Pawan Jury BhilwaraRj

19 नवम्बर, कल पेड एनडीटीवी पर प्राइम टाइम के दौरान एक साधू और साध्वी का पूर्व नियोजित साक्षात्कार 'घटनास्थल' से प्रसारित किया गया । घटनास्थल से मायने एक तीन दिवसीय धरने के मंच से है, जहाँ आरामदेह गद्दों पर 25-30 साधु साफ़ एवं करीने से इस्तरी किये हुए एक जैसे चटख रंग के केसरिया वस्त्र पहने मंचासीन थे । अग्रिम पंक्ति में नेतृत्व कर्ता साधु महाराज शुभ्र और धवल वस्त्रो में विराजमान थे, जिनका कि साक्षात्कार प्रसारित किया गया ।
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मांग - ये गिरोह मांग कर रहा है कि कर्नाटक में अंधश्रद्धा निर्मूलन क़ानून पारित किया जाए । परन्तु झमेला यह है कि इनका मानना है ज्योतिष और वास्तुशास्त्र भी अंधश्रद्धा है, और इनसे सम्बंधित प्रकाशनों और व्यवहार को निषेध किया जाना चाहिए ।
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एंकर रविश कुमार इन्हें बार बार यह याद दिला रहे थे कि महाराष्ट्र में जो क़ानून पास हुआ, वो जादू टोना निषेध तक ही सिमट कर रह गया जबकि आन्दोलन अंधश्रद्धा निर्मूलन के लिए किया गया था । प्रकरांतर में नरेन्द्र दाभोलकर का भी स्मरण किया गया ।
ज्ञातव्य है कि डॉ दाभोलकर अमेरिका से प्राप्त चंदे से अन्धश्रधा निर्मूलन समिति का कारोबार करते थे, जिनकी हत्या पिछले वर्ष गोली मारकर कर दी गयी थी । यह संस्था भारत में हिन्दू धर्म को उखाड़ने के लिए कुछ कानूनों की मांग पिछले 20 वर्षो से कर रही है ।
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ध्वनित कुछ इस तरह हो रहा था कि रामपाल जैसे प्रकरणों का समाधान इस अंधश्रद्धा निर्मूलन क़ानून में निहित है । देश में बढ़ते स्वयंभू संतो, साधूओ, बाबाओं और उनके द्वारा बनाए जा रहे अड्डो नुमा आश्रमों को नियमित करने के लिए जूरी सिस्टम, राईट टू रिकाल तथा हिन्दू देवालय अधिनियम जैसे कानूनों की जरूरत है ताकि इन पर लोकमत का अंकुश लगाया जा सके। यदि नागरिक इन कानूनों की मांग अपने सांसदों से नहीं करते है तो मिशनरीज़ और MNCs को पेड मिडिया के माध्यम से यह भ्रम फैलाने का अच्छा अवसर मिलेगा कि बांसुरी की कर्कश ध्वनि से बचने का उपाय यह है कि बांस के व्यापार पर ही रोक लगा दी जाए ।
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[ अंधश्रद्धा निर्मूलन सिमिति के सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिए इस विषय पर राजीव भाई का व्याख्यान सुने । लिंक कमेन्ट बॉक्स में दिया गया है ]
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प्रजा अधीन राजा @ pk