Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
20000 रूपये प्रति माह से कम वेतन वाली सभी सरकारी तथा प्राइवेट नौकरियों पर स्थानीय मूल का निवासी होने का नियम लागू किया जाना चाहिए। ऑटो, टैक्सी आदि के लाइसेंस में, या उन्हें खरीदने में स्थानीय मूल निवास ही आधार होना चाहिए।
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महाराष्ट्र/ गुजरात में यूपी/ बिहार/ पश्चिम बंगाल की तुलना में अधिक रोजगार क्यों है? इसका सर्वप्रमुख कारण है--- कानून व्यवस्था। वरना यूपी/ बिहार/ पश्चिम बंगाल के पास भी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी, भूमि, जलवायु आदि सभी संसाधन पर्याप्त हैं।
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यदि हम मजदूरो (श्रम) का प्रवाह पूरे भारत में एक राज्य से दुसरे राज्य में होने दें तो हमारे सामने एक दुविधा उत्पन्न हो जाएगी--- जिन राज्यों की कानून व्यवस्था की स्थिति अच्छी है, जाहिर हैं उनकी ओर दूसरे राज्यों से पलायन कर के रोजगार की तलाश में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी, जिससे अनजाने में ही उस राज्य के स्थानीय युवाओं को नुकसान होगा !!!
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प्रत्येक राज्य में रोजगार की समस्या होती है। नागरिक ज्यूरी प्रणाली, संपत्ति कर, डीडीएमआरसीएएम, टीसीपी, राइट टू रिकॉल आदि अच्छे कानून ड्राफ्ट लागू करा कर अपनी समस्याएं कम कर सकते हैं। उच्च कौशल वाले श्रम का प्रवाह एक राज्य से दूसरे राज्य में हो सकता है। लेकिन 20000 रूपये प्रति माह से कम वेतन वाली नौकरियों में उस राज्य विशेष के युवाओं को ही जगह मिलनी चाहिए।
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तेलंगाना के अलग होने का एक प्रमुख कारण वहां डोमिसाइल कानून का ठीक से लागू न हो पाना था, जिससे बाहर के राज्यों से आने वाले लोगों को नौकरियां मिलती थी।
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यदि महाराष्ट्र और विदर्भ एरिया में डोमिसाइल कानून सही तरीके से लागू कर दिया जाये तो विदर्भ को अलग राज्य बनाने की मांग करने की आवश्यकता ही नही पड़ेगी। लेकिन इस कानून के अभाव में यहाँ अलग राज्य की बेकार की मांग बढ़ती जा रही है, जिसका तर्क है-- "छोटे राज्य अधिक समर्थ राज्य होते हैं।"
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यदि हम श्रम एक पलायन अनियंत्रित रूप से इधर से उधर होने देते हैं तो महाराष्ट्र और कई अन्य स्थानो पर ज्वालामुखी की तरह स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। अतः डोमिसाइल सम्बन्धी कानून ड्राफ्ट को राजपत्र में यथा शीघ्र प्रकाशित किया जाना चाहिए।