Pawan Jury BhilwaraRj

मौजूदा जुवेनाइल एक्ट के साइड इफेक्ट
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गाँव - महाराजपुर, जिला - साहिबगंज, झारखंड ।
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इस गाँव में लगभग सभी किशोरों के पास कीमती मोटर बाइक्स, महंगे मोबाइल है, महिलाओं के पास पर्याप्त आभूषण है तथा अच्छी खासी सम्पन्नता पूरे गाँव में बिखरी पड़ी है । ज़्यादातर बच्चों को माँ बाप स्कूल नहीं भेजते बल्कि यह सिखाने के लिए उस्तादों के पास भेजते है कि ताले कैसे तोड़े जाते है, तथा जेब कैसे काटी जाती है ।
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माँ बाप अपने बच्चों को उस्तादों के हाथ 2 से 3 लाख सालाना की दर से ठेके पर दे देते है, या खुद ही उन्हें लूट और चोरी का प्रशिक्षण देते है । प्रशिक्षण के बाद इन्हें दिल्ली और नोएडा ले जाया जाता है, ताकि इनसे अपराध कराये जा सके । यदि कोई किशोर पकड़ा जाता है तो गाँव से उनके माँ बाप उनके जुवेनाइल होने के दस्तावेज लेकर दिल्ली जाते है, और उन्हें छुड़ा लाते है ।
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सिर्फ नोएडा में ही एक साथ 15 बच्चों के पकड़े जाने पर इन पर शुबहा हुआ और यह कहानी सामने आयी ।
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इस गाँव और इन्हें संचालित करने वाले गिरोह का टर्न ओवर करोड़ो में है । यही बच्चे तथा किशोर युवा होने तक पेशेवर, खुदमुख्तार और अपराधी बन जाते है ।
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ज्ञातव्य है कि जुवेनाइल एक्ट के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों को बच्चा माना जाता है, अत: कितनी भी दफा और कितने भी संगीन अपराध के लिए भी अधिकतम 3 वर्ष के लिए बाल सुधार गृह ही भेजा जा सकता है । अत: जोखिम कम होने से अपराध करने को प्रोत्साहन मिलता है ।
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इसी क्रम में गौरतलब है कि निर्भया काण्ड के मुख्य आरोपी की अपराध के समय आयु 17 वर्ष 6 माह थी, अत: दिसम्बर 2015 में उसे बाल सुधार गृह से रिहा कर दिया जाएगा ।
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वाजपेयी सरकार के दौरान क़ानून मंत्री रहे अरुण जेटली ने जुवेनाइल की आयु को 16 वर्ष से संशोधित कर 18 वर्ष कर दिया था । तब से 16 से 18 के बीच की वय के किशोरों द्वारा अपहरण, बलात्कार, लूट, चोरी, लव जेहाद, आतंकवाद और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधो में भारी वृद्धी हुयी है । राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के अनुसार जुवेनाइल अपराधो में 2012 से 2013 के बीच 160% की वृद्धी दर्ज की गयी है ।
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स्वतंत्र कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही मांग के चलते मेनका गांधी ने इसमें संशोधन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसे मोदी साहेब के निर्देश पर दो सदस्यीय स्टेंडिंग कमिटी ने खारिज कर दिया । बहरहाल सरकार ने इस क़ानून में संशोधन को खारिज कर दिया है ।
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लफ्फाज़, दार्शनिक, सैद्धान्तिक और उपदेशात्मक समाधान यह है कि सोच सुधारने के लिए मन की बात तथा इस तरह के उपदेशात्मक व्याख्यान शिविर देश भर में आयोजित किये जाए, ताकि लोगो की सोच सुधरे ।
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वास्तविक, कानूनी समाधान :

अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा ऑर्डर भेजे कि जुवेनाइल एक्ट में संशोधन किया जाए ।
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SMS का नमूना कमेन्ट बॉक्स में देखें ।
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SMS भेजने के बाद यदि आप मोमबत्तियां जलाने, अनशन धरने टीवी बहसों में थुक्का फजीहत ,सोशल मिडिया पर शेयर फॉरवर्ड लाइक कमेन्ट इत्यादि करने का उपक्रम करते है तो उसके मायने होंगे ।

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