Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
1. ऐसी योजना को आप क्या नाम देंगे जिसमे सरकार ऐसे कानून ड्राफ्ट प्रकाशित करती है जिनके अंतर्गत विदेशी कम्पनियाँ नगरों में जनसेवा सम्बन्धी कार्य जैसे पानी, बिजली की आपूर्ति, सीवर, यातायात व्यवस्था, सार्वजनिक परिवहन आदि को अपने हाथों में ले लें, और भारतीयों को इनमे भागीदारी की अनुमति न दी जाये !!! क्या आप इसे "विदेशियों के हाथों में अपना सब कुछ सौंपना" कहेंगे? मैं तो इसे "स्मार्ट सिटी" का नाम देता हूँ !! अपना सब कुछ बेच देना= स्मार्ट सिटी। नही? अब जिनकी आदत नारेबाजी करने की है वे चिल्लायेंगे- "स्मार्ट सिटी की जय हो", "हर शहर स्मार्ट शहर" (every city smart city) !!! कुछ स्मार्ट शहर जापानियों द्वारा निर्मित होंगे कुछ अमेरिकियों द्वारा, लेकिन भारतीयों द्वारा निर्मित/ विकसित शहर कोई नही होगा !!
.
2. FDI= First Develop India ----
.
मान लीजिये एक भारतीय भारत में काम करता है, और अपना माल निर्यात करके 1 अरब डॉलर लाता है। मान लीजिये उनके बदले RBI उसे 6000 करोड़ रूपये देता है, और उन रूपयों को वह भारतीय किसी बिजनेस में निवेश करता है, उसे 500 करोड़ का लाभ होता है, जिसमे से 200 करोड़ टैक्स चुकाता है। टैक्स चुकाने के बाद जो 300 करोड़ रूपये का लाभ होता है उस रकम को भारत सरकार उसे डॉलर के रूप में नही चुकाएगी। जबकि यदि कोई विदेशी 1 अरब डॉलर लाता है, RBI उसे 6000 करोड़ रूपये देता है, और उन रूपयों को वह विदेशी व्यक्ति किसी बिजनेस में निवेश करता है, मान लीजिये उसे 500 करोड़ का लाभ होता है, जिसमे से 200 करोड़ टैक्स चुकाता है। टैक्स चुकाने के बाद जो 300 करोड़ रूपये का लाभ होता है उस रकम को भारत सरकार उसे डॉलर के रूप में चुकाएगी !!
.
इस प्रकार SoMoKe द्वारा लागू किये गए FDI से भेदभाव बढ़ेगा। अब चूँकि भारत सरकार के पास डॉलर की कमी है, अतः वे विदेशियों को यह प्रस्ताव देंगे कि "आप हमसे डॉलर मत मांगें और हम आप पर कोई टैक्स नही लगाएंगे !!" इस प्रकार SoMoKe देशी व्यक्ति से तो 200 करोड़ का टैक्स लेंगे, वही विदेशी को कोई टैक्स नही चुकाना पड़ेगा !! अतः वर्ष दर वर्ष विदेशी पूंजी बढ़ती जाएगी। शीघ्र ही उनके पास बहुत पूंजी होगी, उनके उत्पादों की कीमत कम होगी, वेतन अच्छा होगा और देशी कंपनिया महज उनके उपग्रह बन कर रह जाएँगी !!
.
यह है make in India = FDI = First develop India का सच !!
.
इसका यह समाधान मैं प्रस्तावित करता हूँ कि भारत सरकार ऐसे कानून ड्राफ्ट प्रकाशित करे जिनके अंतर्गत ऐसे प्रावधान हों कि सरकार किसी को भी डॉलर के रूप में लाभांश नही देगी। प्रत्येक वह व्यक्ति जो डॉलर का निवेश करना चाहते हैं ऐसा अपने रिस्क पर करें, प्राइवेट व्यक्तियों से निजी स्तर पर लेन- देन करें, और जब वापस जाना चाहें तो उन्ही प्राइवेट व्यक्तियों से डॉलर वापस भी लें। वे अपने लाभांश वापस ले जाना चाहें या नही, दोनों ही स्थितियों में उन्हें टैक्स चुकाना पड़े, टैक्स में कोई छूट न मिले। हमें स्थानीय देशी कंपनियों की कमियों को दूर करने में सहायक कानून ड्राफ्ट भी लागू करने होंगे। ऐसे कानून ड्राफ्टों के लिए rahulmehta .com/301.htm पर अध्याय- 20 देखें।
.
किन्तु यह सब तभी संभव है जब हम नारेबाजी बंद करें। यदि हम SoMoKe के लिए नारे लगते रहे तो उनकी गूँज में कानून ड्राफ्टों की आवाज दब के रह जाएगी।