Pawan Jury BhilwaraRj

किराए की कोख :

मोदी साहेब ने रेलवे में 75 से 100% FDI की अनुमति दे दी है
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मधेपुरा और महरोरा में रेल कारखानों में अब विदेशी कम्पनियां इंजन और डब्बे बनाएगी । भारतीय रेल का इसमें हिस्सा 0% से 25% रहेगा ।
विदेशी कम्पनियां जो निवेश करेगी उनके कमाए गए रूपये का डॉलर हमें देना होगा । हम पहले से ही डॉलर के कर्जे में डूबे हुए है, अब स्थिति और बदतर हो जायेगी ।
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हम अभी राजधानी, शताब्दी और दुरंतो के इंजन इम्पोर्ट कर रहे है, जिन्हें कि भारत में भी बनाया जा सकता है । किन्तु डिब्बे और पटरियां हम खुद ही बना रहे है, अत: हमें डॉलर सिर्फ इंजन के लिए ही खर्च करने होते है । अब डिब्बे पटरियां और अन्य उपकरण भी विदेशी कम्पनियां बनाएगी तो हमें तिहरा नुक्सान होगा । क्योंकि कंपनी जो मुनाफा कमाएगी उनका हमें डॉलर देना होगा । लेकिन हमारे पास डॉलर छापने की मशीने नही है, हम पहले से ही काफी कर्जे लेकर खा चुके है, और हमारा निर्यात भी गिर रहा है । परिणामस्वरूप हमें कर्जे चुकाने के लिए अपने खनिज और प्राकृतिक संसाधन विदेशियों के हाथो बेचने होंगे ।
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भारतीय रेल आइन्दा के लिए इंजन तथा अन्य तकनिकी उपकरणों के विकास की क्षमता खो देगी, जिससे हम रेल जैसे विषय में भी आत्मनिर्भरता खो देंगे । क्योंकि विदेशी कम्पनियाँ मोनोपोली स्थापित करने के लिए हमारे नेताओं, नौकरशाहो और न्यायलयो को घूस देकर प्रतिस्पर्धी संस्थानों को तबाह कर देगी । ऐसा करने के लिए उन्हें भ्रष्ट नेताओं की जरुरत है, और हमारे नेता आदि कितने ईमानदार है यह विचार करने का भी विषय नही है ।
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भारतीय रेल अब भारतीय रेल नही रह जायेगी, हम मेक इन इण्डिया के नाम पर अपनी रेल बेच रहे है, जो कि शर्मनाक है ।
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करीब डेढ़ सौ साल पहले ब्रिटिश यहाँ रेल लेकर आये थे, 1947 में हमने कहा कि अपना देश हम खुद चलाएंगे । हमने राष्ट्रीय गर्व के प्रतीक 'मेड इन इंडिया' का नारा बुलन्द किया, किन्तु हमारे 56 इंची सीना धारको ने 'मेक इन इंडिया' के नाम पर फिर से विदेशियों को रेल का कारोबार संभालने के लिए बुला लिया है ।
यह बात समझ से बाहर है कि हमें किस पर गर्व करना चाहिए और किस पर शर्मिंदा होना चाहिए ।
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'भारत में क्षमता है' का नारा लगाने वाले सभी राजनेतिक दलों और शीर्ष नेताओं ने हमेशा उन कानूनों का विरोध किया है, जिससे भारत अपने बूते तकनिकी विकास कर के आत्मनिर्भरता हासिल कर सके । यदि हम वेल्थ टेक्स, ज्यूरी सिस्टम और राईट टू रिकाल कानूनों को लागू करते है, तो भारत दुनिया की हर वो चीज बना सकता है जो कि दुनिया के अन्य देश बनाते है । किन्तु मोदी-मनमोहन से लेकर सोनिया-केजरीवाल तक सभी नेता इन कानूनों का विरोध कर रहे है ताकि ताकत सत्ता प्रतिष्ठानों के हाथ में रहे ।
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ज्यूरी सिस्टम और राईट टू रिकाल कानूनों के अभाव में हम लगातार तकनिकी क्षमता खो रहे है और हमारी सेना कमजोर हो रही है । रेल, हाईवे, टीवी, कम्पूटर, मोबाइल, पावर प्लांट यहाँ तक कि दोयम दर्जे के हथियारों के लिए भी हम विदेशियों पर निर्भर है, और यह निर्भरता लगातार बढ़ रही है । हम रेल और कारो के इंजन विदेशियों से बनवा रहे है, इसलिए फाइटर प्लेन का इंजन बनाने के बारे में सोचते भी नही है । बनाना तो दूर की कौड़ी है ।

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कार्यकर्ताओं और नागरिको को चाहिए कि शासन से वेल्थ टेक्स, ज्यूरी सिस्टम तथा राईट टू रिकाल कानूनों की मांग करे जिससे भारत खुद तकनीक का विकास कर आत्मनिर्भर बन सके ।

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