Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

विकिपीडिया के अनुसार : जापान में क्रिश्चियन जनसँख्या मात्र 1% से भी कम है, और इसके बावजूद यहाँ आठ क्रिश्चियन प्रधान मंत्री हुए।
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कृपया देखें- en.wikipedia.org /wiki/Christianity_in_Japan
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इतना ही नही, कई बार अगर प्रधान मंत्री क्रिश्चियन नही थे तो उनकी पत्नी क्रिश्चियन थी। वर्तमान जापानी प्रधान मंत्री की क्रिश्चियन धर्मावलम्बी पत्नी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
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नीचे क्रिश्चियन धर्म को मानने वाले जापानी प्रधान मंत्रियों और उनके कार्यकाल की एक सूची दी गयी है-
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Hara Takashi --- सितम्बर 1918 से नवम्बर 1921 = 38 माह = 3 वर्ष लगभग
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Takahashi Korekiyo --- नवम्बर 1921 से जून 1922 = 7 माह = 0.5 वर्ष लगभग
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Tetsu Katayama --- मई 1947 से मार्च 1948 = 10 माह = 1 वर्ष लगभग
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Shigeru Yoshida --- अक्टूबर 1948 से दिसंबर 1954 = 74 माह = 6 वर्ष लगभग
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Ichirō Hatoyama --- दिसंबर 1954 से दिसंबर 1956 = 24 माह = 2 वर्ष लगभग
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Masayoshi Ōhira --- दिसंबर 1978 से जून 1980 = 18 माह = 1.5 वर्ष लगभग
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Tarō Asō --- सितम्बर 2008 से सितम्बर 2009 = 12 माह = 1 वर्ष लगभग
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Yukio Hatoyama --- सितम्बर 2009 से जून 2010 = 10 माह = 1 वर्ष लगभग
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कुल = 193 माह = 16 वर्ष !!
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हम यह भी कह सकते हैं कि जापान के संभ्रांत वर्ग (elitedom) को मिशनरियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। .
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यह कैसे संभव हुआ? जापान के उद्द्योगों, बिकाऊ मीडिया आदि में पश्चिमी देशों ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। अतः जापान के उस विशिष्ट अभिजात्य वर्ग (elitemen) की यहाँ तूती बोलती है जो पश्चिमी देशों को प्रश्रय देने में तनिक भी गुरेज नही करते।
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जापानी समाज को सीधे- सीधे प्रभावित करना पश्चिम के लिए एक टेढ़ी खीर है। मिशनरियों ने यह भांप लिया कि अपने नव- धर्मान्तरित व्यक्तियों का प्रयोग करके वे जापान में बड़े पैमाने पर धर्मान्तरण कराने में कामयाब नही होंगे। इससे प्रतिरोध भड़क सकता है। लेकिन जापानी अभिजात्य वर्ग के माध्यम से वे भारत और पूरे विश्व के अन्य देशों में भी ईसाइयत का प्रचार कर सकते हैं। दूसरी तरह से कहें तो जहाँ अमेरिका से आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पूरी तरह मिशनरियों के रंग में रंगा है, वही जापान से आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भी अघोषित तौर पर मिशनरियों का ही प्रचारक है।
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अतः यदि नमो- वादी यह सोचते हैं कि जापान से FDI लाना अमेरिकी FDI की तुलना में कम हानिप्रद होगा, तो वे भूल कर रहे हैं।
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इसका मेरे द्वारा प्रस्तावित समाधान यह है कि हम ऐसे कानून ड्राफ्ट प्रकाशित करें जिनके माध्यम से हिन्दू मंदिरो की व्यवस्था सुधारी जा सके, और हिन्दू इतने सशक्त बन सकें कि वे मिशनरियों द्वारा किये जा रहे विनाश को रोक सकें। इसके लिए मेरे द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट पढ़ने के लिए देखें --
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