Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब खनिजो की रोयल्टी राज्य सरकारों को देने की पहल कर रहे है, जिसके नतीजे में कुछ ही वर्षो में हमें दर्ज़न भर तेलंगाना देखने को मिल सकते है ।
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प्रजा अधीन राजा प्रस्ताव कर रहा है कि खनिजो से प्राप्त रोयल्टी सीधे नागरिको के खाते में जमा की जाए, जिससे नक्सलवाद, भुखमरी और खनन के क्षेत्र में व्याप्त भारी भ्रष्टाचार दूर हो । खनिज भारत देश के सभी नागरिको की मालिकाना संपत्ति है, अत: प्राप्त रोयल्टी का 65% सीधे नागरिको के खाते में तथा शेष सेना को दिया जाना चाहिए ।
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किन्तु बीजेपी, कोंग्रेस और आम पार्टी इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे है । जन धन योजना के तहत जो खाते खोले गए है, उनमे नागरिको के हिस्से की रोयल्टी जमा की जानी चाहिए ।
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कोल ब्लॉक में व्याप्त भ्रष्टाचार के पब्लिक डोमेन में उछलने के बाद सोशल मिडिया पर कार्यकर्ताओं ने कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए प्रचार किया जिससे सरकार को नीलामी की प्रक्रिया अपनाने को मजबूर होना पड़ा । जिसका श्रेय सोशल मिडिया के कार्यकर्ताओं को दिया जाना चाहिए, किन्तु सारा श्रेय कोर्ट और सरकार लूटने के लिए छटपटा रही है ।
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यह देखा गया है कि, जब भी स्वतंत्र कार्यकर्ता असंगठित रूप से किसी मुद्दे को लेकर मुहीम चलाते है, तो मुद्दे के उन्नयन पर नेता, पेड सामाजिक कार्यकर्ता, राजनेतिक पार्टियाँ और कोर्ट्स उन मुद्दों को हाइजेक कर के निष्पादन का श्रेय हथिया लेते है, और पेड मिडिया उनकी वाहवाही कर देता है । इससे कार्यकर्ताओं को वांछित संबल नही मिल पाता और इन सफ़ेद हाथियों की दुकाने चलती रहती है ।
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ऐसा इसीलिए किया जाता है, ताकि यह भ्रम खड़ा रहे कि, सभी प्रकार के परिवर्तन भारी भरकम संस्थाओं/नेताओं द्वारा ही लाये जा सकते है, जिस से नागरिको की आस्था इनमें बनी रहे, स्वतंत्र कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन नहीं मिले ।
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पूछा जाना चाहिए कि खनिजो की लूट दशको से जारी है, वाजपेयी के कार्यकाल से लेकर मनमोहन के कार्यकाल तक, किन्तु क्यों कभी बीजेपी या कोंग्रेस ने खनिजो की खुली नीलामी का क़ानून प्रस्तुत नही किया । सभी सरकारों ने खनिजो की बन्दरबांट विवेकाधिकार के तहत की ।
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इस विषय पर केजरीवाल जी का रुख एक हद तक स्पष्ट है कि, यदि खान अमेरिकी कम्पनियों को मिली जा रही है, तो खामोश बने रहो तथा लूटेरे अन्य कोई है, तो भ्रष्टाचार के नाम पर धाँ धूं मचा के मिडिया में हंगामा खड़ा कर दो । लेकिन केजरी जी ने भी खनिजो की नीलामी का कोई कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तुत नहीं किया है, और उल्टे वे खनिजो की रोयल्टी नागरिको के खाते में जमा करने का खुले आम विरोध कर रहे है ।
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मोदी साहेब ने भी नीलामी कुछ इस ढंग से की है कि, कहने को हो गया कि नीलामी हुयी है, जबकि पारदर्शिता को उन्होंने पास भी नही फटकने दिया जो कि नीलामी की पहली शर्त है ।
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छोटे तथा नए दावेदारो को खेल से पहले ही यह नियम लगाकर बाहर कर दिया गया कि नीलामी में उन्हें ही मौका दिया जाएगा जिन्हें पहले से खनन का अच्छा ख़ासा अनुभव है । इससे यह संभावना ख़त्म हो गयी कि नए खिलाड़ी आकर पहले से जमे जमाये बघियारो का खेल ऊँची बोली लगाकर बिगाड़ न दे ।
रही सही कसर ई-नीलामी ने कर दी । दो दर्जन कम्पनियों और मंत्रालयों के झुंड ने मिल बैठ कर तय कर लिया तथा इस प्रक्रिया को नीलामी कह दिया गया ।
पारदर्शिता, बोली तथा अर्हता की सत्यता परखने के लिए किसी प्रकार के दस्तावजो पर कोंफिड़ेंसियल का टेग लगा कर इति कर दी गयी ।
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नतीजे के रूप में मामला कुछ इस तरह निपटा कि, जहां मंजे हुए खिलाड़ी जिंदल 103 रू प्रति टन के हिसाब से कोल ब्लॉक ले उड़े वही बिड्ला जी जिस कोल ब्लॉक के 3300 रू प्रति टन के हिसाब से चुकाने होंगे, उन ब्लॉक्स में से भी वही कोयला निकलने वाला है, जो कि जिंदल जी के कोल ब्लॉक से निकलेगा ।
इस फार्मूले में π का मान क्या है, हमारी जानकारी में नहीं है ।
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कुल मिलाकर तमाशा क्रिकेट खिलाडियों की नीलामी से भी घटिया स्तर का रहा, जिसका कोई भी तमाशबीन नही था, सिवाय कोल ब्लॉक लेने और देने वालो के ।
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और रही बात मोदी-सोनिया-केजरी भक्तो की, तो इनकी नसों में नशा इतना गहरा उतर चुका है, कि इन्हें इनके नेताओं ने बोल दिया कि नीलामी हो गयी है, और इन्होने मान लिया कि नीलामी हो गयी है । किन्तु क्रिकेट खिलाडियों की नीलामी इन्हें इतनी महत्त्वपूर्ण लगती है, कि लाइव देख कर भी ये संदेह प्रकट करने से नही चूकते कि 'फिक्स था सब'।
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मोदी साहेब ने पूरे देश को सूट की नीलामी में फंसा कर कोल ब्लॉक नीलाम कर दिए । गाफिलो को सूट की रकम में ज्यादा इंटरेस्ट है, न की उस खनिज में जो कि उनके हिस्से का हक़ है, और औने पौने दामो में देश की छाती भेद कर निकाला जा रहा है ।
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समाधान के लिए हम DDMRCAM क़ानून का प्रस्ताव कर रहे है । जिसके गेजेट में प्रकाशित होने से :
1. हर जिले में जिला खनन अधिकारी होगा जिसे चुनने तथा भ्रष्ट आचरण करने पर हटाने का अधिकार क्षेत्र की जनता के पास होगा ।
2. राज्य स्तर पर भी खनन अधिकारी प्रजा अधीन होगा ।
3. भू गर्भ से निकाले गए सभी खनिजो तथा प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त रोयल्टी हर महीने सीधे नागरिको के खाते में जमा की जायेगी । इससे अनुमानत: हर नागरिक को 300-400 रू प्रति माह प्राप्त होंगे ।
4. प्राप्त रोयल्टी सभी 80 करोड़ नागरिको ( व्यस्क ) में समान रूप से वितरित की जायेगी ।
5. राष्ट्रीय, राज्य तथा जिला खनन अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि खनिजो की नीलामी जनता के सामने पारदर्शी तरीके से हो अन्यथा जनता उन्हें किसी भी समय मतदान के अधिकार का प्रयोग करके नौकरी से निकाल सकेगी ।
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इस क़ानून के लागू होने से खनन भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा, भुखमरी/गरीबी में कमी आएगी, विदेशी/देशी धनिको द्वारा की जा रही खनिजो की लूट पर रोकथाम लगेगी तथा इस कार्य कुशलता में जितनी ही वृद्धि होगी उतना ही पैसा आपके खाते में आएगा । यहाँ 'आप' से आशय वह व्यक्ति है, जो इस लेख को पढ़ रहा है ।
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यदि आप खनिजो की रोयल्टी का पैसा अपने अकाउंट में देखना चाहते है, तो अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा आदेश करे कि DDMRCAM का कानूनी ड्राफ्ट गेजेट में छापा जाए ।
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देश में सिर्फ प्रजा अधीन राजा समूह ही यह मानता है कि देश के प्राकृतिक संसाधनों पर करोडो नागरिको का मालिकाना हक़ है, अत: इस से प्राप्त रोयल्टी सीधे नागरिको के खातो में जानी चाहिए । .
कानूनी ड्राफ्ट का लिंक यहाँ देखे :
tinyurl. com/DDMRCAM
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SMS का नमूना कमेन्ट बॉक्स में देखे ।
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प्रजा अधीन राजा @ pk