिलाफ गवाही देने वाले मुंबई पुलिस के इस सिपाही को बाद में सस्पेंड कर दिया गया तथा बेहद तंगी के हालात में 2008 में विनोद की मृत्यु हुयी )
.
समाधान : राईट टू रिकाल दूरदर्शन अध्यक्ष के कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित करने से इस तमाशे का अंत किया जा सकता है । मौजूदा व्यवस्था में दूरदर्शन अध्यक्ष की नियुक्ति पीएम करता है अत: वह पीएम के हितो के लिए कार्य करता है और उसी के आदेशो का पालन करता है ।
प्रस्तावित क़ानून लागू होने से दूरदर्शन अध्यक्ष भारत के करोड़ो नागरिको द्वारा चुना जाएगा तथा नागरिक उसे कभी भी मतदान द्वारा नौकरी से निकाल सकेंगे । इस से दूरदर्शन जो कि जनता के पैसो से चलता है, वास्तविक अर्थो में जनता के लिए कार्य करने लगेगा और हमें सच्ची खबरे मिलने लगेगी ।
(प्रस्तावित ड्राफ्ट का लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें )
tinyurl. com/RtrDdAdhyaksh
……
यदि भारत में ज्यूरी सिस्टम लागू होता तो सलमान 8 अक्टूबर 1998 में हिरण मारने जंगल में नही जाता, यदि जाता तो मुंबई लौटकर 2006 में आता, क्योंकि दिसंबर 1998 में ही उसे 6 साल की सजा हो चुकी होती ।
इस तरह फुटपाथ पर गाड़ी चढ़ाने का उसे अवसर नही मिलता ।
.
सलमान ने 1998 में हिरण मारे थे, जिसके लिए उसे 2006 में शेषन कोर्ट ने दोषी पाया किन्तु हाईकोर्ट ने उसकी सजा पर रोक लगा कर जमानत दे दी, (किसी व्यक्ति की एतिहासिक जड़े खोदने में माहिर मिडिया इस मुद्दे को भुला बैठा है) अब हिट एंड रन मामले में फिर से इसी क्रम को दोहराया गया है । एक अपराधी को फिर से दूसरा अपराध करने के लिए खुला छोड़ दिया जाता है ताकि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दशको तक मुकदमा घसीटता रहे ।
.
इस समस्या का समाधान ज्यूरी सिस्टम है । ज्यूरी प्रथा में किसी भी मुकदमे की सुनवाई नागरिको की ज्यूरी द्वारा की जाती है तथा नागरिको द्वारा ही फैसला सुनाया जाता है । अमेरिका में ज्यूरी प्रथा होने से मुकदमो का फैसला आम तौर पर 7 से 15 दिन के भीतर आ जाता है जिससे अपराधी हतोत्साहित होते है ।
.
आखिर भारत में ज्यूरी प्रथा क्यों नही है ?
क्योंकि मोदी, बीजेपी, सोनिया, कोंग्रेस, आरएसएस समेत सभी राजनेतिक दल तथा संगठन ज्यूरी प्रथा का विरोध कर रहे है ।
.
सलमान के मामले में भी आप इन सभी राजनेतिक दलों, आरएसएस, पेड मिडिया, एनजीओ, बुद्धिजीवियों आदि के रुख को देख सकते है । ये सभी हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन कर रहे है और नागरिको को ज्यूरी सिस्टम के बारे में जानकारी नही दे रहे है ।जहां तक इनके अंधभक्तो का प्रश्न है, उनके लिए इनके नेता उस मुर्गे की तरह है, जिसके बांग मारने पर ही उन्हें सवेरा होने का अहसास होता है ।
.
पिछले 50 वर्षो से कोंग्रेस लगातार ज्यूरी सिस्टम का विरोध और भ्रष्ट, सुस्त जज सिस्टम का समर्थन कर रही है और मोदी भी इस मुद्दे पर गले गले पानी तक उनके साथ खड़े है ।
.
समाधान : नागरिको को अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा आदेश भेज कर ज्यूरी प्रथा के क़ानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित करने की मांग करनी चाहिए ।
tinyurl .com/JurySys
( ड्राफ्ट का लिंक कमेंट बॉक्स में देखे )
……
क़ानून से तो लोगो का विश्वास पहले से ही उठा उठाया है, यदि सलमान को सजा हो जाती तो लोगो का विश्वास रुपयों से भी उठ जाता ।
.
भारत में यह मानी हुयी बात है कि रूपये की ताकत से सब कुछ ख़रीदा जा सकता है । न्याय भी ।
सभी लोग येन केन प्रकारेण बेतहाशा पैसा जोड़ने में लगे हुए है, ताकि दौलत के बल पर अपनी चवन्नी चला सके ।
सेशन द्वारा सजा सुनाने के बाद तुरंत हरकत में आये हाईकोर्ट जज ने सलमान को जमानत देकर इसीलिए उनकी सजा पर रोक लगा दी, ताकि लोगो का विश्वास रूपये की ताकत में बना रहे और लोग मनमर्जी चलाने के लिए ज्यादा से ज्यादा रूपये कमाने में दिन रात जुटे रहे ।
.
जब भी ऐसे किसी हाई प्रोफाइल मुकदमे में आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाया जाता है, तब बरी कराने का श्रेय होशियार और दिग्गज वकीलों के मत्थे मढ़ दिया जाता है, ताकि जज को निंदा आलोचना से बचाया जा सके । इस बार यह सौभाग्य हरीश साल्वे को मिला है । 90 के दशक के बाद इस दलाली ने अपने पंख फैलाने शुरू किये थे और भ्रष्ट जजों से अपने गठजोड़ो के चलते कई वकीलों ने राजनीति के क्षेत्र में ऊँची छलांगे लगायी । जबकि सच्ची बात यह है कि वकील की होशियारी इसमें निहित है कि वह जज से सांठ गाँठ करने में कितना होशियार है ।
.
समाधान यह है कि ऐसे सभी मुकदमो में आरोपी और संदिग्ध का नागरिको की ज्यूरी द्वारा सार्वजनिक रूप से नार्को टेस्ट* लिया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके ।
(*नार्को टेस्ट में अभियुक्त या गवाह को सोडियम पेनथोंल नामक रसायन का इंजेक्शन देकर उससे पूछताछ की जाती है । इस रसायन के असर से नीम बेहोशी की हालत में सभी प्रश्नों के सही जवाब देने लगता है )
.
लेकिन भारत में नार्को टेस्ट की प्रक्रिया को लागू करने का कोंग्रेस, बीजेपी, सपा, बसपा, आम पार्टी, सभी जज, धनिक वर्ग, पेड पत्रकार और सभी बुद्धिजीवी विरोध कर रहे है । सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया है कि नार्को टेस्ट सिर्फ अभियुक्त की अनुमति से ही किया जा सकता है । जाहिर है कोई भी व्यक्ति खुद के पाँव पर कुल्हाड़ी मारने के लिए नार्को टेस्ट की अनुमति नही देगा ।
.
नार्को टेस्ट का प्रस्तावित ड्राफ्ट जिसे गेजेट में प्रकाशित करने की हम मांग कर रहे है :
tinyurl .com/NarcoJury
( ड्राफ्ट का लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें )
……
न्याय में देर ही अंधेर है !!
किसी शक्तिशाली शख्शियत के खिलाफ किसी गवाह से आप कितने वर्षो तक टिके रहने की उम्मीद करेंगे । पूरे प्रकरण में रविन्द्र पाटिल की निष्ठा को भुला दिया गया, जो सलमान जैसे पहाड़ के सामने लगातार टिका रहा किन्तु अपनी जान देने तक भी उसने अपना बयान नही बदला । इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है कि मुंबई के जल में रह कर सलमान जैसे मगर से बैर पालने में गवाहों का कितना क्या क्या लगा होगा । बयान बदलने पर सलमान की कृपा से आसानी से 10-20 करोड़ रूपये और बेशुमार नियामतो की बारिश हो सकती थी ।
.
इस प्रकरण पर बोलीवुड के रीढ़ विहीन सामंत अपनी बदजुबानी पर उतर आये है । बीजेपी सांसद हेमा का कहना है कि वे ईश्वर से सलमान को कम सजा होने की प्रार्थना कर रही थी, ( जाहिर है ऐसा बयान उन्होंने मोदी के आदेश पर दिया ) , गायक अभिजित फूटपाथ को कुत्तो के सोने की जगह बता रहे है, जबकि फराह खान ने दुर्घटना का दोष फूटपाथ पर सोने वालो के मत्थे डाल दिया है ।
जबकि उन्हें यह प्रश्न मोदी से पूछना चाहिए कि इतने विशाल भू भाग वाले देश में नागरिको को फूटपाथ पर क्यों सोना पड़ता है । कारण यह है कि भारत में वेल्थ टेक्स नही है, इसलिए जमीनों की कीमते आसमान छू रही है ।
.
लेकिन सलमान के रिहा होने पर जश्न मना रहे सलमान और मोदी के अंधभक्त बजाय वेल्थ टेक्स की मांग करने के यदि कल फूटपाथ पर सो रहे नागरिको को कोड़े लगा कर खदेड़ने लगे तो आश्चर्य नही होना चाहिए, क्योंकि वे लोग फूटपाथ पर सोकर मोदी के अनन्य मित्र की गाड़ी के निचे आकर उनके भगवन को तकलीफ पहुंचा रहे है ।
.
(वेल्थ टेक्स ड्राफ्ट का लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें)
.
राईट टू रिकाल ग्रुप प्रस्तावित कर रहा है कि मुंबई की मतदाता सूची में से रेंडमली 1500 नागरिको का चयन करके ज्यूरी बुलाई जाए, तथा यह ज्यूरी इस मुकदमे की सुनवाई करे । इस तरह से त्वरित और निष्पक्ष रूप से इस मामले का निस्तारण हो सकेगा तथा न्यायिक प्रक्रिया के नाम पर विगत 13 साल से चल रहे सर्कस का अंत होगा ।
________________
राईट टू रिकाल ग्रुप @pk