Pawan Jury BhilwaraRj

स्थान : प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का शयन कक्ष
दिन : 23 मार्च 2015
समय : 1 am
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मोदी साहेब : (चौंकते हुए ) कौन.. ? कौन है वहां ?

आवाज : मैं हूँ.. भगत
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मोदी साहेब : कौन भगत ??

आवाज : मैं भगत सिंह संधू , पंजाब से, जिसे 23 मार्च 1931 को फांसी दी गयी थी ।
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मोदी साहेब : एं...आप यहाँ । मेरा प्रणाम स्वीकार करिए । बीजेपी शहीदों का बहुत सम्मान करती है । मै स्वयं सदा से ही क्रांतिकारियों के ....

भगत : ठीक है ठीक है.. । मैं एक विशेष प्रयोजन से आपके समक्ष उपस्थित हुआ हूँ ।

मोदी साहेब : आप आदेश करिए, हम आपकी इच्छा के लिए अपना..

भगत : अच्छी बात है । मैं चाहता हूँ कि आप मेरी उस मांग को स्वीकार करें, जो मैं ब्रिटिश शासन से भी कर रहा था, और आज भी कर रहा हूँ ।
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मोदी साहेब : ऐसी कौनसी मांग है, जो इतने वर्षो से लंबित है.. !! ओह, कहीं आप राईट टू रिकाल कानूनों के लिए तो नहीं कह रहे है ?

भगत : बिलकुल, हमने 1925 में HSRA का मेनिफेस्टो प्रकाशित किया था, जिसमें हमने इन कानूनों की मांग की थी ।
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मोदी साहेब : देखिये भगत जी, ऐसे क़ानून गेजेट में प्रकाशित करना मेरे बस की बात नही । सारे सांसद, विधायक, धनिक, नौकरशाही आदि सभी मेरे खिलाफ हो जायेंगे और मुझे कुर्सी से हाथ धोना पड़ेगा । आप समझदार व्यक्ति है, सब समझते है । मैं एक अदना सा नेता हूँ, क्रांतिकारी नहीं ।
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भगत : मैं जानता हूँ ऐसे क़ानून जनदबाव से ही लाये जा सकते है, और देश में कुछ मुट्ठी भर नागरिक आज भी यह जानकारी फैलाने का कार्य कर रहे है, किन्तु आप के बारे में कुछ और ही सुना था इसीलिए टटोलने चला आया ।
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मोदी साहेब : नही नही, आप मुझे गलत समझ रहे है, मैं स्वयं राईट टू रिकाल में मानता हूँ, किन्तु..

भगत : ठीक है, तो कम से कम इतना कीजिये कि मुझे श्रन्धांजलि देने की जगह, यह बयान जारी कीजिये कि भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और सान्याल जी ने राईट टू रिकाल कानूनों की मांग की थी । ताकि यह जानकारी करोड़ो नागरिको तक पहुंचे कि हमने अपनी जान किस मिशन के लिए कुर्बान की थी ।
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मोदी साहेब : माफ़ कीजिये, लेकिन ऐसा करने से तो अगले ही दिन आप में मानने वाले सभी लोग इन कानूनों की मांग करने लगेंगे...
आप कहें तो मैं जंतर मंतर पर आपकी सरदार पटेल से भी ऊँची प्रतिमा लगवां दूं ?

भगत : आपको मेरे समर्थन का स्वांग भरने की कोई आवश्यकता नही । मैं उस ब्रिटिश शासन को भी समर्थन देने से नही हिचकूंगा जो कि राईट टू रिकाल से युक्त हो, और उस स्वराज्य का भी विरोध करता हूँ जो जिसमे नागरिको के पास अपने प्रतिनिधियों को वापिस बुलाने का अधिकार न हो । मुझे राईट टू रिकाल विहीन स्वराज, लोकतंत्र या आजादी कुछ भी मंज़ूर नहीं । मालूम हुआ, आप भी उन व्यक्तियों की श्रेणी में है जो जाहिर में मेरी शहादत पर आँसू बहाते है, किन्तु मेरे सिद्धांतो की हत्या करके अपना मंतव्य सिद्ध करते है ।
चलता हूँ.. और हाँ, इस फेर में न रहिएगा कि आप की बिरादरी के किये ही सब कुछ होगा... देश में कई भगत और उधम आज भी विचरते है ।
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a tribute to mahatma bhagat, mahatma rajguru and mahatma sukhdev.
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