Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
नमो भक्त--- एम टेक, इंजीनियर, 6 वर्षों का कार्य अनुभव, कार्यकुशल, बहुत अच्छी सैलरी, पूरा मोदीनामा जुबानी याद, यूट्यूब पर नमो का प्रत्येक भाषण सुनता है----- और उसे पता नही कि (1) जनगणना- 2011 के धर्म सम्बन्धी आंकड़े सोनिया/ नमो द्वारा छिपा लिए गए (2) FDI के कारण विदेशी मुद्रा संकट पैदा होगा (3) विदेशी मुद्रा के प्रत्यावर्तन से उत्पन्न संकट क्या है (4) भारत किस हद तक जनसँख्या वृद्धि की समस्या का सामना कर रहा है (5) मिशनरियों की भारत में बढ़ती गतिविधियों के बारे में भी वह नही जानता (6) काला धन और मॉरीशस संधि के बारे में नही जानता, न ही सेज़ के बारे में पता है !! … ऐसी कितनी ही समस्याओं के बारे में वह नही जानता, लिखने पर सूची बहुत लम्बी होती चली जाएगी ..
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आज मेरी मुलाकात ऐसे ही एक कट्टर मोदी समर्थक से फोन पर हुई। इतना कटटर समर्थक कि पूरा मोदी- नामा उसे जुबानी याद था। उसे पता था कि मोदी बचपन में मोदी ने अपने घर में ही एक मगरमच्छ का बच्चा पाल रखा था। उसे मोदी के माता- पिता के नाम, जन्मतिथि, जन्मस्थान, आदि सब कुछ याद है। वह टीवी तथा यूट्यूब पर नमो का प्रत्येक भाषण सुनता है, तथा उनके द्वारा कही गयी प्रत्येक बात बता सकता है। यहाँ तक कि किस भाषण के समय नमो ने कौन सी ड्रेस पहन रखी थी, यह भी उसे याद है। हो सकता है अंतिम वाक्य में मैंने थोड़ी अतिश्योक्ति कर दी हो, लेकिन शेष सब कुछ शब्दशः सत्य है।
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कृपया ध्यान दें- वह एक विद्वान, पढ़ा- लिखा, कार्यकुशल व्यक्ति है। उसके पास एम टेक की डिग्री तथा 6 साल का कार्य अनुभव भी है।
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और निम्नलिखित तथ्यों से वह अनभिज्ञ है-
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(1) उसे पता नही कि जनगणना- 2011 के धर्म, भाषा, बांग्लादेशी आदि सम्बन्धी आंकड़े सोनिया/ नमो द्वारा छिपा लिए गए।
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(2) उसने कहा कि "FDI अच्छा कदम है, चूँकि इससे रोजगार बढ़ेंगे।" लेकिन उसे यह पता नही था कि इससे विदेशी मुद्रा के प्रत्यावर्तन की समस्या उठ खड़ी होगी।
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(3) यहाँ तक कि उसे यह भी पता नही कि विदेशी मुद्रा संकट क्या है !!
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(4) उसे यह पता नही कि भारत जनसँख्या वृद्धि की कैसी समस्या से जूझ रहा है।
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(5) उसे भारत में, या यहाँ तक कि गुजरात या अहमदाबाद तक में तेजी से पाँव पसारती मिशनरियों के बारे में तनिक भी जानकारी नही है !!
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(6) उसे काला धन और मॉरीशस संधि में अंतर नही मालूम।
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(7) उसे यह पता नही कि मॉरीशस संधि क्या है, उसे पता नही कि सेज़ क्या है !!
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जिन महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में वह नही जानता, उनकी सूची बहुत लम्बी है। यह सिर्फ एक नमो- भक्त की ही कहानी नही, बल्कि सोनिया- भक्त और एके- भक्त भी इससे कुछ अलग नही।
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इस प्रकार प्रत्येक SoMoKe- भक्त की कमोबेश यही कहानी है। वे यूट्यूब, वाट्स एप्प, टीवी आदि पर अपने नेता के सारे भाषण सुनते हैं। लेकिन उन्होंने किसी भी कानून ड्राफ्ट की एक लाइन तक नही पढ़ी होती, न ही उन्होंने कभी जनसँख्या, अर्थशास्त्र आदि के सांख्यिकीय आंकड़े देखने की कोशिश की होती है !!
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अतः जब तक हम मतदाताओं को तथ्यों की सही जानकारी नही देंगे, तब तक वे अपने प्रिय नेताओं को इतने ही मंत्रमुग्ध होकर देखते रहेंगे।
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समाधान सरल है--- इन सभी मुद्दों तथा उनके समाधानो के बारे में पम्पलेट वितरित करना तथा समाचारपत्रों में विज्ञापन देना। यह कार्य सरल है, किन्तु इसके लिए सामूहिक समय और श्रम की जरूरत है। अन्यथा हम समस्याओं के दलदल में धंसते चले जायेंगे।