Pawan Jury BhilwaraRj
क्षमा कीजिये, आपके फोन में आउट गोइंग कॉल की सुविधा नहीं है !!!
यदि नेता कुछ कहना चाहता है तो रेली कर देता है, साक्षात्कार दे देता है, प्रेस कोंफ्रेंस बुला लेता है, टीवी बहस में हिस्सा ले लेता है, संसद में भासण कर देता ।
जनता यदि सुनना चाहे तो सुनना है, और न सुनना चाहे तो भी सुनना है । जब नही सुनना है, तो भी नेता ने सुनाना है तो सुना ही देता है ।
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लेकिन यदि जनता ( यहाँ जनता से आशय करोड़ो नागरिक है, न कि एक या मुठ्ठी भर व्यक्ति ) अपने नेता से कुछ कहना चाहे तो जनता ( we the people ) के पास क्या विकल्प है ?
अनशन करो, धरने दो, प्रदर्शन करो, ( नेता उवाच - जनता हमारे साथ है )
पटरियां उखाड़ो, पुतले जलाओ, रास्ते जाम करो, ( नेता उवाच - यह विपक्ष की साज़िश है )
हस्ताक्षर अभियान चलाओ, सोशल मिडिया पर चीं चां करो, ज्ञापन दो ( अनाधिकृत और असंगठित तरीके )
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भारत में करोड़ो नागरिको के पास अपनी मांग स्पष्ट, अधिकृत, पारदर्शी, तथा सम्मिलित रूप से रखने की कोई शांतिपूर्ण और कानूनी प्रक्रिया नहीं है । ये एक तरफ़ा संवाद सत्ता को लाभ देता है जबकि नागरिको को नुकसान ।
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समाधान : हमें एक ऐसे क़ानून की आवश्यकता है, जिसके तहत नागरिको को यह अधिकार मिले कि :
यदि कोई भी नागरिक प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर कोई सुझाव, शिकायत या प्रस्ताव दर्ज करना चाहता है,तो उसे ऐसा करने दिया जाए ।
तथा यदि कोई भी नागरिक ऐसी किसी शिकायत, सुझाव या प्रस्ताव पर अपनी हाँ या ना दर्ज करना चाहता है तो उसे ऐसा करने दिया जाए ।
यदि करोड़ो नागरिक किसी शिकायत पर हाँ दर्ज कर देते है, तो प्रधानमन्त्री उस पर कार्यवाही कर सकते है ।
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राईट टू रिकाल ग्रुप ने ऐसी प्रक्रिया की रचना के लिए कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है, जिसे गेजेट में प्रकाशित करके इस क़ानून को भारत में लागू किया जा सकता है । यदि आप चाहते है कि आपकी आवाज अधिकृत, स्पष्ट और पारदर्शी ढंग से सरकार के समक्ष रख सके, और आपको अनशन धरने जाम प्रदर्शन ज्ञापन आदि से छुटकारा मिले, तो अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा इस क़ानून को गेजेट में छापने का आदेश देवें । हम इस क़ानून को टी सी पी ( ट्रांसपरेंस कम्प्लेन प्रोसीजर ) के नाम से पुकारते है ।
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टी सी पी क़ानून के ड्राफ्ट का लिंक और SMS का नमूना कमेन्ट बॉक्स में देखें ।
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राईट टू रिकाल ग्रुप @