Pawan Jury BhilwaraRj
सरकार सभी दलों की सहमती से ऐसा क़ानून लाने की तैयारी में है जिसके लागू होने से सभी दल मिलजुल कर सरकार बना सकेंगे या फिर राष्ट्रपति शासन लागू होगा ।
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राईट टू रिकाल ग्रुप यह मांग कर रहा है कि यदि नेता भ्रष्टाचार करता है, तो जनता के पास किसी भी समय उसे नौकरी से निकालने का अधिकार हो, जबकि राजनेतिक दल यह तय करने में लगे हुए है कि पांच साल से पहले उन्हें जनता की सूरत किसी भी हाल में न देखनी पड़े ।
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संसदीय सीमिति ने पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करवाने का प्रस्ताव किया है, जिस पर 18 राज्यों की सरकारे राजी है ।
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तात्कालीन व्यवस्था यह है कि, सभी राज्यों और केंद्र में स्वतंत्र रूप से चुनावी प्रक्रिया अपनाई जाती है । यदि राज्य या केंद्र सरकारों में किसी पार्टी को बहुमत न मिले तो, पार्टियाँ गठबंधन कर के सरकारों का गठन कर लेती है । किन्तु जब गठबंधन टूट जाता है, तो या तो मध्यावधि चुनाव होते है, या फिर राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है । पश्चात सुविधा के अनुसार चुनाव आयोग अमुक राज्य या केंद्र में चुनाव संपन्न कराता है ।
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उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति शासन को लोकतंत्र का निलम्बन माना जाता है, अत: सम्बंधित राजनेतिक दल और कार्यकर्ताओं द्वारा जल्दी चुनाव कराने की मांग की जाती है ।
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अब राजनेतिक दल यह सुनिश्चित करना चाहते है कि उन्हें 5 वर्ष से पहले जनता के बीच वोट मांगने नही जाना पड़े । इसके लिए सभी राजनेतिक दल सहमती बनाने की तैयारी में है ।
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नयी व्यवस्था के तहत निम्न फार्मूले सुझाए जा रहे है :
1. 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ 12 राज्यों में चुनाव होने हैं। जबकि यूपी का चुनाव 2017 में है। इसे एक साथ कराने के लिए 2017 में यूपी सरकार के कामकाज पूरा होने पर दो साल तक सर्वदलीय सरकार काम करे, फिर 2019 में चुनाव हो।
2. 2020 में 4 राज्यों में ही चुनाव है। उन्हें एक साल पहले कराया जाए।
3. 7 राज्यों में 2018 में चुनाव होने हैं। लोकसभा के साथ 12 राज्यों के चुनाव एक साल पहले करा लिए जाएं।
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अगर किसी राज्य या केंद्र में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिले तो प्रस्ताव किया जा रहा है कि :
1. सभी दल मिलकर मिलीजुली सरकार बनाए ।
2. सभी दल मिलकर अनिवार्य तौर पर सर्वदलीय सरकार बनाएं
3. या अगले चुनाव तक राष्ट्रपति शासन लगा रहे।
4. बीच में विधानसभा भंग होने पर भी सरकार चलाने की यही व्यवस्था लागू हो।
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मतलब सरकार बनाने की कानूनी 'मजबूरी' के चलते कोंग्रेस बीजेपी सपा बसपा लेफ्ट आदि सभी दल मिलकर सरकार बना सकेंगे । जिसके पास जितने विधायक सांसद होंगे उन्हें उस प्रकार से सत्ता में भागीदारी दे दी जायेगी । जवाबदेही में गिरावट आएगी, एजेंडे खुले तौर पर गड्ड मड्ड हो जायेंगे, एक नयी प्रकार की जमात का जन्म होगा जो 5 वर्ष में एक बार जनता को शक्ल दिखाएँगे, और बाकी सब चीजे संसद में आपस में बैठ कर तय कर लेंगे ।
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ज्ञातव्य है कि हाल ही में चुनाव आयोग ने सिफारिश की है कि, निर्दलीय उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने को निर्बन्धित किया जाए, और अब ये क़ानून लाने के मंसूबे बांधे जा रहे है ।
जाहिर है, सभी राजनेतिक दल इस बात पर सहमत है, कि नये उम्मीदवारों और पार्टियों को चुनाव लड़ने से बेदखल किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि नागरिको की भागीदारी चुनावी प्रक्रिया में कम से कम रहे ।
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समाधान यह है कि नागरिक राईट टू रिकाल कानूनों की मांग करे, ताकि राजनेतिक दलों में अपनी नौकरी खोने का भय बना रहे । राईट टू रिकाल कानूनों के होने से पार्टी व्यवस्था कमजोर हो जायेगी, जनप्रतिनिधियों में जवाबदेही बढ़ेगी, राजनेतिक दलों का एकाधिकार कमजोर होगा और सभी नेता कार्यकुशल हो जायेंगे ।
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