Pawan Jury BhilwaraRj

1. आखिर क्यों हम इतने कम बजट में मंगल यान सफलता पूर्वक भेज देते है, लेकिन एक अदद असाल्ट रायफल बनाने में हमें मुहं की खानी पड़ती है ?
2. इसरो ने साबित कर दिया है कि मोदी देश के नागरिको को गुमराह कर रहे है ।
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भारत विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में सदा से ही अगुआ रहा है, लेकिन विडम्बना है कि हमने प्रोद्योगिकी का उपयोग कभी हथियारों के आविष्कार और निर्माण में नहीं किया ।
नतीजे के रूप में हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर हुई, हमारी विरासत लूटी गयी, और आधुनिक हथियारों की तकनीक के अभाव में हमारी विश्व गुरुआयत और महानता का मान मर्दन हुआ ।
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इतिहास में झाँक कर देखे तो मालूम होता है कि प्राचीन भारत में हमारे ऋषि मनीषियों ने आयुर्वेद, ज्योतिष, योग और धर्म की मीमांसा के साथ साथ हथियारों की तकनीक को भी महत्त्व दिया, अत: भारत महान के साथ साथ सुरक्षित और शक्तिशाली भी बना रहा । कालान्तर में हथियारों के निर्माण और अनुसन्धान में गिरावट आयी और हमारी महानता नारों में सिमट कर रह गयी ।

^ प्राचीन भारत में ऋषि मुनि आश्रम में हथियारों का अनुसन्धान करते थे, और योग्य शिष्यों को उन अमोघ अस्त्रों का दान देते थे ।
^ पुरोहितो और गुरुओ द्वारा विद्यार्थियों और नागरिको को हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता था ।
कालान्तर में इस प्रवृति में बदलाव आने से हथियारों के अनुसंधान और निर्माण में गिरावट आयी, जिस से हम हथियारों की दौड़ में पिछड़ते चले गए ।
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पिछले 2200 वर्ष में भारत पर कई विदेशी आक्रमण हुए और कमोबेश सभी में भारत की हार हुयी । सिकंदर से लेकर मुगलों तक, और ब्रिटिश से लेकर चीन तक भारत की पराजय का इतिहास बिखरा पड़ा है ।
आखिर भारत महान होने के बावजूद क्यों हारता चला आ रहा है ?
^ क्योंकि जब हम 60 किलो का 6 फूटी भाला ढो रहे थे तब, यूनान ने 18 फुट लम्बे भाले का आविष्कार कर लिया था ।
^ क्योंकि बाबर के पास ज्यादा उन्नत तोपखाना था ।
^ क्योंकि चंगेज़ खान ने भैस के सींगो और हिरन की आंतो के मिश्रण से घोड़े पर बैठ कर चलाये जा सकने वाले धनुष का आविष्कार कर लिया था ।
^ क्योंकि ब्रिटिश की तोपों की भीतरी सतह पर जर्मेनियम का लेप चढ़ा था, जिस से तोपों से लगातार गोले दागने के बावजूद बैरल गर्म नही होती थी ।
^ क्योंकि जब हम योग, आयुर्वेद, खगोल शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान के अनुसन्धान में व्यस्त थे तब अन्य देश हथियारों की तकनीक पर काम कर रहे थे ।
नतीजा, जिस के मन आया उसने 10-20 हज़ार घोड़ो की टुकड़ी को भारत की तरफ हांक दिया, और हमें आधुनिक हथियारों के अभाव में अपनी जमीन और संपत्ति गंवानी पड़ी । यहाँ तक कि यही रवैया आज भी बदस्तूर जारी है ।
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आजादी के समय भारत की सेना चीन से ज्यादा मजबूत थी, लेकिन जवाहर लाल गाज़ी ने 15 वर्ष पञ्चशील और गुटनिरपेक्ष के गीत गाने में गवां दिए जबकि इसी दौरान चीन अपनी सेना मज़बूत करता रहा ।
नतीजा हमें 1962 में मुहं की खानी पड़ी ।
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शाष्त्री जी के संक्षिप्त कार्यकाल के बाद देवी इंदिरा गांधी का कार्यकाल हथियारों के निर्माण और प्रोद्योगिकी के लिहाज से स्वर्णयुग रहा, और भारत परमाणु शक्ति संपन्न देश बना । ज्ञातव्य है कि 1984 में ही द्वितीय परिक्षण की तैयारी पूर्ण हो चुकी थी, लेकिन देवी अम्मा के शहीद हो जाने से यह परिक्षण 1998 में सम्पन्न हो पाया ।
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देवी इंदिरा अम्मा के बाद किसी भी प्रधानमन्त्री का सीना इतना चौड़ा और कंधे इतने मज़बूत नज़र नही आये जो विदेशी सत्ताओ से टकराव मोल लेकर भारत में स्वदेशी आधुनिक हथियारों के निर्माण के लिए आवश्यक क़ानून पास करने का साहस दिखाए ।
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1990 से भारत की सेना के पाये लगातार कमजोर हो रहे है लेकिन पेड मिडिया, सत्ता लोलुप राजनेतिक दलों और RSS जैसे छद्म राष्ट्रवादी दलों द्वारा जानबूझकर इस संबध में नागरिको को जानकारी नही दी जा रही है कि :
^ आधुनिक लड़ाकू विमान, पनडुब्बी, युद्धपोत और मिसाइलो की तो बात ही छोड़ दीजिये, ज़मीनी लड़ाई के बुनियादी हथियार, असाल्ट रायफल की तकनीक तक पैदा करने में भारत नाकामयाब रहा है ।
^ यदि भारत को युद्ध का सामना करना पड़ता है, तो हमे सिर्फ विदेशी हथियारों का ही सहारा है ।
^ स्वदेशी निर्मित रायफल IN-SAS की हालत यह है कि ठन्डे इलाको में मैगजीन जाम हो जाती है, तथा गर्म प्रदेशो में ऑयल लीक होने लगता है ।
^ 2009 से स्वदेशी रायफल TAR के परिक्षण फेल हो रहे है और 5 वर्ष में भारत 5 रायफल बनाने तक में असफल रहा है ।
^ हमारे पास ऐसा कोई रडार नही है, जो चीन की क्रूज़ मिसाईल को डिटेक्ट कर सके ।
^ यह कि हमारे फौजियों को पानी की बोतल कारतूस की पेटी में डालकर ले जानी पड़ती है क्योंकि वेस्ट बेल्ट में बोतल टांकने का हुक नहीं है, कि फौजियो के किट में टोर्च और चाकू तक शामिल नही है, कि वेस्ट पाउच घटिया और बजने वाले प्लास्टिक के बने है, जो कि रात में आवाज करते है, कि घटिया क्वालिटी के चलते फौजियों को जूते और हेलमेट तक बाज़ार से खरीदने पड़ते है ।
^ यह कि यदि हमारी सेना रुपी दीवार टूट जाती है, तो नागरिको के पास लड़ने के लिए सिर्फ सब्जी काटने के चाकू और नेल कटर है ।.
हथियारों के निर्माण के लिए कई देशो के प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है । इसी से 1998 के असफल परिक्षण के बावजूद अमेरिका ने भारत पर दबाव डाल कर 123 ट्रिटी पर हस्ताक्षर करवाए, ताकि भारत भविष्य में कभी परमाणु परिक्षण न कर सके । मंगल आदि के अभियानों से दुश्मन देश को कोई सामरिक खतरा नहीं होता, इसलिए ऐसे अभियानों के संचालन निर्बाध होते है ।
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2. तब : नमो ने जब बयान दिया था कि 'भारत में तकनीक पैदा करने की काबलियत नहीं है, अत: हमें रक्षा क्षेत्र में तकनीक का आयात करना होगा' तब उनके कंधे झुके हुए थे तथा आवाज में गर्मजोशी नही थी ।
अब : आज नमो आत्मविश्वास से लबरेज नज़र आये, जब वो भारतीय वैज्ञानिकों के मंगल मिशन का गुणगान कर रहे थे । उनकी आँखे चमक रही थी और हाथ उसी तरह लहरा रहे थे जिस तरह चुनाव प्रचार के दौरान लहराया करते थे । यह आत्मविश्वास स्वदेशी उपलब्धि की देन है ।
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इसरो के वैज्ञानिको ने साबित किया है कि भारत में उच्च तकनीक को अपने बूते पैदा करने की कूव्वत है, फिर हम अपने रक्षा प्रतिष्ठान विदेशियों के हवाले क्यों कर रहे है ?
जब हम मंगल यान बना सकते है, तो हथियार क्यों नही ?
पिछले ढाई दशक से स्वदेशी हथियारों के निर्माण के बेस को सभी पार्टियों ने बुरी तरह से तोड़ा है, जबकि नमो से उम्मीद थी कि वे रक्षा में स्वदेशी तकनीक के निर्माण को प्रशस्त करने वाले कानूनों को पास करेंगे, वे रक्षा के क्षेत्र में भारत को हमेशा के लिए परजीवी बनाने पर आमादा है ।
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अभिनन्दन वक्तृता में नमो ने कहा कि मंगल अभियान से कुछ देशो को इर्ष्या हो सकती है, उनका इशारा चीन की तरफ है, लेकिन उन्हें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि चीन अपने लड़ाकू विमान, लेसर गाइडेड मिसाइल और क्रूज़ मिसाइलो का निर्माण स्वयं करता है,जो कि युद्ध के दौरान ज्यादा उपयोगी साबित होंगे ।
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समाधान : इस प्रकार के अभियानो से संचार तकनीक का विकास होता है, जो कि रक्षा क्षेत्र के जटिल संचार उपकरणों के विकास में सहायक हो सकते है । हमें जरूरत है ऐसे कानूनों को पास करने कि जिस से हम इस तकनीक प्रयोग हथियारों के निर्माण में कर सके ।
नागरिको से निवेदन है, अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा ऑर्डर भेजे कि ज्यूरी ट्रायल, सात्य प्रणाली, WOIC, राईट टू रिकाल पीएम तथा रक्षा मंत्री के कानूनों को गेजेट में छापा जाए, तथा रक्षा क्षेत्र में FDI की अनुमति नही दी जाए ।
इन कानूनों के ड्राफ्ट यहाँ से मुफ्त डाउनलोड करे :
rahulmehta . com / 301 . h. htm
*मंगल अभियान की सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों तथा उन सभी तकनीशियनो को बधाई, जिनका इसमें सहयोग रहा ।

प्रजा अधीन राजा @ pk