Pawan Jury BhilwaraRj

हम हजारो जिंदगियाँ रोड़ एक्सीडेंट में हर साल गवां रहे है, सैकड़ो किसान हर वर्ष आत्म हत्या करते है, हर सर्दियों में कई सौ लोग ठण्ड से अकड़ कर फुटपाथ पर मर जाते है, भुखमरी से मरने वालो का कोई हिसाब ही नहीं है, कन्या भ्रूण हत्या, क़त्ल, लूट अपहरण आदि आम बात है, हर साल किसी न किसी धार्मिक आयोजन में भगदड़ से यात्री मरते रहते है ।
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ये सब अव्यवस्थाएं हर वर्ष भूकम्प, बाढ़, भूस्खलन से ज्यादा लोगो को लील रही है, क्योकि कार्यकर्ताओ/नागरिको के पास देश के क़ानून सुधारने की फुर्सत नही है । लेकिन प्राकृतिक आपदाएं आते ही जागरूक मानवता वादियों में सेवाकर्म के वलवले उठने लगते है ।

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