Pawan Jury BhilwaraRj

भूमि अधिग्रहण क़ानून के चलते एमपी, यूपी, झारखंड, छत्तीसगढ़ में पिछले 10 वर्षो के दौरान 5 करोड़ लोग अपनी भूमि गँवा चुके है ।
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शायद कुछ ही लोगो को जानकारी है, कि इन भूमिहीन किसानो/आदिवासियों ने 2013 में दिल्ली की और महापड़ाव के लिए कूच किया था जिनकी संख्या 5-6 लाख थी । मध्य भारत से होते हुए पदयात्रियो का यह महारेला 2 माह बाद जब दिल्ली पहुंचा तो इन्हें दिल्ली की बाहरी सीमा पर रोककर इन्हें समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया ।
जैसा कि जाहिर है, पेड मिडिया ने इस खबर को कवरेज नही दी, क्योंकि ये सारी जमीन MNCs और उद्योगपतियों द्वारा नेताओं की मिलीभगत से हड़पी गयी है ।
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निदान : UPA सरकार एक अध्यादेश लाने को मजबूर हुयी जिसके अनुसार किसी भूमि के अधिग्रहण के लिए भूमि मालिको की कुल संख्या के 80% किसानो की सहमती आवश्यक होगी तथा इनके पुनर्वास, बसावट, सामाजिक सांस्कृतिक प्रभावों के निपटान के लिए परामर्श कमिटी का गठन होगा, जिसकी सकारात्मक रिपोर्ट के आधार पर ही अधिग्रहण होगा ।
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मोदी साहेब ने नया अध्यादेश लाकर इन दोनों प्रावधानों को निकाल दिया है, अत: सरकार अब इच्छा मात्र से ही, जितनी चाहे उतनी जमीन का अधिग्रहण कर के किसानो को बेदखल कर सकती है ।

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प्रजा अधीन राजा @ pk