Pawan Jury BhilwaraRj
भूमि अधिग्रहण अध्यादेश द्वारा मोदी साहेब ने जो संशोधन किये है, उनके अनुसार रक्षा, सड़के, ग्रामीण विकास, ऊर्जा तथा औद्योगिक कोरिडोर से सम्बंधीत परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए उन नागरिको की सहमती आवश्यक नहीं होगी, जिनकी भूमि अधिगृहित की जा रही है ।
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ज्ञातव्य है कि बलात अधिग्रहण के चलते भूमिहीन हुए, लाखों किसानो/आदिवासियों के आन्दोलन के कारण यूपीए सरकार को 2013 में जो संशोधन करने पड़े उनके अनुसार अधिग्रहण के लिए 70-80% भूमि मालिको की सहमती अनिवार्य थी, लेकिन मोदी साहेब ने इस क़ानून को पलट दिया है ।
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औद्योगिक कोरिडोर को इस दायरे में रखना सबसे हानिकारक पहलू है। इस बिंदु की आड़ में MNCs और भारतीय धनिको को भूमि हथियाने के सहज अवसर उपलब्ध होंगे, और बड़े पैमाने पर धनिको द्वारा नागरिको को भूमि से वंचित किया जा सकेगा ।
देश का सबसे कीमती संसाधन भूमि है, जो कि प्रकाश, पानी और खनिजो को धारण करता है, ये अध्यादेश MNCs को गाँव के गाँव अधिगृहित करने में सक्षम बना देगा ।
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प्रजा अधीन राजा @ pk