Pawan Jury BhilwaraRj
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संविधान को आम नागरिको ने लागू किया है, तथा उनकी इच्छा ही सर्वोपरि है , किन्तु संविधान क्या कहता है, इसकी व्याख्या सुप्रीम कोर्ट का विशेषधिकार है । मायने यह कि, संविधान में कुछ भी लिखा हो, उसका मतलब क्या है यह सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश ही निर्धारित करते है ।
सभी कानूनों की व्याख्या का अधिकार भी सुप्रीम कोर्ट के पास है ।
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सुप्रीम कोर्ट को पॉवर है, कि वह मिनट से पहले पीएम, सीएम को दोषी करार दे कर पद छोड़ने के लिए बाध्य कर सकता है, संसद द्वारा बनाए हुए कानूनों को खारिज कर के रद्दी में फेंक सकता है।
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कोर्ट की आलोचना करना भी न्यायलय की अवमानना है, अत: कोई व्यक्ति यदि कोर्ट के फैसले की निंदा करे तो कोर्ट उसे सलाखों के पीछे भेज सकता है ।
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सुप्रीम कोर्ट के न्यायधिशो को हटाने की प्रक्रिया पीएम, सीएम आम आदमी आदि किसी के पास नहीं है । वह इस वन के अगाध सिंह है ।
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सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशो को सिर्फ महाभियोग से हटाया जा सकता है, जो कि बेहद जटिल तथा दुरूह प्रक्रिया है ।
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निरंकुश न्यायधीश सुस्त और भ्रष्ट न्याय व्यवस्था को जन्म देते है, सुस्त न्याय व्यवस्था अपराधियों के हौसले को बढ़ावा देती है, दंड के अभाव में सारे क़ानून रद्दी साबित होते है और पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है ।
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समाधान
1. जूरी प्रथा : न्याय व्यवस्था को चुस्त और साफ़ सुथरा बनाने के लिए हमें जज प्रणाली की तरह जूरी प्रथा को लागू करना चाहिए ।
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जूरी प्रथा में प्रत्येक मुकदमे की सुनवाई के लिए मतदाता सूची में से 12-15 नागरिको का रेंडमली चयन किया जाता है, तथा नागरिको की यह ज्यूरी ही मुकदमो की सुनवाई करके फैसला देती है ।
प्रत्येक मुकदमे के लिए अलग ज्यूरी होने से मुकदमो के फैसले 15-20 दिन में आ जाते है तथा जज-वकील गठजोड़ की संभावनाएं समाप्त हो जाती है ।
अमेरिका ने अपनी न्याय व्यवस्था को निष्पक्ष और त्वरित बनाने के लिए इसी प्रणाली का उपयोग किया है ।
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2. प्रजा अधीन न्यायधीश : प्रजातंत्र में सर्वोच्च सत्ता प्रजा होती है अत: न्यायधीश भी प्रजा अधीन होने चाहिए, ताकि भ्रष्ट आचरण करने पर प्रजा मतदान द्वारा न्यायधिशो को नौकरी से निकाल सके ।
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प्रजा अधीन राजा समूह ने न्यायपालिका को स्वच्छ बनाने के लिए जूरी प्रथा तथा न्यायधीशो को प्रजा अधीन बनाने के लिए कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित किये है, जिन्हें गेजेट में प्रकाशित करने से भारत में निष्पक्ष, चुस्त और स्वच्छ न्यायपालिका की स्थापना होगी ।
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प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट यहाँ देखें :
tinyurl. com/jurysys
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यदि आप इन कानूनों का समर्थन करते है, तो अपने सांसद को SMS द्वारा निर्देश भेजें कि, जूरी प्रथा के क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए ।
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पुनश्च : जबकि भारत की अदालतों में 3 करोड़ मुकदमे लंबित है, बीजेपी कोंग्रेस तथा आम आदमी पार्टी पूरी ईमानदारी के साथ सम्मिलित रूप से जूरी प्रथा तथा प्रजा अधीन न्यायधीश के कानूनों का विरोध कर रहे है । स्पष्ट है कि उनकी रुचि न्यायिक सुधारों में नही है ।
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नोट : SMS प्रारूप के लिए कमेन्ट बॉक्स देखें ।
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प्रजा अधीन राजा @ pk