Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
रिकौलिस्ट कृपया ध्यान दें ! एक महत्वपूर्ण प्रश्न !
.
मान लीजिये दस लाख कार्यकर्ता अस्सी करोड़ लोगों को राइट टू रिकॉल पुलिस कमिश्नर के ड्राफ्ट के बारे में जानकारी देते हैं. और उनमे से 60 करोड़ से अधिक लोगों को यह समझाने में सफल होते हैं कि वे सम्बंधित कानून- ड्राफ्ट (राइट टू रिकॉल पुलिस कमिश्नर के ड्राफ्ट) के यूआरएल के साथ अपने अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजें. मान लीजिये लगभग एक लाख कार्यकर्ताओं ने अपने फेसबुक स्टेटस में ड्राफ्ट को पोस्ट किया है, और प्रत्येक मतदाता उन एक लाख पोस्टों में से किसी एक के यूआरएल के साथ एसएमएस भेजता है. और प्रत्येक मतदाता ने केवल एक यूआरएल भेजा. अतः औसतन इनमे से प्रत्येक यूआरएल लगभग 8000 मतदाताओं द्वारा भेजा गया.
.
कृपया ध्यान दें- यह प्रश्न राइट टू रिकॉल (आरटीआर) की अवधारणा के विषय में नही है. यह यूआरएल के बारे में है. एक कार्यकर्ता- A ने तय किया कि वह मतदाताओं को यूआरएल- A के बारे में बताएगा. जबकि कार्यकर्ता- B ने तय किया कि वह मतदाताओं को यूआरएल- B के बारे में बताएगा. सभी 100,000 कार्यकर्ता स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं, उनमे आपस में बात- चीत तो हो रही है लेकिन कोई केंद्रीकृत संपर्क तथा केंद्रीकृत निर्णय की व्यवस्था नही है. ऐसी स्थिति में क्या कोई कारगर तरीका है जिससे कोई एक यूआरएल 45 करोड़ की सीमा पार कर सके?
.
कार्यकर्ताओं/ मतदाताओं को ऐसे कौन से तरीके अपनाने चाहिए जिसके द्वारा बिना किसी केंद्रीकृत निर्णय प्रणाली के एक यूआरएल 42 करोड़ की सीमा पार कर सके?