Pawan Jury BhilwaraRj

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महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में काशी के सांसद काशी विश्वनाथ देवालय अपनी व्यस्तताओं के चलते नहीं पहुँच पाए किन्तु केरल में उस वेटिकन द्वारा आयोजित समारोह में तमाम व्यस्तताओं के बावजूद उपस्थित रहे जिस वेटिकन का मानना है कि संत सिर्फ इसाई धर्म में ही हो सकते है । असल में समारोह में दो संतो को 'संत' की उपाधि दी जानी थी, जिन्होंने इसाई धर्म की मान्यताओं के तहत सेवा कार्यो ( पढ़े - धर्मांतरण ) में सराहनीय प्रयास किये, तथा असाध्य रोगों को ईसू प्रदत चमत्कार ( पढ़े - अंधविश्वास ) से ठीक किया ।
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ज्ञातव्य है कि, संत की उपाधि सिर्फ उन्हीं को दी जाती है जिन्होंने अपनी शक्ति को प्रयोग करके कम से कम दो असाध्य बीमारियों को ठीक किया हो । इस चमत्कार की जांच के लिए पोप उस कार्डिनल कमेटी की नियुक्ति करता है जो कमेटी उन 500 डॉक्टर्स की कमिटी की नियुक्ति करती है, जिस कमिटी ने 'पुष्टि' करनी होती है कि क्या वाकई चमत्कार हुआ है या नही, इसी निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की गयी अनुशंषा पर संत की उपाधि प्रदान की जाती है ।
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पीएम बनने के बाद दिए गए इस 56 वें भाषण में मोदी साहेब ने स्पष्ट किया कि, हम धार्मिक आधार पर गोलबंद किसी भी संगठन ( पढ़े - आरएसएस ) की निंदा करते है, तथा प्रलोभन/दबाव से किये जा रहे किसी भी प्रकार के धर्मान्तर ( पढ़े - घर वापसी ) को बर्दाश्त नहीं करेंगे । इसके अलावा और भी इसी तरह की रूटीन बातें जो कि कोंग्रेस का ट्रेड मार्क रही है, तथा मिशनरीज़ के कानो को बहुत सुहाती है, जैसे - मानव धर्म श्रेष्ठ धर्म है, मिशनरीज़ सेवा कार्यो में अग्रणी है, सब धर्म समभाव है, हम सबका ( पढ़े - मिशनरीज़ ) विकास चाहते है जो कि सबके साथ ( पढ़े - हिन्दू ) से हो, हिन्दू धर्म सभी को आत्मसात कर लेता है, मैं आज ऐसे संतो ( पढ़े - इसाई संतो ) के सानीध्य में बहुत ही गौरान्वित महसूस कर रहा हूँ, आदि आदि ।
( कृपया पीएम की वेबसाईट पर जाकर पूरा भाषण पढ़े )
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मोदी भक्तो का कहना है कि, चूंकि काशी विश्वनाथ देवालय अब एजेंडे में नही है, अत: वहाँ जाने की कोई तुक भी नही है, किन्तु राम नवमी पर मोदी साहेब अमित शाह को अयोध्या अवश्य भेजेंगे ।

बहुत ही हिंदूवादी !!!

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प्रजा अधीन राजा