Pawan Jury BhilwaraRj

खनिजो की रोयल्टी से प्राप्त राशि का 65% हिस्सा सीधे नागरिको के खाते में जमा न करने का ही नतीजा है कि, जिंदल 108 रू प्रति टन की रोयल्टी अदा कर कोल ब्लोक ले उड़े ।
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यदि रोयल्टी का 65% नागरिको के खाते में जमा किया जाता तो सभी नागरिक इस नीलामी पर सवाल खड़े कर देते कि, क्यों जिंदल को 108 रू प्रति टन की दर से कोल ब्लोक दिया गया जबकि नीलामी की बोली आसानी से 1200 से 2000 प्रति टन तक जा सकती थी । क्योंकि कमतर कीमतों में कोल ब्लोक देने का सीधा नुक्सान यह है होता कि नागरिको को मिलने वाली राशि में कटौती हो जायेगी ।
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नागरिक कार्यकर्ता शीघ्र ही यह खोद निकालते कि कोयला मंत्री ने जिंदल को फायदा पहुंचाने और अन्य प्रतिस्पर्धियो को दौड़ से बाहर करने के लिए, ऐसे उट पटांग नियम लागू कर दिए थे, जिससे जिंदल के अलावा किसी अन्य के लिए बोली लगाने के अवसर ही ख़त्म हो जाए ।
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कोयला मंत्री ने नीलामी के लिए निम्नलिखित शर्ते लागू की

1. नीलामी में वही भाग ले सकेगा जिसका उस राज्य में ऊर्जा सयंत्र हो ।

2. इस ऊर्जा संयंत्र का निर्माण 50% फीसदी पूर्ण हो जाना चाहिए ।

3. ऊर्जा संयंत्र का राज्य सरकार से एग्रीमेंट पहले से हुआ होना चाहिए ।

( ओह, ये तीनो शर्ते तो सिर्फ जिंदल ही पूरी करते है,मतलब यदि आप जिंदल नही है तो आप को बोली में हिस्सा नही लेना चाहिए )

तमाशा यह कि, इन शर्तो के लिए सिर्फ एक ही कंपनी अर्हताएं पूरी करती थी, अत: एक ही कम्पनी ने बोली लगाने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया । मतलब कोल ब्लोक नीलाम किये नहीं, बल्कि हो गए है ।
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यदि कोल ब्लोक्स की नीलामी पारदर्शी तरीके से की जाती तो प्राप्त रोयल्टी की राशि 108 रू से बढ़कर 1500 रू प्रति टन जा सकती थी जिसका 65% हिस्सा यानी 1000 रू प्रति टन के हिसाब से नागरिको के खाते में जाने के बावजूद शेष 500 रू (35%) प्रति टन सरकार के खाते में जमा होते, किन्तु इस 1400 रूपये को सभी सांसदों, मंत्रियों, नौकरशाहो, मिडिया कर्मियों, जजों और जिन्दालो ने आपस में बाँट लिया है ।

असल में भारत की खनिज संपदाएं लावरिस खेत में लगे तरबूज है, जिन्हें इसके पहरेदार ही जब चाहे तोड़ कर फांके कर के आपस में बाँट लेते है ।
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मोदी साहेब ने सूट की नीलामी जिस पारदर्शिता से की कोल ब्लोक्स नीलामी भी उतनी ही पारदर्शिता बनाए रखने की जहमत उठाते, यदि नागरिको को यह जानकारी होती कि कोल ब्लाक से प्राप्त रोयल्टी नागरिको के खाते में जमा होने वाली है ।
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समाधान : DDMRCM क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करने से खनन से प्राप्त रोयल्टी का 65% नागरिको के खाते में जमा होने लगेगा, तथा शेष 35% सरकार को मिलेगा । इस क़ानून के आने से खनिजो की लूट और व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी तथा गरीबी कम होगी ।
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अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा ऑर्डर भेजे कि टी सी पी क़ानून को गेजेट में छापा जाए, ताकि करोडो नागरिको की सहमती से DDMRCAM क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जा सके । DDMRCM क़ानून का ड्राफ्ट यहाँ देखें :

tinyurl. com/NagrikAamdani
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टी सी पी क़ानून को गेजेट में छापने के sms आर्डर का नमूना कमेन्ट बॉक्स में देखें ।
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प्रजा अधीन राजा