Pawan Jury BhilwaraRj

क्या हमें सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विरोध करना चाहिए ?
नहीं ।
तो हमें कौनसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विरोध करना चाहिए, और क्यों ?
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माइक्रोसोफ्ट, मोटोरोला, इंटेल तथा इन जैसी सैकड़ो कम्पनियां औचित्य पूर्ण ढंग से संपत्तियों की रचना करती है, किन्तु कई भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ जिनमे कुछ भारतीय शीर्ष कम्पनियां भी शामिल है, बेंक, खनिज, इलेक्ट्रोनिक प्रिंट मिडिया आदि को कब्ज़े में लेने के एजेंडे पर कार्य करती है, जो कि भविष्य में देश की आर्थिक एवं सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर क्षति पहुचाती है । ऐसी कम्पनियां देश में सम्पत्तियो की रचना नहीं बल्कि उनका हरण करती है ।

यहाँ तक कि अच्छी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को भी संवेदनशील क्षेत्रो में व्यापार की अनुमति देना हमारी सुरक्षा व्यवस्था को गहरे जोखिम में डाल सकता है ।
उदाहरण के लिए, मान लीजिये कि हम एक अमेरिकी कंपनी नोर्टेल से संचार उपकरण आयात करते है तथा इन आयातित उपकरणों में ये विदेशी कम्पनियाँ जिन रेड़ियो रिसीवर का प्रयोग करती है, उन्हें सिग्नल भेजकर निष्क्रिय किया जा सकता है, तो अमेरिका से युद्ध के दौरान अमुक कम्पनी सिर्फ एक बटन दबा कर हमारे पूरे संचार नेटवर्क को ठप कर सकती है, जिससे हमारी सेना आपस के सम्प्रेषण से वंचित हो जायेगी और हमें युद्ध में हार का सामना करना पड़ेगा । इसीलिए उच्च तकनीक से सम्बंधित ऐसे उपकरण जिनसे कि हमारी सुरक्षा में सेंध लगाई जा सकती है, हमें किसी भी प्रकार की विदेशी कम्पनी से आयात करने से बचना चाहिए ।

अत: हमें ऐसी राजपत्र अधिसूचना की आवश्यकता है, जो कि व्यापार के लिए उन अच्छी कंपनियों को व्यापार की अनुमति दे जो कि रोजगार, सम्पति तथा समृद्धि की रचना करती है, न कि उन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को जो कि एकाधिकार स्थापित करके राष्ट्रीय संपदाओ को हड़प लेती है । साथ ही हमें ऐसी अधिसूचना की भी आवश्यकता है, जो यह सुनिश्चित करे कि अच्छी कंपनियों से होने वाले नुक्सान को भी कम किया जा सके ।

हमें बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण को कम करने के लिए क्या उपाय करने चाहिए ?

इसके लिए जरुरी है कि हम अपनी उत्पादकता और तकनिकी कुशलता को बढाए तथा यह भी सुनिश्चित करे कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के देश में बढ़ते प्रभाव को कम किया जा सके ।
हमारी उत्पादकता और ताकत बढाने के लिए हमें राईट टू रिकाल, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स, आदि कानूनों की आव्श्यकता है, जिससे हमारी न्याय व्यवस्था, पुलिस प्रशासन तथा राजनेतिक क्षेत्र की कार्यकुशलता में वृद्धि हो । साथ ही हमें ऐसे कानूनों की भी आवश्यकता है जो कि भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भारत में बढ़ते प्रभाव पर लगाम लगा सके ।

ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि, यदि हम बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को खदेड़ देते है, किन्तु ऐसे कानूनों को लागू नही करते है जिनसे हमारी सैन्य शक्ति बढ़े, तो अमेरिकी सेना के आक्रमण का हम सामना नही कर पायेंगे और हार जायेंगे । क्योंकि यह तय बात है कि, यदि हम बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देश में व्यापार के नाम पर लूटने की खुली छूट नही देते है, तो हमें उनकी सैन्य हमला झेलना पड़ेगा ।
उदाहरण के लिए मान लीजिये कि हम भ्रष्ट कम्पनियों को क़ानून बना कर देश से बाहर निकाल देते है, किन्तु जब इन कंपनियों के प्रोत्साहन से अमेरिकी सेना हमला करेगी तो हम इन्हें किसी भी क़ानून द्वारा नही रोक सकेंगे। ऐसी परिस्थिति में देश को सिर्फ स्वदेशी हथियार और सैन्य शक्ति ही बचा सकती है । यदि हमें स्वदेशी आधुनिक हथियारों का उत्पादन करना है तो हमें न्याय व्यवस्था और भ्रष्टाचार को दुरुस्त करने के लिए राईट टू रिकाल और ज्यूरी सिस्टम जैसे कानूनों की आवश्यकता है, अन्यथा इन कम्पनियों को रोकना हमें क्षणिक लाभ ही देगा ।